Sunday, 21 May 2017

आईने   सारे   तुड़वा  रहे   है   वो
सच बताने वाला अब कोई न रहे

जय कुमार

Saturday, 20 May 2017

किसी  राह में  मेरा भी  इक  घर  हो !
साथ  हो  तेरा  खूबसूरत  सफर  हो !!

मुकम्मल  हो   कैंसे   दुनिया  हमारी ,
परिन्द्रो को जब  सैय्याद का  डर हो !

जालिमों ने  लूटा  हो  दाना  पेट  का ,
सिर पर हो  आसमां कैंसे  बसर  हो !

जर्रे जर्रे  में  रब  का  नूर  दिखता  है ,
इंसां   गर   तेरी    पाक    नजर   हो !

खुदगर्जी की आग में  झुलझता रहा ,
इस जहां में  भी  इक  प्रेम  नगर  हो !

भरोसा किस  पे  करें  खुदगर्ज  जहां ,
राज  छुपाये  रखो राजदाँ  अगर  हो !

चल सके सुकूं से ईमान कि राह जय ,
जमाने  में  बता  गर  कोई  डगर  हो !!

"जय कुमार"

Thursday, 18 May 2017

आ 
बडा
कदम
राह पर
चले फलक
उस पार हम

ना
रहे
उदास
अब कोई
मानस मन
नव प्रभात हो

Wednesday, 17 May 2017

सफर चला
मीठे खट्टे कल से
हयात तेरा

सूखा भी जल
मृग सम तृष्णा से
जला जीवन

काल की डाल
कट रही धीरे से
आशा समाप्त

आसमान को
धरा से मिलाना था
स्वप्न अधूरा

अर्थ अनर्थ
अंतर नहीं रहा
परम शांति

"जय कुमार"

Monday, 15 May 2017

हालातों   को   अपने    बदलते   रहिये
मुश्किलों   से  हमेशा  निकलते  रहिये
मंजिल मिलेगी इक दिन यकीन रखना
धीरे   धीरे   ही   सही    चलते    रहिये

"जय कुमार"

पूरी  होती हमारी हर मन्नत है
हमारे साथ रहती मां जन्नत है

जय कुमार

Thursday, 4 May 2017

किसी  ने वेगारा  कहा |
किसी ने आवारा कहा |
मां कि  नजरों ने  देखा ,
आंखों  का  तारा कहा ||

"जय कुमार "

Wednesday, 3 May 2017

जख्म   सी  लेना |
जहर   पी   लेना |
कायरता     नहीं ?
घुटघुट जी लेना ||

"जय कुमार "

Tuesday, 2 May 2017

कांच जब जब पत्थर से मुहब्बत करता है
अफसानों  के  नये आयाम  लिखे  जाते  है

"जय कुमार "

कांच जब जब पत्थर से मुहब्बत करता है
अफसानों  के  नये आयाम  लिखे  जाते  है

"जय कुमार "

Monday, 1 May 2017

कोई तो  मुहब्बत  का सिला दीजिए
उस आग के दरिया से मिला दीजिए

तुमे अंधेरे में रहने की  आदत  नहीं
आसियाना  मेरा  ही  जला   दीजिए

"जय कुमार "