Sunday, 4 November 2018

दीपक

अपनी  चौखट  दीप  जलाये, हमने  आज  हजार से
मिट्टी  दीपक  खूब  खरीदे , अबकी  बार  बाजार  से
जला  पटाके  मरे  है  पंक्षी, पर्यावरण हुआ  प्रदूषित
सुनना नहीं आज से हमको, अगले दिनों अखबार से

"जय कुमार"04/10/18

Sunday, 21 October 2018

सत्य  मार्ग  पर चलते  रहना, इतना भी आसान नहीं
रातें दिन को खूब  चिढ़ाती, दिनकर का सम्मान नहीं

कांटों   वाली   राहे   मिलती , पैरो  पर   छाले  पड़ते
हरेक द्वार पर संकट मिलता, मौसम  से मेहमान नहीं

हाथ हवन में हर दिन जलते,दिल पर ठोकर लगती है
कौन है अपना कौन पराया, कर  सकते पहचान नहीं

आत्म बल की कठिन परीक्षा, पल पल हर दिन होती है
वुद्दि  विवेक  से उत्तर बनते, प्रश्नों  का  अनुमान  नहीं

पैर  पसारे  तम  है  फैला, सत्य   सिमटता   कोने  में
झूठ  ने  सौहरत  है  पाई, सच  का अब गुणगान नहीं

सत्य  मार्ग  पर चलते  रहना, इतना भी आसान नहीं
रातें दिन को खूब  चिढ़ाती, दिनकर का सम्मान नहीं

"जय कुमार "21/10/18







Wednesday, 17 October 2018

क्यो  इतना   हँसकर  रोते  हो
कंकड़ों  को  दिल  में  ढोते हो
ख्वाव मीठे फलों के दिखाकर
क्यों  बबूल  के  बीज  बोते हो

"जय कुमार "

Wednesday, 10 October 2018

जो लोग प्यार करते हैं

लोग जो दिल से  प्यार करते हैं
जिंदगी   वो   इंतजार  करते  हैं
हर  दर्द दवा  का  काम  करता
दिल में सफर जब यार करते हैं

जय कुमार

Saturday, 29 September 2018

आदमी  जमीर से आज गुमनाम दिखता है
नादान  क्यों  पाती  तू   बेनाम  लिखता  है

कोठियां,  कारे,   ऐशो    आराम    है   तेरा
कार्यालयों  में  कोढियों  के दाम बिकता है

"जय कुमार"

Thursday, 27 September 2018

मेरे  केवल  कुछ कहने  से,  कैंसे तुम  यूं  रूठ गये  हो
अहसासों की  छोड़ी  बगिया, फूलों  जैंसे  टूट  गये  हो

कुछ कड़वी बातों से मेरी,  आपका शायद है मन मैला 
मेरे  मन   मंदिर   में  तेरा, प्रेम  प्रकाश  केवल है फैला
जैसे बाती मिले  तेल से,  वैसे दिल से दिल मिल जाता
प्रीतम तुम जब रहो साथ में, जीवन का हर पल खिल जाता

ह्रदय से ह्रदय जब मिलता, प्रेम पथ पर पथिक है चलता
ह्रदय  का  दामन  अब छोड़ा  , शीशे  जैसे  फूट  गये  हो

कुछ कहनी कुछ ना कहनी थी, कहने  से जब मैं चूक गया
ह्रदय की प्रिय एक ना पड़ी , प्रेम का फूल तब सूख गया
कल  तक  तेरा  मेरा  ना था, चलते थे हम  साथ साथ में
सारा घर खुशबु  से  महकता, रहते थे जब  हाथ  हाथ में

नजर मिलाने से क्यों डरते, क्या काला जो दिल में रखते
वेहयाई   की  भनक  न  लगी,  चोरों  जैंसे  लूट  गये  हो

मेरे  केवल  कुछ  कहने   से, कैंसे  तुम  यूं  रूठ  गये हो
अहसासों  की  छोड़ी   बगिया, फूलों  जैंसे  टूट  गये  हो

"जय कुमार"14/10/2018

Wednesday, 26 September 2018

Mere Bhav
Tuesday, 27 September 2016

उन परिंद्रो को दर्द ए गम की  फिक्र कहां
इश्क ए दरिया में  जिंदगी  बसर  करते है

उन  दरख्तों  को  हवायें  कहां डरा पाती
सीने  में  जिनके  बबंड़र  सफर  करते है

रोज मिलते है  जमाने  की  राहों  में लोग
भूलते नही जो  दिल  पर असर  करते  है

पुष्प  खिलते  है बागों  में हर दिन ही नये
महकते  वो  जो काँटों  में  बसर  करते है

इक  रोज पत्थर भी  पिगल  जाता  मगर
हम  अपने  जज्वातों  में  कसर  करते  है

बेपनाह  मुहब्बत  के  जज्वात  वयां नहीं
चाह  में  उसकी  जय  रूह नजर करते है

"जय कुमार"

Wednesday, 19 September 2018

पढ़ले हर कोई

पढ़ले  हर  कोई  किताब  की  तरह
छुपाये  न कुछ भी  नकाब की तरह

उलझन न रख  अपने दामन में यार
देखले  हर  कोई  लिबास की  तरह

कभी न कभी  वह सामने आ जाता
जनाब  उस बिगड़े हिसाब की तरह

इश्क वक्त के साथ करे गहरा असर
पुरानी   बंद  उस   शराब  की  तरह

लाख  जिंदगी   जिये  ऐशो  आराम
सुकूं  नहीं  उसके  आदाब की तरह

जिंदगी  मीठे  जहर  का नाम  दोस्त
महफिले-यार   के  शबाब  की तरह

हिज्र की  आग को  बयां  करु  कैंसे
जला  है तू जय  आफताब की तरह

"जय कुमार "16/09/18

यह मेरी मौलिक रचना है

Saturday, 15 September 2018

पढ़ले हर कोई

पढ़ले  हर  कोई  किताब  की  तरह
छुपाये  न कुछ भी  नकाब की तरह

उलझन न रख  अपने दामन में यार
देखले  हर  कोई  लिबास की  तरह

कभी न कभी  वह सामने आ जाता
जनाब  उस बिगड़े हिसाब की तरह

इश्क वक्त के साथ करे गहरा असर
पुरानी   बंद  उस   शराब  की  तरह

जिंदगी  मीठे  जहर  का नाम  दोस्त
महफिले-यार  उस शबाब  की तरह

"जय कुमार "16/09/18

Monday, 10 September 2018

दिल बिकता

दिल  बिकता  रहा रोज बाजार में
सिर्फ  घाटा है  दिल के व्यापार में
कम  लोग  ही  मुनाफे  में पाते  हैं
खबर  पहली है आज अखबार में

" जय कुमार "11/09/18

आस

आस आसमान से टूटती रही
जिंदगी  जन्म  से  लूटती रही
गिरा उठा चलने को हर दफा
भरोसे  की  गगरी फूटती रही

"जय कुमार "11/09/18

मैंने  दिल में तेरा करम पाल रखा है
तुझे भरोसा नहीं वहम पाल रखा है
आज भी उजला चेहरा तेरा दिखता
तू समझता नहीं अहम पाल रखा है

"जय कुमार"10/09/18

Tuesday, 28 August 2018

जिंदगी   क्या  कटी   पतंग  है
प्रेम   की   गली  क्यों   तंग  है

चाहा   जिसे   वो  मिला  नहीं
दस्तूर   से   बंधा  वो   संग  है

वादों     इरादों       की    बातें
अहसास   सारे   क्यों  भंग  है

एक   अर्से   बाद   देखा   उसे
दिल में छिड़ी अजीब  जंग  है

गहरे    जख्म    खाये    उसने
दिखता नहीं  दिल  वो  अंग है

"जय कुमार "29/08/18



बेरहम बेबजह बदनाम न कर

मुहब्बत  को तू सरेआम न कर
वादों को अपने  गुमनाम न कर
बेकार के वहम  रहें  हैं  दिल में
बेरहम  बेबजह  बदनाम न कर

"जय कुमार "

Monday, 20 August 2018

कृष्णा

"हाइकू"

होंठ बाँसुरी
कानन हो कुंड़ल
मोहन मारो

गायन संग
वन में जो घूमत
माखन चोर

माखन चोर
गौवरधन धारी
कृष्ण मुरारी

रास रचाये
माखन चोरी खाये
मन मोहन

यशोदा प्यारो
नंदलाल कहायो
देवकी जायो

 
मन बसिया
रस रसिया कृष्ण
कण  कण में

कारे तन में
प्रेम को  है उजारो
बसा भक्ति में

मोर मुकुट
मुरली के धारक
कृष्ण हमारो

गीता का ज्ञान
करा कर्म का भान
जन सम्भारो

"जय कुमार"

Monday, 6 August 2018

हौंसलों  को  पर   दिया   करो
कभी  अपने  को  जिया  करो

जिंदगी   से  मुहब्बत  हो  गर
थोड़ी  थोड़ी   ही  पिया  करो

रंज  पाले   है   खूब   दिल  में
बेवजह  ही  हँस   लिया  करो

सुकूं  मिले  दिल  को  जिससे
काम  वो भी  कर  लिया करो

चिराग  अँधेरे  से  हारते  नहीं
एक चिराग जला  लिया करो

मौसम की  रवानी  को देखके
बूँदों  में  ही भीग  लिया  करो

दिल  दे  न   गवाही   यार  वो
काम  हरगिज  न  किया करो

इस  रंग  बदलती  दुनिया  में
एक पहचान बना लिया करो

इश्क  याद आये  महफिल में
अपने अश्क छुपा लिया करो

मुहब्बत  की गैरत  मर  जाये
जज्जवात  दबा  लिया  करो

गुलशन को  हो  जरुरत  तेरी
हँसते हुए  कुर्बानी दिया करो

सारे  गमों को कह अलविदा
जिंदा  दिली  से  जिया  करो

"जय कुमार"

Wednesday, 1 August 2018

मुहब्बत

मुहब्बत  का नूर  जब  गहरा देखोगे
शिद्दत  से  चाहने  पर  पहरा देखोगे
उल्फत की कहानी जब सामने होगी
मेरी  आँखों  में  ब  चेहरा  देखोगे

"जय कुमार "

मुझे  वक्त के  हाथ में  सौंपता  रहा
जहर मिला प्यार क्यों परोसता रहा
मैं साथ  चलने  को खड़ा होता रहा 
उस जज्बे को तू खंजर खौंपता रहा

"जय कुमार"

Tuesday, 31 July 2018

आओ  प्रिये  फिरसे  सावन  आ  गया
परदेश  से  अब  घर  साजन आ  गया
रिमझिम  बारिश ने  आग  लगाई  जो
मिलने का मौसम मन भावन आ गया

"जय कुमार "



Sunday, 29 July 2018

चमन की  फिजाओं  में अमन  करना  होगा
अमन के  पैगामों  से अब गगन भरना  होगा
मजहबी नफरत न पले किसी के भी दिल में
ईद  व दिवाली का अब  मिलन  करना होगा

"जय कुमार "

Sunday, 22 July 2018

इक   बूढ़ा  बचपन   में  मर  गया
कम समय में बहुत कुछ कर गया
चलता    रहा   बर्षो    सोते    हुए
आंखें   खुलते  ही   वह  तर  गया

"जय कुमार"

Sunday, 8 July 2018

कदम  बढे  की  कायनात  साथ  देने  लगे
उलझी  हयात को  मुकम्मल बात देने लगे
नियत नेक हो जब तमन्नाओं की चाहत में
फरिश्ते फलक  उस पार से हाथ  देने लगे

"जय कुमार "08/07/2018

Monday, 2 July 2018

कलम जब सियासत का नमक खाने लगे
अपने  आकाओं  का  गुणगान  गाने  लगे
समझना   उस   देश  के  सब  टूटे  आईने
लोग  दुश्मन   को   मेहमान   बनाने   लगे

"जय कुमार"02/07/18

Sunday, 1 July 2018

कटी पतंग का  ठिकाना क्या  होगा
तुमारे  बिन यह  जमाना क्या  होगा
बिन बाती तेल  का चिराग बन गया
उस शख्स का अफसाना क्या होगा

"जय कुमार "१/७/१८

Saturday, 16 June 2018

दिल के बदले में दर्दे दिल मिलते हैं
गुलाब  के बागों  में  शूल  पलते  हैं
नजरों  से   मयकशी   करने   वाले
परवाने  ताउम्र  आग  से  जलते  हैं

"जय कुमार "

Monday, 11 June 2018

जिंदगी के  गम भुलाने चला फिर
यादों को जाम पिलाने चला फिर
खुद से मिला नहीं इक जमाने से
खुदको खुद से मिलाने चला फिर

"जय कुमार "

Sunday, 10 June 2018

झूठ को चिल्लाने दो ईमान अभी बाँकी है ।
सच्चाई कहने  को  जुबान  अभी बाँकी है ।
कातिल   हौंसले  पस्त  नहीं  होंगे   हमारे  ,
खून से सने  जिस्म में जान अभी बाँकी है ।।

"जय कुमार"

Friday, 8 June 2018

बियाबानो  से जब  गुजरता हूँ
पहले  से   ज्यादा  संँवरता  हूँ
ताल्लुक है  संघर्ष की आग से
दिनो दिन, मैं और निखरता हूँ

"जय कुमार "09/06/18

Wednesday, 6 June 2018

हम  मंदिर  मस्जिद  में  बैठे  रहे
किसान जब सड़कों पर लेटे रहे
मरे  वो  जालिम  की गोलियों सें
धरती   माता   के  जो   बेटे  रहे

"जय कुमार "७/६/१८

Tuesday, 5 June 2018

हर मर्ज  की दवा रखता हूँ
साथ में, मयकदा रखता हूँ

कोई मिले, भूले न जिंदगी
आदतें कुछ जुदा रखता हूँ

दुश्मन भी  दोस्त बन जाते
यार   ऐंसी  अदा  रखता हूँ

"जय कुमार "06/06/18

Tuesday, 29 May 2018

नफरत के शहर में यारो प्यार लिये बैठे हैं
वेहयाई की चौखट पर इजहार लिये बैठे हैं

"जय कुमार "

Monday, 28 May 2018

आंखे  नम न  कर
कोई  गम   न  कर
हार   जायेगा  तम
हिम्मत कम न कर

"जय कुमार "

Thursday, 24 May 2018

मुझे   वक्त  के  हाथों में सौंपता  रहा ।
जहर मिली मुहब्बत वो परोसता रहा ।
साथ  चलने को  खड़ा  मैं  होता  रहा , 
मेरे  जज्बे को खंजर वो  खौंपता रहा ।।

"जय कुमार"

Sunday, 20 May 2018

मौन जब बोलता है
राज तब खोलता है
दिल का तराजू यह
बराबर  तौलता   है

"जय कुमार"

Tuesday, 15 May 2018

जिंदगी  को सरल कर लिया मैंने
पाषाण को तरल कर  लिया मैंने
समस्याएं खूब उत्पात मचाती है
कष्ठो  को  बिरल  कर लिया मैंने

"जय कुमार "

Monday, 14 May 2018

नर्रा  नर्रा  मैं  हार   गओ
मोरी  बात  सुनत  नईंया
मनकी बात कहत नईंया

जबसें आओ हे खैतन सें
कठवा बैला लय जौतन सें
ऊंगो  ऊंगो  जो  बैठो  हे
पैले  जैसौं  लगत  नईंया
मनकी बात कहत नईंया

हफ्ता भर में ब्याव मोडी को
सूत चुकाने हे करोढी को
खैतों से कछु नई निकरो
पानी टेम पे गिरत नईंया
मनकी बात कहत नईंया

खून पसीना एकई करके
दिनई रात  देखई  करके
कछु फसल जो हाथे आई
मंडी में भाव मिलत नईंया
मनकी बात कहत नईंया

भीड़ लगी काये खोरन में
बैठे  रोबे  सब  दोरन  में
ओके घरे आफत आ गई
बेवजे कोऊ  मरत नईंया
मनकी बात कहत नईंया

अर्थी उठ रई फिर किसान की
दुनिया  समझे  अनजान की
जो  हालत  में  हम  रेत  हे
ओ  में   कोऊ  रहत  नईंया
मनकी बात  कहत  नईंया

का अनहोनी जा होन लगी
रती मईया अब रोन लगी
जैंसौ दर्द किसान सहत हे
बैंसौ दर्द कोऊ सहत नईंया
मनकी बात कहत नईंया

नर्रा  नर्रा    मैं  हार   गओ
मोरी    बात  सुनत  नईंया
मनकी  बात  कहत  नईंया

"जय कुमार "25/05/18

Friday, 11 May 2018

गांव  लिखता हूँ शहर  नहीं  जानता
भोर लिखता हूँ  दुपहर नहीं जानता

आग  दिखती  है  पानी  लिए  रहता
कलम पकड़ी है खंजर  नहीं जानता

प्रेम  में   धोखा  आता  नहीं   हमको
रिश्ते निभाता हूँ  जहर  नहीं जानता

चला सख्त राहों पर मंजिल न मिली
राह का राहगीर  सफर  नहीं जानता

मुहब्बत  रोती   रही  आज  चुपचाप
बेदर्द  उसकी  तु  नजर नहीं  जानता

तोड़  दिया दिल  को सीसे  की तरह
आग  लगाता  है असर  नहीं जानता

मतला   मिसरा    मक्ता  आता  नहीं
गजल कैसे  लिखूँ बहर नहीं जानता

"जय कुमार"12/05/18

Thursday, 3 May 2018

रोज हमे पत्थर दिल कह - कह  कर नहीं थकते
फना हो जाते हैं पत्थर भी किसी को zxका घर बनकर

जय कुमार

Tuesday, 1 May 2018

सरकार

हर  बार धोखे  मिले नाम उसका सरकार  लिखता हूँ
दगे  की  कहानी   छुपाता  नहीं बार  बार  लिखता हूँ

मुहब्बत  देखने  दिखाने  हाथ  से   हाथ  मिलाने  की
जनाब  अंदर  के मनसूबों  की मैं  दरकार  लिखता हूँ

ईमान  की  कसम  खाए बैठे  हैं  मखमली कुर्सी  पर
मुल्क की  बज्‍म  ए  इंसाफ  को बाजार   लिखता  हूँ

मुहब्बत  रात  के आगोश  में  उजाले  में  छोड़  जाते
बहरूपी  इनके  इश्क  के बिगड़े  किरदार लिखता हूँ

जमीन छीन  ना ले  कोई  दिल  की  मैं चौकस  रहता
हर  रोज दिल में उसका नाम  लाखों  बार  लिखता हूँ

उजाड़  गया  हर  मौसम  को  जय  देखते  ही  देखते
बड़ा बेवकूफ़  हूँ   मुहब्बत को  सदाबहार  लिखता  हूँ

"जय कुमार "01.05.2018

Friday, 20 April 2018

मेहनत  के   हाथों  मे , छालों  का  बसेरा  है
सूरज  की  बस्ती  में , फैला   क्यों  अंधेरा है
विकास व प्रगति क्या  खो  गए हैं जुमलों में
उजाला  कैद  हो  गया , कैसा  यह  सबेरा है
"जय कुमार"

Tuesday, 17 April 2018

मौत से मिलकर भी लौट आता  हो।
जिंदगी  तेरा  साथ  जो  निभाता हो।।

आसमान  की  ऊंचाई  पर  रहकर।
पैरों  को अपने  जमीं  पर  पाता हो।। 

भरोसे की नींव भी   

काँटों की बस्तियों मैं  रोज  रहकर।  
फूलों की  खुशबु  बिखेर  जाता हो।।

वादों   के   टूटने    से   टूटे    कैंसे।
भरोसे के  रिश्ते को जो निभाता हो।।


"जय कुमार "१८/०४/१८














Sunday, 1 April 2018

सच को वनवास  मिला  झूठ  को ताज मिला
आवाज गुम  कोयल की गधे को साज मिला
स्वार्थ बेल ने पैर पसारे ढांका है आसमां को
आंखे  तयखानों में बंद  अंधों को राज मिला

"जय कुमार "

रोते तो  हम  भी है  दिखाना  नहीं  आता
दिल में बस गये उन्हे रुलाना नहीं आता
पत्थर  नहीं सीसे का  दिल रखते है हम
टूटते  हम  भी  है  बिखरना  नहीं  आता

"जय कुमार "

Thursday, 15 March 2018

बेगारी

न  चांद  होगा  न  तारे  होंगे
पडेलिखे   हम  बेगारे   होंगे
फरमाया  है नई  सरकार ने
पकोडे  तुमारे  सहारे   होंगे
देखना  ख्वाब  में  बना  बाबु
सच में  चने  ही छुहारे  होंगे
ये  निकला  नोटीस  छापे में
सब  बहाली से किनारे होंगे
निकली रिक्तियां आज कुछ
आवेदक  फीस के मारे होंगे
चपरासी की कुछ पोस्ट पर
पी एच डी   फार्म  डारे  होंगे

"जय कुमार "१५/०३/२०१८

Monday, 5 March 2018

दवा जब दर्द देने लगे

प्रेम जब कर्ज देने लगे
हवा जब मर्ज देने लगे
जिंदगी  कैंसे बसर हो
दवा  जब दर्द देने लगे

"जय कुमार"०६/०३/१८