Mere Bhav
Friday, 13 October 2023
कीचड़ को गुरूर हो गया की सब मुझसे डरते हैं ।
तुझे पता कहां लोग तेरी गंदगी, दुर्गंध से बचते हैं ।।
"जय कुमार"
Saturday, 7 October 2023
काले दिलों की खूबसूरत मुस्कान देखिए ।
बिना शक्कर के यह मीठे पकवान देखिए ।
बिगड़े चरित्र वाले बन बैठे ठेकेदार समाज के ,
दौड़ घोड़ों की गधों के खुरों के निशान देखिए ।।
"जय कुमार"
Thursday, 3 August 2023
वो गांव वो मेरे शहर
ख़्वाब में आते रोज नज़र
परदेश की चकाचौंध का
कोई पड़ता कहां असर
अपनी बीती रोज़ सुनाता
ज़िंदगी तू सुनती नहीं मगर
मर्ज पेट का कहां ले आया
अंतहीन चल रहा ये सफ़र
कमजोर जड़े दरकता तना
दम तोड़ रहा बूढ़ा शजर
"जय कुमार" ०४/०८/२०२३
Monday, 24 July 2023
हिफाजत के दानवों से देश
हैरान हो गया ।
देख के दरिन्द्रगी मुर्दा भी
परेशान हो गया ।
रहम की भीख माँगता रहा
हाथ फैलाए ,
क्या राम रहीम गंगा का चमन
वीरान हो गया ।।
कदमों के निशानों को परछाई
हटाने लगी है ।
अक्स को अंधेरे की साज़िश
मिटाने लगी है ।
मौक़ा परस्ती मौके में बैठा
सियार वो अब ,
वजूद को मिटाने मीठा विष
पिलाने लगी है । ।
गैरत के पत्थरो से घायल
मकान हो गया ।
इंसान क्या इंसानियत से
अनजान हो गया ।
उठकर चलता चलकर रुकता
कुछ ना कहता ,
लगता वो बूढ़ा शहर अब
बेजान हो गया ।।
"जय कुमार"25/07/14
Saturday, 17 June 2023
कुछ इस तरह से जिंदगी गुजारते हैं हम ।
उसकी यादों को हर पल संवारते हैं हम ।।
मौन रहकर बहुत कुछ कह गया कल वो ।
रकीब का घर बसा अपना उजाड़ते है हम ।।
"जय कुमार"
Tuesday, 11 April 2023
चापलूसों को अच्छा माना जाता है
झूठों को ही सच्चा माना जाता है
अंधेर नगरी चौपट राजा हो तब
लुच्चों को भी चच्चा माना जाता है
"जय कुमार"
Monday, 10 April 2023
अधूरी ख्वाहिशें जिंदा रखती हैं
अधूरी ख्वाहिशें बस मुझे जिंदा रखती हैं
मंजिलों की तड़प का इक मजा ही अलग है
मौत ही तो मुकम्मल है आयेगी इक दिन
ना मुकम्मल हयात का मजा ही अलग है
"जय कुमार "
Sunday, 9 April 2023
मेरी आंख क्या लगी, रिश्ते औकात दिखाने लगे ।
कोई कफन, ताबूत, कोई लकड़ियां जुटाने लगे ।।
"जय कुमार"
Monday, 6 March 2023
लड़ना कोई मजहब सिखा नहीं रहा ।
रंगीन रंगो में क्यों कोई नहा नहीं रहा ।।
बड़ी बदनसीबी है रंगों के त्योहार की ,
दिल से दिल क्यों कोई मिला नहीं रहा ।।
"जय कुमार"
Tuesday, 3 January 2023
आज शिखर
सियासती पंजो में
आस्थायें कैद
"जय कुमार"
Sunday, 1 January 2023
महातीर्थ पर संकट है
सर्वोच्च तीर्थ पर संकट है
तानाशाही नहीं सहेगें
यह आस्तित्व पर संकट है
कण कण जिसका पावन है
तीर्थंकरों का जो दामन है
दूषित उस धरती को जो करे
वही शत्रू वही हमारा रावन है
सब मिल विरोध जतायेंगे
कुम्भकर्णो को भी जगायेंगे
शिखर के सम्मान की खातिर
हर वाधा से लड़ जायेंगे
सोते समाज, जगना होगा
एक सूत्र में बँधना होगा
दिल्ली बहरी है हमें पता है
कानों में ढोल बजना होगा
अहिंसा का पाठ पढ़ा है
सात्विकता से मन भरा है
हम भी है छत्रियों वंशज
गवाही में इतिहास खड़ा है
"जय कुमार"
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