Friday, 20 November 2015

ऊँचाई न

ऊँचाई न रही ,,,,,,उड़ानों में
जज्बा न दिखता जवानो में

भविष्य गुम रहा वीरानों में

" जय कुमार "२०/११/१५

बस्ती में

बस्ती में,,देखा दीवानो को
करीब से जाना वीरानो को

"जय कुमार"२०/११/१५

सख्त हालात

सख्त हालात में भी, रस्म ए मुहब्बत निभाता रहा 
रेगिस्तान की धरती पर वफ़ा के फूल खिलाता रहा 
सांसे उखड़ी थी ,,,,,अँधेरी रात में , आँधी शबाब पर
शीत लहर का कहर मैं आश का दीपक जलाता रहा

"जय कुमार "२०/११/१५

Wednesday, 18 November 2015

कलम उठती

कलम उठती नहीं सच लिखने के लिए
तैयार सब खड़े क्यों,,,,,बिकने के लिए

मुफलिसी के मर्ज,,,,,,सजते झोपडी में
अमीरों की रोटियाँ,,,,,,,सिकने के लिए

मुहब्बत की बात,,,,,रात के आगोश में
उजालों में छोड़ा,,,,,,,,बिलखने के लिए

वागवान की  हकीकत क्या,,,बयाँ करूँ
फूलों को खिलाया,,,,,,मसलने के लिए

दिल चुरा कर ले गये वो,,,,,इक पल में
चोर तो आते ही,,,,,,,,,,,,लूटने के लिए

अरमान दिल के दिल में ही जिये रोज
छोड़ जाते हमदम,,,,सिसकने के लिए

जय वादों के टूटने से,,,,,,,,,,मत टूटना
वादे तो होते बस,,,,,,,,,,,,टूटने के लिए

"जय कुमार "१८/११/१५


वफादारी गर

हर ख़ुशी गम में यारी जिंदगी बन जाती है
वफादारी गर हो दोस्ती बंदगी बन जाती है

"जय कुमार "

Monday, 16 November 2015

कुछ मुहीम

कुछ मुहीम छेड़ते है ,,,,,,,जमाने के अंत की
इंसान को समझे नहीं,,,,,बात करते पंथ की
इंसानियत के गीत हो , बैर के न हो निसान
आज फिर जरुरत है , साबरमति के संत की

"जय कुमार " १७/११/१५




झूठ सच

झूठ सच होने ,,,पर अड़ा है
करेला चन्दन पर,,, चढ़ा है

सत्य देखने की क्षमता नहीं  
झूठ का जाल लगता बड़ा है

सत्य सिमट रहा है कोने में
असत्य पैर पसार के खड़ा है

गोडसे के भक्त,,,, बढ़ते रहे
राजघाट अब,,,,सूना पड़ा है

"जय कुमार "





Saturday, 14 November 2015

बंदगी कहते

कैंसी ये बंदगी दरिंदगी में 
इबादत ये कैंसी गंदगी में 
जन्नत तो धरती पे होगी 
सुकूं गर दोगे जिन्दगी में

" जय कुमार "

Monday, 9 November 2015

दीपक जला

दीपक जला आऊँ ,, किसी कुटिया में
ख़ुशी जल भर आऊँ किसी लुटिया में
दीपावली के इस ,,,, पावन प्रकाश में
लक्ष्मी को देंखूं अपनी बहु बिटिया में

"जय कुमार "९/११/१५

रोज रोज

रोज रोज का पंगा हो
भाई भाई का दंगा हो
परिवार जो लड़ते रहें
 राजनेतों का धंधा हो 

"जय कुमार "९/११/१५

शांति का

शांति का आलाप कर
शुध्दता की जाप कर
संत आज बनने लगे
खतरे को,,, माप कर

"जय कुमार "९/११/१५

क्यों चल

क्यों चल रहे हो अकड़कर
कैंसे रहोगे,,,,,,, झगड़कर
सदियों से साथ,,, रहे हम
इक दूजे,,, हाथ पकड़कर

" जय कुमार "९/११/१५





आफत से

आफत से कहदो जरा दूर रहना ,
हर हाल में जीने की कसम खाई है।
भले ही गर्दिश में रहे हो सितारे ,
जिन्दगी की हर रस्म निभाई है।
डरा न पायी कभी भी मुफलिसी
तम में दीपक से लड़ने का दम कंहा 
मुसीबत में ताकत दुगनी होती ,
हमने तो सीरत ही ऐंसी पाई है।

" जय कुमार "

Sunday, 8 November 2015

हौंसलो

हौंसलो की कहानी लिखता हूँ
जिंदगी की रवानी लिखता हूँ
दिल में पुष्पों सी कोमलता
फौलाद की जवानी लिखता हूँ

" जय कुमार "८/१०/१५

Saturday, 7 November 2015

इस दौर

इस दौर में जरा दूरी बनाकर रख ,
करीबी लोग ही गिराया करते है
तपाक से गले मत लग जाना यार 
हाथ मिलाकर गिरेवान पकड़ते है

Friday, 6 November 2015

टुकड़ो पर

टुकड़ो पर जीने से मर जाना अच्छा है
जिल्लत के महलों से घर जाना अच्छा है
जीना मौत से बत्तर मत बनाना यारों
मरने से पहले कुछ कर जाना अच्छा है

"जय कुमार "६/१०/१५

दरद अब

दरद अब  गीत गाने लगे 
जख्म भी मुस्कराने लगे
काल के खेल में फंसकर
प्रीत के साथी...जाने लगे

"जय कुमार "