झूठ को सच लिखना आसान हो गया ।
कुकर्म को कर्म लिखना आसान हो गया ।
तम को प्रकाश का भय ना रहा शायद ,
सांझ को सुबो लिखना आसान हो गया ।।
कुकर्म को कर्म लिखना आसान हो गया ।
तम को प्रकाश का भय ना रहा शायद ,
सांझ को सुबो लिखना आसान हो गया ।।
"जय कुमार"30/12/14