Wednesday, 25 June 2025

सुरक्षा के नाम पर

सुरक्षा  के नाम  पर  बंदूक लिए बैठे हैं 
कल्याण के नाम पर संदूक लिए बैठे हैं
धमकाते  बहकाते   डराते  हें रोज रोज 
कुछेक  ही यहां बम अचूक लिए बैठे हैं 

"जय कुमार "
 



Friday, 20 June 2025

तुम्हारी खुशबू ने जो सारा

तुम्हारी  खुशबू  ने जो सारा घर महकाया है 
गुलाबों  ने  ही  खुद आके सबको बताया है 

मौसम बदल रहा है बदल रही है आवो हवा
ख्वाबों  में ही सही उसने प्यार जो जताया है

"जय कुमार "




Sunday, 15 June 2025

मुकम्मल हूं जिनसे उनका

मुकम्मल हूं जिनसे उनका ही ईमान  लिए बैठे हैं 
सबकुछ है उनका जो हम आसमान  लिए बैठे है
मंदिर,   मस्ज़िद, चर्च   गुरुद्वारा  में  ढूंढने  वालों 
घर में ही मां बाप के रूप में भगवान लिए बैठे है 

"जय कुमार "🙏🙏१६/०/२५

Monday, 2 June 2025

उनसे लड़ना झगड़ना

उनसे   लड़ना  झगड़ना   खूब  होता  था 
आंख से मुंह तक बिगड़ना खूब होता था
ऐसा हुआ गर  कुछ  पहर  चुप  रह जाये
रोकर  गले  से   लगना    खूब   होता था

"जय कुमार "2/6/25



Sunday, 1 June 2025

साथ रहकर भी साथ रहने न

साथ  रहकर भी साथ रहने न दिया
नम आंखों  से  आंसू  गिरने न दिया 
सोचता  था  कि  प्रेम  जितेगा मगर
क्रूर नियति ने हमको मिलने न दिया

"जय कुमार "