महातीर्थ पर संकट है
सर्वोच्च तीर्थ पर संकट है
तानाशाही नहीं सहेगें
यह आस्तित्व पर संकट है
कण कण जिसका पावन है
तीर्थंकरों का जो दामन है
दूषित उस धरती को जो करे
वही शत्रू वही हमारा रावन है
सब मिल विरोध जतायेंगे
कुम्भकर्णो को भी जगायेंगे
शिखर के सम्मान की खातिर
हर वाधा से लड़ जायेंगे
सोते समाज, जगना होगा
एक सूत्र में बँधना होगा
दिल्ली बहरी है हमें पता है
कानों में ढोल बजना होगा
अहिंसा का पाठ पढ़ा है
सात्विकता से मन भरा है
हम भी है छत्रियों वंशज
गवाही में इतिहास खड़ा है
"जय कुमार"