हर तरफ एक ही ,,,,,,,,,,मंजर देखा है !
खिले फूलों पर ,,,,,,,,,,,, खंजर देखा है !!
फसल प्यार की जहां उगा करती थी ,
उसी जमीन को ,,,,,,,,,,,,,बंजर देखा है !
मुखौटा लगाकर ,,,,,,,,,,,घूम रहा है तू ,
दिखता नहीं जो ,,,,,,,,,,,,अंदर देखा है !
उछल कूंद अभिमान में ,,,,,,,करता तू ,
रूप आदमी में,,,,,,,,,,,,,,,, बंदर देखा है !
किसान की लड़की ,,,,,,,जवान हुई है ,
पिता के दिल में, ,,,,, , बबंडर देखा है !
हमेशा खुश मैं ,,,,,,,,रखता हूं उसको ,
आंखों में उसके ,,,,,,,,,समुंदर देखा है !
इतना मुस्कराता है ,,,,,,,,,महफिल में ,
दिल में खुशी का,,,,,,,, खंडर देखा है !!
"जय कुमार"27/09/15