Sunday, 29 May 2016

" whatsapp की बात"

आज मैं इस ग्रुप के सभी सदस्यों से कुछ कहना चाहता हूं !
Whatsapp की बात,,, मेरे व्यक्तिगत मत के अनुसार
Whatsapp पर केवल ज्ञानी महाज्ञानी ज्ञानी अनुभवी सभी प्रकार के ज्ञानियों का समागम होता है !
सब एक से बढ़कर एक पोस्ट भेजना चाहते हैं
अलग अलग स्वाभाव के अनुसार महानुभाव ज्ञानवर्धक धार्मिक नीति अनीति प्रेम हास्य व्यंग कविताएं आदि पोस्ट करते है
जो बहुत रोचक होती है जिनपर वाह वाही भी खूब मिलती है !

मुझे लगता है ज्यातर कॉपी पेस्ट ही करते है अब आप सब कहेगे
WhatsApp तो बना ही इसलिए है,,,,,,हाँ जी कॉपी पेस्ट करें ,,, इसमें कोई परेशानी नही !

लेकिन अगर आप सब कुछ अपनी मौलिक सोच को पोस्ट करेंगे ,,, भले ही ज्यादा रोचक न हो ,, लेकिन मौलिक सोच तो मौलिक होती,,, जिससे सृजनात्मक का विकास होगा ,,,,मुझे बहुत खुशी होगी ,,,,

आपके विचारों का सादर स्वागत

आपका मित्र
"जय कुमार"

Saturday, 21 May 2016

कहानी


आज कल से ज्यादा , बिकते चले गये !
बर्बादी की कहानी ,,, लिखते चले गये !!

"जय कुमार"२१/०५/१६

Thursday, 19 May 2016

गिरफ्त ख्यालों को करले ऐसा प्यार मत करना ।
जज्वात न समझे तेरे उससे इजहार मत करना ।
हिज्र की आग देकर जो ,,, रहता रकीब के साथ ,
उस बेमुरब्बत यार का ,,,,,,,, इंतजार मत करना ।

"जय कुमार"

कलम उठती नहीं सच लिखने के लिए !
तैयार सब खड़े  है ,,,,,,,,,बिकने के लिए !!

मुफलिसी के मर्ज ,,,,,,,,सजते झोपडी में ,
अमीरों की रोटियाँ,,,,सिकने के लिए !

मुहब्बत की बात,,,,रात के आगोश में ,
उजालों में छोड़ा ,,,,,,,,,बिलखने के लिए !

वागवां की  हकीकत कैंसे ,,,,,बयाँ करूँ ,
फूलों को खिलाया,,,,मसलने के लिए !

दिल चुरा कर ले गये वो,,,,इक पल में ,
इश्क होता ही है,,,,,,,,लुटने के लिए !

वादों के टूटने से,,,,,,,मत टूटना जय ,
वादे तो होते है,,,,,,,,, टूटने के लिए !

"जय कुमार "१८/११/१५ 

Wednesday, 18 May 2016

जब तक जीवन ज्योति तन में
तेरा चेहरा मेरे ,,,,,,,,,,,,,,, मन में
आजा कसम रस्म ,,,,,तोडकर
मिल गीत गायेगें ,,,,,मधुवन में

कब तक खुद से ,,,,, दूर रहेगा
रीति रिवाजों कि ,बलि चड़ेगा
साथ बनायेगे,,,,,,,,,,, नये रास्ते
सुकूं पल ढ़ूढेगे,,,,,,,,,, जीवन में

"जय कुमार"

Tuesday, 17 May 2016

मन की सुंदरता कौन देखता

Friday, 13 May 2016

हालातों को

हालातों को अपने ,,,,,,,,,,,,बदलते रहें
मुश्किलों से हमेशा ,,,,,,,निकलते रहें
मंजिल मिलेगी इक दिन यकीन रख
धीरे धीरे ही सही ,,,,,,,,,,,,,,,चलते रहें

"जय कुमार"१४/०५/१६

मुश्किलों में

मुश्किलों में राह ,,,,बता गया कोई
अपनापन फिरसे ,जता गया कोई

मुस्कुराकर ऐसे मिला फिर मुझसे
गहरे जख्मों को ,,,,,छुपा गया कोई

होंठ सिले रहे ,,गुमसुम खड़ा रहा
अंदर से मुझको ,,हिला गया कोई

"जय कुमार"१४/०५/१६


तब तक ,,काया
जब तक ,,माया
जल कर जीवन
रब तक ,,,लाया

मत कर , छीना
चल कर , पीना
जग में ,,,जीवन
हट कर , जीना

मोती ,,,बन कर
ज्योती बन कर
भूख ,,,,,,,मिटाये
रोटी ,,,,बन कर

रोका ,,,मत कर
टोका ,,मत कर
मोती ,,,,,,मन के
खोटा, मत कर

"जय कुमार"१४/०५/१६