जब जाम थे पास , पीने नहीं दिया मुझे ।
जिन्दगी थी मुझमें , जीने नहीं दिया मुझे ।।
करते रहे एकतरफा , भरोसा हम भी नादान
टूटने पर मुझको तूने , रोने नहीं दिया मुझे ।
किसकी गफलत थी वो , किसका था गुनाह
आज तक अंधेरों में , जानने नहीँ दिया मुझे ।
आँखे खुली हुई मेरी , बस तेरे ही खातिर
तेरी चाह ने अब तक , मरने नहीं दिया मुझे ।
जनाजा बनाया गया हूँ , दफनाने की खातिर
इस जमाने ने चैन से , सोने नहीं दिया मुझे ।
रुह यहीँ घूम रही , दीवानी बन चारो ओर
तेरी चाहत ने रब से , मिलने नहीँ दिया मुझे ।
"जय कुमार" ०८ /०२ /२०१४
जिन्दगी थी मुझमें , जीने नहीं दिया मुझे ।।
करते रहे एकतरफा , भरोसा हम भी नादान
टूटने पर मुझको तूने , रोने नहीं दिया मुझे ।
किसकी गफलत थी वो , किसका था गुनाह
आज तक अंधेरों में , जानने नहीँ दिया मुझे ।
आँखे खुली हुई मेरी , बस तेरे ही खातिर
तेरी चाह ने अब तक , मरने नहीं दिया मुझे ।
जनाजा बनाया गया हूँ , दफनाने की खातिर
इस जमाने ने चैन से , सोने नहीं दिया मुझे ।
रुह यहीँ घूम रही , दीवानी बन चारो ओर
तेरी चाहत ने रब से , मिलने नहीँ दिया मुझे ।
"जय कुमार" ०८ /०२ /२०१४