Saturday, 13 July 2019

चल रही इस जिंदगी की
राह कब ये रूठ जाए
बुलबुला पानी का ये जो
जाने कब ये फूट जाए

लोभ के बंधन में बंदकर
लूटते अपने को ही हम
मोह जालों में फंसकर
मारते अपने को ही हम
जाल मकडी से बुने हैं
सांस कब ये टूट जाए

चल रही इस जिंदगी की
राह कब ये रूठ जाए
बुलबुला पानी का ये जो
जाने कब ये फूट जाए

काम का कीड़ा पनपता
तन को करता रोज घायल
प्रेम प्राण तक ना पुहुचा
कान में बजे है पायल
चाह सूरत तक रही जब
आत्मा राह रूठ जाए

चल रही इस जिंदगी की
राह कब ये रूठ जाए
बुलबुला पानी का ये जो
जाने कब ये फूट जाए

"जय कुमार "

Friday, 5 July 2019

रास्ते  तंग  ही  सही
संघर्ष  संग  ही सही
भाई  साथ  है   मेरा
जिंदगी जंग ही सही

"जय कुमार "

हार्दिक बधाई बहुत बहुत शुभकामनाएं दिनेश
जीवन भर निरंतर प्रगति करते रहो ।