दिल के बदले में दर्दे दिल मिलते हैं
गुलाब के बागों में शूल पलते हैं
नजरों से मयकशी करने वाले
परवाने ताउम्र आग से जलते हैं
"जय कुमार "
Monday, 11 June 2018
जिंदगी के गम भुलाने चला फिर
यादों को जाम पिलाने चला फिर
खुद से मिला नहीं इक जमाने से
खुदको खुद से मिलाने चला फिर
"जय कुमार "
Sunday, 10 June 2018
झूठ को चिल्लाने दो ईमान अभी बाँकी है ।
सच्चाई कहने को जुबान अभी बाँकी है ।
कातिल हौंसले पस्त नहीं होंगे हमारे ,
खून से सने जिस्म में जान अभी बाँकी है ।।
"जय कुमार"
Friday, 8 June 2018
बियाबानो से जब गुजरता हूँ
पहले से ज्यादा संँवरता हूँ
ताल्लुक है संघर्ष की आग से
दिनो दिन, मैं और निखरता हूँ
"जय कुमार "09/06/18
Wednesday, 6 June 2018
हम मंदिर मस्जिद में बैठे रहे
किसान जब सड़कों पर लेटे रहे
मरे वो जालिम की गोलियों सें
धरती माता के जो बेटे रहे