Friday, 24 January 2014

मेरी मुहब्बत

मेरी मुहब्बत कि बस इतनी सी कहानी है..
दिल में भरा है दर्द और आँखों में पानी है..

तेरे दम पर ही जी रहा हूँ अब ये जिन्दगी 
सारी उम्र कि है बस एक ही कि बन्दगी 
तेरी यादों में ही हरियाली नजर आती है 
वर्ना चारो तरफ तो बस पानी ही पानी है..

अब कोई तो आज फिरसे करें उसकी तलाश 
कोई तो लेकर आये उसको मेरे दिल के पास 
तड़प बड़ चुकी मेरी इन प्यासी अँखियों की
हुआ ना दीदार तो मेरी जान जानी ही जानी है..

समझ सकता है बो ही मेरे दिल कि प्यास
बस बची है मेरे सबलने की एक ही आस
बेहोश हो चुका है आज फिर कोई दीवाना
आज फिर कोई भक्ति में मीरा दीवानी है..

ह्रदय को अपने मैंने अब खोलकर रख दिया
हर पल को अपने मैंने तेरे नाम कर दिया
चेहरे लाखों देखता रोज ज़माने कि राहो में
मेरे मन में बस एक तेरी ही सूरत समानी है...

"जय कुमार " 30/12/2013

Saturday, 18 January 2014

तेरी रुश्वाई में

तेरी रुश्वाई में भी वफा नजर आती है ।
मेरी रात भी तेरी यादों में गुजर जाती है ।

कर गुजरते हम भी यहाँ कुछ खास यार ,
सारी हिम्मत तेरी यादोँ में बिखर जाती है ।

अब साथ छोड़कर जा रहा क्यों तू मेरा ,
क्या जिँदगी अपने वादोँ से मुकर जाती है ।

मैंने इबादत की तेरी इस खुदगर्ज जहां मेँ ,
तू क्यों अब खुदा बनकर भी विफर जाती है ।

परवाना कहकर हँसे लोग मुझपर जमकर ,
इज्जत मिलती उसको जो जलाकर जाती है ।

रेत हाँथो मेँ लेने का प्रयास बुरा ना था ,
बदकिस्मत वो जो हाथों से बिखर जाती है । 

आग आफताफ मेँ है यह कह कर ना भागो जय ,
रोशनी से जहान की किस्मत संवर जाती है ।

"जय कुमार" 17/01/2014

Wednesday, 15 January 2014

जिसने गम मे

जिसने गम मेँ भी हँसने का हुनर सीख लिया . . .
उसने अपनी जिंदगी के हरेक पल को जी लिया . . .

अंधेरे रास्ते पर उजाला आयेगा जरुर एक दिन ।
प्रेम का गीत तू भी जरुर गुनगुनायेगा एक दिन ।।
उनने ही जिँदगी के सही मायने समझे हैँ यहाँ ,
जिनने मुस्कराते मुसीबतो का हलाहल पी लिया . . .

मुझसे दूर नहीँ तेरी यादेँ ही सहारा देतीँ हैँ ।
मेरे ह्दय मेँ बसकर हरेक पीड़ा हर लेतीँ हैँ ।। 
साथ जिँदगी का भी कम लगता है किसी को ।
किसी ने एक पल मेँ ही सदियोँ को जी लिया . . .

कैँसे करेँ मेरे यार अब हम तुझसे शिकायत ।
देना ही तो होती है सिर्फ प्यार की रवायत ।।
मुझसे हक छीन लिया तूने अब अपनेपन का ,
तेरी रुशवाई मेँ भी प्यार का अहसास पा लिया . . .

"जय कुमार" 14/01/2014

Saturday, 4 January 2014

ये कैंसे दोस्त

जो साथ निभाने का सिर्फ वादा करते , ये कैंसे दोस्त।
जो साथ खुदगर्ज बनकर रहे हो सदा , ये कैसे दोस्त।

खून का रिस्ता ना सही भरोसे का रिस्ता  बनाया था ,
उस जज्बात  को भी ना समझ पायें  , ये कैसे दोस्त। 

जो झूठ के बल पर देते रहे हो मेरे भरोसे  को धोका,
करते रहे मुझसे ही मेरे ह्रदय का सौदा,ये कैंसे  दोस्त।   

तेरी दौलत तुझको मुबारक हो प्रेम कि राहें मेरी है ,
इन राहों पर भी साथ ना चल सकें , ये कैंसे दोस्त।

राजदार बनाया था हमने तुझको अपने हर राज का ,
जमाने में बिखेर दिया तूने मुझको , ये कैंसे दोस्त।

दिल  से लगाया था हमने जिनको काँटों भरी राहो में ,
वो ही ज़माने के सामने रुशवा करते , ये कैंसे दोस्त।        

अपनी रूह में बसाकार रखा जिनको  हमने अब तक ,
अब वो सामने आकर भी अनजान बने,ये कैसे दोस्त।

तेरे आँसुयो से मेरा दिल दहल जाता है  आज  भी  ,
मेरे जज्बातों पर हँसता है आज तू , ये कैसे दोस्त।  

" जय कुमार "


Friday, 3 January 2014

मैं तेरा ही अक्श था

मैं तेरा ही अक्श था जरा गौर से तो देखा होता।
मैं हर पल साथ था जरा मुड़कर तो देखा होता।

जिस शहर कि राहों में भटके दीवानों कि तरह ,
उस शहर की गलियों में जाकर तो देखा होता।

तू कब मुझसे दूर था हर पल रहा दिल के पास ,
मुझे अपने दिलके करीब रखकर तो देखा होता।

मेरे जज्बात आज तेरे लिये मायने नहीं रखते ,
कभी अपने जज्बातो में ढूंढ़कर तो देखा होता।

असली चेहरा नजर आ जाता अपना तुझको  ,
एक बार मेरी नजरों में झाँककर तो देखा होता।

मुझसे भी तो खता हो गई होगी शायद दोस्त ,
एक बार फिरसे मुझे मौका देकर तो देखा होता।

ख्वाव तो मेने भी खूब देखे थे साथ रहने के तेरे ,
एक बार मेरा भी साथ निभाकर तो देखा होता।

समुन्दर कि लहरे साहिल को छूकर निकल गई ,
कभी साहिल का साथ निभाकर तो देखा होता।

पंछी तो अपना आसियाना फिर खुद बना लेता ,
उड़ने के लिये पंखो को छोड़कर तो देखा होता।

" जय कुमार "

Wednesday, 1 January 2014

आज नया वर्ष है

आज नया वर्ष है आया नये संकल्प है लाया
क्या खोया अब तक हमने और क्या है पाया
करले अपनी ही खोज खबर इस अवसर पर,
अपने अंदर सोचने का ये एक मौका है आया

क्या दे पाये हम समाज को क्या हमने पाया
क्या समझ पाये हम क्या हमने है समझाया
समय कह रहा आज फिर अपने अंदर झांक ,
किसको अपना माना हमने किसको पराया

पिछले से कुछ सीखे आगे की करले तैयारी
समय के साथ चले समय की है चाल निराली
आज नया कल पुराना हो जायेगा यह पल भी
वर्त्तमान और भूत की यह बिडंबना है सारी

पल पल काल के करीब जा रहा यह जीवन
पल पल सांसे कम होती जाती तेरी जीवन
तेल ख़त्म होने को है अब बत्ती जलने लगी ,
मस्ती में डूबा है अपनी ओर भी देख जीवन

जो बीत चुका कल था अब आंगे की बात करें
जो हुआ उसको छोड़े भविष्य़ का श्रृंगार करें
ऐंसा मन पावन हो जाये पुष्पों से खिल जाये , 
अपने की परवाह न हो ओरो कि परवाह करें  

" जय  कुमार "

नव वर्ष की सभी सम्मानीय मित्रों को
मंगलकामनाये ,शुभकामनाये
यह वर्ष आपके जीवन में नई ऊर्जा
लाये .... सादर नमन …