Wednesday, 7 September 2022

मूल मे

मूल  में   मैंने  प्यार  किया  था,  ब्याज  भरती  रहीं  उम्र  भर आंखे ।
कुछ पलों का मिलन ही हुआ था, इंतजार करती रही उम्र भर आंखे ।।

तेरा आना यूं  बहकते हुए मेरा दिल भी  मचल कर उछलने लगा ।
संभाला बहुत संभल  न सका तेरी  बातों से ये मन बहकने लगा ।
सूरत सुहानी इक तेरी लगी, मुझसे  झगड़ती  रहीं  उम्र भर आंखें ।।


कुछ तेरे दिल में कुछ मेरे दिल में अहसासों की अंगड़ाई चली ।
खडे थे  दोनों ही  यौवन के द्वारे मधुमास में जैसे पुरवाई चली ।
दिलों की कहानी वक्त ने लिखी ,  दरिया बहाती  रहीं उम्र भर आंखे ।।

दुनिया के चलन पर चल न सके, इक दूजे से हम कभी मिल न सके ।
समय की चाल कुछ ऐसी चली, शाखों पर कभी  फूल खिल न सके ।
जाने के बाद भी पलके खुली थी, तुझको  बुलाती  रहीं  उम्र भर आंखे ।।

"जय कुमार"





Sunday, 8 May 2022

बचपन याद आने लगा

बचपन याद आने लगा 
दर्द को  सहलाने  लगा 
बोला   चल  मेरे  साथ 
उम्र  को  चिढ़ाने  लगा 

"जय कुमार"



Wednesday, 30 March 2022

खुद ही खुद

खुद की ही खुद कहानी लिख ले 
जैसा   सीरत  से  वैसा  दिख  ले 
क्यों    चमकीला   रेपर    लगाये  
जितनी  कीमत उसी में  बिक  ले 

"जय कुमार "

Sunday, 13 March 2022

वक्त  के  प्रहार  से 
प्यार  के बुखार से 
बच निकल जा प्यारे 
दो धारी तलवार से 

"जय कुमार "



Friday, 4 February 2022

मां की नजर

किसी को मैं आवारा सा दिखता था 
किसी  को मैं बेगारा  सा दिखता था
जब भी  मेरी  मां की नजरों ने देखा
मां को आंखों का तारा सा दिखता था 

"जय कुमार "

मजदूर की रोटी

मेहनत का बस इक मर्ज होता है
मजदूर की रोटी पर कर्ज होता है

"जय कुमार "