Sunday, 24 September 2017

मुझे  तेरी मुहब्बत का  इशारा  ही काफी  था
तिनके  का डूबते  को  सहारा  ही  काफी था
भले ही वेहयाई  में  होंठ सिल लिये  थे तुमने
एक दिल की नजरों का नजारा ही काफी था

"जय कुमार "23/05/18

Wednesday, 20 September 2017

मुस्कुराती  वस्तियों  में  बबाल   होते  रहे
वक्त   के   साथ   इंसां  कंगाल  होते  रहे

झूठ को मिली शोहरत गुमनाम हुआ सच
ईमान  कि  चौखट  पर  सवाल  होते  रहे

समुंदर  की  खामोशी दिखी न किसी को
दरिया  पर  उफान  के  कमाल  होते रहे

मुहब्बत  के  अहसास  दबे  रहे  दिलों में
वासनाओं   के   रोज   दलाल   होते   रहे

टूटी  न  आशा   आसमान   के   तारो  से
करीबियों  से  जज्वात  हलाल  होते   रहे

गुजारी जवानी  जय  शान शौकत  में तूने
बिगडे  हिसाब  पर अब  मलाल  होते रहे

"जय कुमार "२०/०९/१७

Wednesday, 13 September 2017

जमे हिम के हिमालय को,  पिगलना भी आता है
जाम  ए  गम  पीकर  के,  संभलना  भी  आता  है
कायर  मत  समझ लेना , मेरी  इस खामोसी को
नम्र होकर  झुके सिर को, अकड़ना  भी आता है

"जय कुमार "