Sunday, 21 October 2018

सत्य  मार्ग  पर चलते  रहना, इतना भी आसान नहीं
रातें दिन को खूब  चिढ़ाती, दिनकर का सम्मान नहीं

कांटों   वाली   राहे   मिलती , पैरो  पर   छाले  पड़ते
हरेक द्वार पर संकट मिलता, मौसम  से मेहमान नहीं

हाथ हवन में हर दिन जलते,दिल पर ठोकर लगती है
कौन है अपना कौन पराया, कर  सकते पहचान नहीं

आत्म बल की कठिन परीक्षा, पल पल हर दिन होती है
वुद्दि  विवेक  से उत्तर बनते, प्रश्नों  का  अनुमान  नहीं

पैर  पसारे  तम  है  फैला, सत्य   सिमटता   कोने  में
झूठ  ने  सौहरत  है  पाई, सच  का अब गुणगान नहीं

सत्य  मार्ग  पर चलते  रहना, इतना भी आसान नहीं
रातें दिन को खूब  चिढ़ाती, दिनकर का सम्मान नहीं

"जय कुमार "21/10/18







Wednesday, 17 October 2018

क्यो  इतना   हँसकर  रोते  हो
कंकड़ों  को  दिल  में  ढोते हो
ख्वाव मीठे फलों के दिखाकर
क्यों  बबूल  के  बीज  बोते हो

"जय कुमार "

Wednesday, 10 October 2018

जो लोग प्यार करते हैं

लोग जो दिल से  प्यार करते हैं
जिंदगी   वो   इंतजार  करते  हैं
हर  दर्द दवा  का  काम  करता
दिल में सफर जब यार करते हैं

जय कुमार