Tuesday, 31 October 2017

तेरी  हर   राह  में   तुझको  सराहा   जाये |
मेरी  हर  चाह  मे  तुझको   बिठाया  जाये ||

जवान महफिलें फिरसे  खुरापात कर गयी |
दिल ने कहा यादों को फिरसे सजाया जाये ||

दिल मशरूफ मुहब्बत की गलियों में ऐसा |
मुरझाये  जख्मों  को   हरा   कराया   जाये ||

सांझ  चिड़कर आज हिसाब मांगती मुझसे |
सुबह दोपहर क्या किया आज बताया जाये ||

खुशियों  के  बीजो ने  दर्द  के  पौधे उगाये |
मत हो  उदास  हयात  को समझाया जाये ||

नफरतो की आग मे झुलझ गया मेरा शहर |
चौराहों   पर   गीता    कुरान  सुनाया  जाये ||

"जय कुमार"

Wednesday, 11 October 2017

आदिकाल  के अंत से , आया भक्तिकाल !
भक्ति भाव जो ना रखे , हो जाये  बेहाल !!
भक्ति करके जो चला , होता  माला  माल !
जिनके शब्द विरोध में , हो जाता कंगाल !!
"जय कुमार "

Saturday, 7 October 2017

उम्र भर जो कमाया लुटा सा रहा 
भरोसा कल हमारा पिटा सा रहा
चलते रहे खारों कि परवाह न थी
मंजिल का रस्ता तो हटा सा रहा 

जय कुमार

Tuesday, 3 October 2017

मेरे  दिल  से  निकल  गया कोई
अपना बनाकर बदल गया कोई
जिसे  चाहता रहा मैं  शिद्दत  से
उस  भरोसे  को  छल गया कोई

"जय कुमार "