कोई नज्म सुनाकर क्या करना ।
फिर दर्द बढ़ाकर क्या करना ।
जो बीत चुका वह बीत चुका ,
अब जख्म दिखाकर क्या करना ।
मन मीत बनाकर क्या करना ।
अब प्रीत बढ़ाकर क्या करना ।
जब देख लिया असली चेहरा ,
प्रेम संगीत सुनाकर क्या करना ।
अब जीत दिखाकर क्या करना ।
अब हार दिखाकर क्या करना ।
समभाव में जीना सीख लिया ,
फिर आग दिखाकर क्या करना ।
"जय कुमार" 30/03/2014
फिर दर्द बढ़ाकर क्या करना ।
जो बीत चुका वह बीत चुका ,
अब जख्म दिखाकर क्या करना ।
मन मीत बनाकर क्या करना ।
अब प्रीत बढ़ाकर क्या करना ।
जब देख लिया असली चेहरा ,
प्रेम संगीत सुनाकर क्या करना ।
अब जीत दिखाकर क्या करना ।
अब हार दिखाकर क्या करना ।
समभाव में जीना सीख लिया ,
फिर आग दिखाकर क्या करना ।
"जय कुमार" 30/03/2014