Tuesday, 31 October 2017

तेरी  हर   राह  में   तुझको  सराहा   जाये |
मेरी  हर  चाह  मे  तुझको   बिठाया  जाये ||

जवान महफिलें फिरसे  खुरापात कर गयी |
दिल ने कहा यादों को फिरसे सजाया जाये ||

दिल मशरूफ मुहब्बत की गलियों में ऐसा |
मुरझाये  जख्मों  को   हरा   कराया   जाये ||

सांझ  चिड़कर आज हिसाब मांगती मुझसे |
सुबह दोपहर क्या किया आज बताया जाये ||

खुशियों  के  बीजो ने  दर्द  के  पौधे उगाये |
मत हो  उदास  हयात  को समझाया जाये ||

नफरतो की आग मे झुलझ गया मेरा शहर |
चौराहों   पर   गीता    कुरान  सुनाया  जाये ||

"जय कुमार"

Wednesday, 11 October 2017

आदिकाल  के अंत से , आया भक्तिकाल !
भक्ति भाव जो ना रखे , हो जाये  बेहाल !!
भक्ति करके जो चला , होता  माला  माल !
जिनके शब्द विरोध में , हो जाता कंगाल !!
"जय कुमार "

Saturday, 7 October 2017

उम्र भर जो कमाया लुटा सा रहा 
भरोसा कल हमारा पिटा सा रहा
चलते रहे खारों कि परवाह न थी
मंजिल का रस्ता तो हटा सा रहा 

जय कुमार

Tuesday, 3 October 2017

मेरे  दिल  से  निकल  गया कोई
अपना बनाकर बदल गया कोई
जिसे  चाहता रहा मैं  शिद्दत  से
उस  भरोसे  को  छल गया कोई

"जय कुमार "

Sunday, 24 September 2017

मुझे  तेरी मुहब्बत का  इशारा  ही काफी  था
तिनके  का डूबते  को  सहारा  ही  काफी था
भले ही वेहयाई  में  होंठ सिल लिये  थे तुमने
एक दिल की नजरों का नजारा ही काफी था

"जय कुमार "23/05/18

Wednesday, 20 September 2017

मुस्कुराती  वस्तियों  में  बबाल   होते  रहे
वक्त   के   साथ   इंसां  कंगाल  होते  रहे

झूठ को मिली शोहरत गुमनाम हुआ सच
ईमान  कि  चौखट  पर  सवाल  होते  रहे

समुंदर  की  खामोशी दिखी न किसी को
दरिया  पर  उफान  के  कमाल  होते रहे

मुहब्बत  के  अहसास  दबे  रहे  दिलों में
वासनाओं   के   रोज   दलाल   होते   रहे

टूटी  न  आशा   आसमान   के   तारो  से
करीबियों  से  जज्वात  हलाल  होते   रहे

गुजारी जवानी  जय  शान शौकत  में तूने
बिगडे  हिसाब  पर अब  मलाल  होते रहे

"जय कुमार "२०/०९/१७

Wednesday, 13 September 2017

जमे हिम के हिमालय को,  पिगलना भी आता है
जाम  ए  गम  पीकर  के,  संभलना  भी  आता  है
कायर  मत  समझ लेना , मेरी  इस खामोसी को
नम्र होकर  झुके सिर को, अकड़ना  भी आता है

"जय कुमार "

Monday, 28 August 2017

कौन कहता  वक्त हर  जख्म  भर देता
मेरे   दिल  के  जख्म   हरे  के  हरे  रहे

सूख  जाता  होगा समुंदर  तेज धूप में
मेरी आंखों  में  अश्क  भरे  के भरे रहे

कागज और  स्याही धमाल  करते रहे
धरातल  पर सारे  वादे धरे के धरे रहे

जिंदा  करते  रहे  वादे   ख्वाहिशों  को
वफाओं   के  आलम   मरे  के  मरे  रहे

अमन  चैन  की  बातें बज्म में  बैठकर
घर  के  अंदर  मासूम  डरे  के  डरे रहे

"जय कुमार "

खुशी इक से नहीं मिली , गम हजारों का झेला है
साथ  देता रहा सबका , सफर मेरा ही अकेला है
टूटे वादों  कि कहानी , कही न जाती अब मुझसे
मुहब्बत रोज  रोती है  ,  जज्वातों  का  झमेला है

सूख जाते है आंसू भी, तपन जब प्यार की तपती
याद उसकी सताती है , धूप  चांदनी  सी  लगती
मीठी आवाजे अब भी , हवा  कानों  तक लाती है
हाथ  मिलकर   चले गये , वक्त  ने  खेल  खेला है

लहरों की इक ख्वाहिश, बस साहिल से मिलना है
कलियों की इक ख्वाहिश , फूलों   सा   खिलना है
लहरे  दम  तोड   देती , फूल  खिलकर   टूटते  है
तमाशा  रोज  होता  है , यह  जमाने  का  मेला  है

"जय कुमार "

Sunday, 27 August 2017

राम रहीमा  कर  रहे , काले   कूले  काम
रावण जलते ही कहे , मैं ही इक बदनाम

जय कुमार

Saturday, 26 August 2017

एक प्रयास _/\_  . .

गीत  गजलों  की  भाषा हूँ ।
दर्द  मजलूम  का  गाता  हूँ ।

आँसू सूख गये  आंखों  से ,
उनका मैं  मर्ज  सुनाता  हूँ ।

बिछोना  है धरती जिनकी ,
उनके  मैं    बीच   पाता  हूँ ।

गीत  शहनाई  के न  आते ,
मजबूरी मन की सुनाता हूँ ।

घोर निराशा  के  अंधेरों में ,
एक आशा दीप जलाता हूँ ।

जिन्हे  जमाने ने धुतकारा ,
मैं  उनको  गले  लगाता हूँ ।

वतन पर जो  जान  लुटायें ,
मैं उनको शीश झुकाता हूँ ।

कदम मिलाकर ही चलने में ,
मैं  जय  विश्वास  जताता हूँ।

"जय कुमार"

Tuesday, 22 August 2017

कब तक यूं अब रोना होगा
होने   दो  जो   होना    होगा
चोखे   बीज  हमारे  हैं  जब
फल भी चोखा  सोना  होगा

"जय कुमार "




Friday, 18 August 2017

रिश्तों की डोर  कच्ची  हो चली है !
घर  की  दीवार पक्की  हो चली है !
गांव  के  स्वर्ग  को  छोड़कर  भागे ,
शहर की दुनिया सच्ची हो चली है !!

"जय कुमार"

घरों की दीवार  पक्की हो  गई है ।
शहर की दुनिया सच्ची हो गई है ।
चकाचौंदी दुनिया स्वार्थ  से भरी ,
रिश्तों की डोर  कच्ची हो  गई है । ।

"जय कुमार"

बात    बनाकर  ।
चाल   चलाकर ।
चले  गये    तुम ,
नजर   चुराकर ।।

ख्वाव दिखाकर ।
राज     बताकर ।
भुला  गये   सब ?
हौँठ   सिलाकर ।।

साथ मिलाकर ।
खुशी सजाकर ।
लूट लिया क्यों ?
प्यार  दिखाकर ।।

नीर    बहाकर ।
बीज   उगाकर । 
काट दिया क्यों ?
फूल  खिलाकर ।।

"जय कुमार"

Tuesday, 15 August 2017

जाति  धर्म  की  बाते   करके
विचारों  को  कैद  कर  लिया
कभी दरिया  को  देखा  नहीं
बस कुंआ से पानी भर लिया

"जय कुमार "

Sunday, 13 August 2017

मौत

मौत तू   इतनी   मगरूर  मत  हो
जिंदगी जिया मैं जिंदगी की तरह

"जय कुमार "

कदम    पीछे   हटाना  अब   नहीं
चल  चुका  हूं  बहाना  अब   नहीं

मंजिल   इंतजार  करती  हो  जब
दूरी   से     घबराना    अब    नहीं

नर्म  राह  कि  चाहत  से   निकल
आलस्य  को  बुलाना  अब   नहीं

सपने   नहीं   हकीकत   है    यही
काम  से  दिल  चुराना  अब  नहीं

कल क्या  हुआ  कल  क्या  होगा
इस आज  को भुलाना  अब  नहीं

वक्त ने  खेल   खेला  रुलाने   का
किसी और  को रुलाना अब नहीं

हाथ  नहीं  जब  दिल  मिलते   थे
वह   गुजरा   जमाना   अब   नहीं

जिस्म  कि  चाहत रही प्रेम  कहां
इनसे   दिल   लगाना  अब   नहीं

गुजरा  जय  आग  के  दरिया   से
मुहब्बत  का  फंसाना   अब  नहीं

"जय कुमार "२१/०९/१७

मंदिर मस्जिद में बहुत बैठा लिया
कभी  दिल  में   बैठाकर तो  देखो
सारी   रंजिशे  भूल   जाओगे तुम
आंखों  से  पर्दा  हटाकर  तो देखो

"जय कुमार "

Saturday, 12 August 2017

पीड़ा

हमारे क्रांतिकारी, हमारे नये भारत के जनक, हमारी धरोहर , विश्व के गौरव, जिनकी आत्म शक्ति का लोहा दुनिया ने माना व अनुशरण किया, जिनने अपना जीवन देशवासियों के भविष्य के लिए खपा दिया, उनके अनगिनत नाम है मुख्य नाम मंगल पांडे , झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, राष्ट पिता महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल, लाला लजपत राय, लोकमान्य तिलक , चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, बी आर अंबेडकर, लाल बहादुर शास्त्री, जवाहर लाल नेहरू इत्यादि !!

हमारे देश को एक नई दशा व दिशा देने में इन व इन जैसे हजारों महापुरूषों ने अपना योगदान दिया हम इनके योगदान की बदौलत हम आज नई पहचान बनाने में कामयाब रहे है !!

हमारी आजादी के ७० साल हो चले है शुरूवात से हमने अपने महापुरूषों के योगदान को समझा सम्मान दिया !

लेकिन समय के साथ धीरे धीरे महापुरूषों को बांटने का काम होता रहा हमने अपने अपने आदर्श पुरूष बना लिए बांट लिए, यहां तक भी कोई बात नहीं, बंटे हुए इन लोंगो ने महापुरूषों की निंदा शुरू कर दी, कोई किसी को श्रेष्ठ मानने लगा, कोई किसी को, आम लोगो के बीच बदनाम किया गया,  राजनैतिक पायदे के लिए यह सब चलता रहा ! कुछ महापुरूषों के निर्णयों पर आये दिन सवाल किये जाते रहे है , आज खुले आम सोशल मीडिया पर हमारे नायको को बिना तथ्य के बदनाम किया जाता है  हर दिन आपको जहर उगलने बाली बाते मिलेगी !!खुलेआम अपशब्दों का प्रयोग किया जाता है जो पीड़ादायक है !!!!

इन नायको के रास्ते अलग रहे होगे, लेकिन नियत सबकी एक ही थी मंजिल सबकी एक ही थी , उस वक्त के हालातों के अनुसार उन्होंन उचित निर्णय लिए हमें यह समझना होगा !!

हमारे ही महापुरूषों का हम ही अपमान करें जिन्हे संसार प्रेरणा का स्त्रोत मानता है यह कहां तक उचित है ??

"जय कुमार"

Friday, 11 August 2017

मचलने के बहाने ढूढते हो

बहारों   के   दीवाने    ढूंढते   हो
बहकते अब  परवाने  ढूंढते   हो
मुहब्बत तो खूब करते हो हमसे
मचलने   के   बहाने   ढूंढते   हो

"जय कुमार "

ख्वाहिश दवा मांगती रही
बदलती हवा  मांगती रही
जिंदगी   एक  न   हो  पाई
मोहलते सवा मांगती रही

"जय कुमार "११/०८/१७

दिल्ली के दरबारों  का सच क्यों कोई  लिखता  नहीं
सत्तर  बर्ष   के  बूढे   सपने  सत्य  तुमे  दिखता  नहीं 
वादे  और   इरादे  इनके  लगते  नदी  के  दो साहिल
पैकिंग  चाहे सुंदर  करलो  सदियों  झूठ छिपता नहीं

"जय कुमार "

Thursday, 10 August 2017

बीच  राह  पर  दंगल   होते
लोग शहर  के  आपा  खोते

कोई  लुटता  कोई   पिटता 
कानूनी      रखवाले    सोते

झुलझ गया दामन फूलों से 
अंगारों   की   फसलें   बोते 

शहर  जल जायेगा जालिम
मासूम  लोग आँख  भिगोते

मंजर  मौत  के  मन में  बैठे
अमन  चैन   कोने   में  रोते

मुफलिसी  में   लुटा  घरौंदा
जय बिखरे फूलों को पिरोते 

"जय कुमार"9/08/15

Sunday, 6 August 2017

असली   सूरत  छुपाते  रहे ।
बनावटी रुप    दिखाते  रहे ।

घर  रोशन  करने  के   लिए ,
सबके  घौंसले  जलाते  रहे ।

किसी  को  देखा  उजाले में ,
जले  दीप  क्यों  बुझाते रहे ।

खिलखिलाते   पंछियों   को ,
रंज  व  गम से  मिलाते  रहे ।

गहरी नींद सो  गया  कल मैं ,
सफर  के साथी  बुलाते रहे ।

जय  बैचेनी  में   मिला  क्या ,
रोज  ही  अश्क  बहाते  रहे ।

"जय कुमार"

Friday, 4 August 2017

वासना  इंसान  को  हैवान  बना  देती है
साधना जीवन को  वरदान  बना देती है
किसी ने न देखा अपनी आँखो से ईश्वर
भावना  पाषाण को भगवान बना देती है

"जय कुमार"

Tuesday, 1 August 2017

एक प्रयास _/\_ . . . . .

यह  तेरा  आसियाना   है  जो
फूलों से घिरा ठिकाना  है  जो
खूबसूरत   जमाने   के  सपने
फँसा   इसमें   दीवाना  है  जो

मिलकियत  तेरी बस पानी है
एक दिन  तो इसे बह जानी है
शोहरत  में  डूबा है  तू  इतना
यह पल दो पल की कहानी है

जाति  धर्म  के  फंदो  में  फँसा
रंग  रुप के  इन कुंदो में फँसा
इस  तन  की  विसात क्या  है
चार  दिन  के चिन्हो  में  फँसा

रजनी  भोर   की   निशानी  है
भोर   रजनी  की    कहानी  है
दोपहर  के   सूर्य  की  रोशनी
साँझ    आने   पर    पुरानी  है

"जय कुमार"01-08-14

Thursday, 27 July 2017

ठोकर  खाकर  भी  संभल  जाते  है
अंधेरी  राहों   से   निकल   जाते  है
उनका वक्त भी कुछ नहीं बिगाडता
जो वक्त  के  साथ   संभल  जाते  है

"जय कुमार "


Saturday, 22 July 2017

सावन के बादल फिर  गरज गये
नैना  सूरत   को  तेरी  तरस गये
बन विरह की पीडा मन छाये मेरे
काले बादल आंखों  से बरस गये

जय कुमार २२/०७/१७

चल निकल भी जा मानव अँधेरों से ,
उजाले   को   तेरा    ही   इंतजार  है |
नाकामी  की जंजीरों  को  तोड़ अब ,
कामयाबी  को  तुझसे   ही  प्यार  है |
अपने   बनाए   जाल  में  फँसा   रहा ,
दुनिया  के  छोर  दूर  तलक  फैले हैं ,
नाव  को   मोड़  धारा   के   विपरीत ,
तेरी   मंजिल   सितारों   के   पार है |

निगाहों के धोखे से निकल के अब ,
अपने  आप की भी आवाज सुन ले |
जमाने को  जो  कहना  है  कहने दे ,
अपने आपके  एहसासों को चुन ले |
कथनी  करनी  एक नहीं  होती हो ,
कुछ पहचानने की जरूरत लगती ,
तेरे  अंदर  शक्ति   का   समुंदर  है ,
अपनी भूली क्षमताओं को  गुन ले |

भ्रम  कोई  न पाल  अपने  जहन मैं ,
मानव हो तुमे  अमर  पद  पाना  है |
साँसे चलती ये तन  जीवित रहता ,
तब तलक  यही  तेरा  ठिकाना  है |
किसी मकसद से यहाँ आया  है तू ,
उसको  ही  दिलेरी से  निभा  लेना ,
मिला जो  एक  सफर   पूरा  करके ,
फिर  एक  नये  सफर पर  जाना है ||

"जय कुमार"

Monday, 17 July 2017

चल चला चल चाल बदल ले
उठ जाग अब हाल  बदल ले
मंजिल  तेरी  रास्ता  है   तेरा
चल पंक्षी अब डाल बदल ले

कल की कल पर  रहने भी दे
दुनिया  को कुछ कहने  भी दे
इस  पल  की  खुशी  में जीले
बंदे   अपना  आज  बदल  ले

जीवन   जीना  सीख  न  पाये
हरदम खुशियां भीख में  पाये
विन  स्वर  बाजे  खूब  बजाये
चल  प्यारे अब ताल बदल ले

मेरा     तेरा     करते     करते
बडी   तिजोरी    भरते   भरते
कब  काल  के   मुंह  में  पुँहचे
अब  तू अपना काल बदल ले

बैठ  नाव  मैं   छेद  किये  क्यों
ऊँच नीच  के  भेद किये  क्यों
खुद  फंसने को  बुनते रहे जो
वह अपना अब जाल बदल ले

"जय कुमार"१७/०७/१७







Sunday, 9 July 2017

नजरिया जिनका जैसा है , उनको वैसा ही दिखता है
दिल और दिमाग जो कहता , गीत वैसे ही लिखता है
यूं   तो   हजारों  मिलेंगे  हमको   कलम  के   जादूगर
कबीरा एक नहीं दिखता , जो   फकीरी  में लिखता है

"जय कुमार "१०/०७/१७


आज खिले है कल  मुरझाये  हम  मौसम के फूल नहीं
दहसत का माहौल बना जो जायज और माकूल नहीं
कर्तव्यों  पर  तत्पर रहे  है  डरना  हमने  नहीं सीखा
बना गुलाम करो  तुम शोषण हमको यह  कबूल नहीं

" जय कुमार " ०९/०७/२०१७

Friday, 30 June 2017

मोबयल

काम धाम  सब  छोड़ छाड़के
मोबायल   पे   बतयाऊं  लगे
लरका    उजारे   जाऊं   लगे
............

ये खोरन  से  ओ खोरन तक
भरी  बजरिया के छोरन तक
घूमे    ठलुआ   बनके   राजा
फटफटिया  खो  घुमाऊं लगे

लरका   उजारे   जाऊं   लगे
.............

लाज शरम अब कछु ने आवे
ईलू      ईलू      खुलके   गाबें
राजश्री   के   पाऊच   दवाके
दद्दा    सें      बतयांऊ     लगे

लरका   उजारे   जाऊं   लगे
...............

काऊ  की  तो   सुनने  नइंया
कोनऊ   बात   गुनने   नइंया
कही  एक  जे   मानत  नइंया
अपनी  अपनी  चलाऊं  लगे

लरका   उजारे    जाऊं   लगे
.................

जींस  टी  सर्ट  फोग  लगाके
बूटन   पे   पालस    करबाके
सल्लु मियां की अदा दिखाके
छोरि  पे  जाल  बिछाऊं  लगे

लरका   उजारे    जाऊं   लगे
....................

काम  धाम  सब छोड छाड़के
मोबायल   पे   बतयाऊं  लगे
लरका   उजारे    जाऊं   लगे

"जय कुमार "२६/०६/१७

काम धाम  सब  छोड़ छाड़के
मोबायल   पे   बतयाऊं  लगे
लरका    उजारे   जाऊं   लगे
............

ये खोरन  से  ओ खोरन तक
भरी  बजरिया के छोरन तक
घूमे    ठलुआ   बनके   राजा
फटफटिया  खो  घुमाऊं लगे

लरका   उजारे   जाऊं   लगे
.............

लाज शरम अब कछु ने आवे
ईलू      ईलू      खुलके   गाबें
राजश्री   के   पाऊच   दवाके
दद्दा    सें      बतयांऊ     लगे

लरका   उजारे   जाऊं   लगे
...............

काऊ  की  तो   सुनने  नइंया
कोनऊ   बात   गुनने   नइंया
कही  एक  जे   मानत  नइंया
अपनी  अपनी  चलाऊं  लगे

लरका   उजारे    जाऊं   लगे
.................

जींस  टी  सर्ट  फोग  लगाके
बूटन   पे   पालस    करबाके
सल्लु मियां की अदा दिखाके
छोरि  पे  जाल  बिछाऊं  लगे

लरका   उजारे    जाऊं   लगे
....................

काम  धाम  सब छोड छाड़के
मोबायल   पे   बतयाऊं  लगे
लरका   उजारे    जाऊं   लगे

"जय कुमार "२६/०६/१७

Sunday, 25 June 2017

जिस्म

जिस्म की चाहत मुहब्बत का नाम बहुत हुआ
इबादत के घर का बेसबब बदनाम बहुत हुआ

"जय कुमार "

मुहब्बत

मुहब्बत  से  ही खुदा  ने अपना  नाम  कर रखा है
जिस्म की चाहत ने इश्क को बदनाम कर रखा है

"जय कुमार "

कोनऊ लाज शरम

कोनऊ लाज  शरम  ने  आबे
लरका  भरे  बाजार  बुलयाबे
नियम कायदा सबरे तोड़ रये
मोडिन  के संग  नैना   लडाबे

कोनऊ  लाज  शरम ने  आबे
.............

घर के  सबई  काम धाम छोड़े
बैठ  चौंतरा  पे  करत  गपोड़े
नौनी  आदत  एकई  ने  सीखे
ठलुओं  के संग चिलम दबाबे

कोनऊ  लाज  शरम ने  आबे
................

कोने चला  दव  जो मोबायल
ये रोग से गांव भर  के घायल
कानों में लगा लई  इक  डोरी
जाने  कोन   बैरी सें  बतयाबे

कोनऊ लाज शरम  ने  आबे
.................

खैतन की तो वे गैल भूल गय
गैया  बछिया वे बैल  भूल गय
जींस  लगाके जे पटपटिया पे
गांव भर कि खोरन में उबराबे

कोनऊ  लाज  शरम  ने आबे
...................

बहुअन खो जे कैंसे  सजा रय
हल्के हल्के कपड़ा जे पैरा रय
मरई   पर   जाय  ये   फैंसन पे
घरभर की जे इज्जत लुटवाबे

कोनऊ  लाज  शरम  ने  आबे
लरका  भरे   बाजार  बुलयाबे

"जय कुमार "

बेखोफ चोरों  आना  जाना  हुआ
चिराग मित्र बने अंधेरे के जबसे

"जय कुमार"

Monday, 19 June 2017

मुझे बोझ मत समझ हयात तू
मुकाम आते  ही उतर जाऊंगा

आईना  बन   रहा  हूं   सदियों
ठोकर  लगते  बिखर  जाऊंगा

जिंदगी  तेरे  साथ  चल रहा हूं
छोडेगी   तो   किधर   जाऊंगा

Saturday, 17 June 2017

में किसान का बेटा हूं
मैने अपने बापू को
खेतों से लडते देखा है

मैं किसान का बेटा हूं
मैने अपने खेतों को
फसलो से भरते देखा है

मै किसान का बेटा हूं
मैने अपने खेतो को
सोना उगलते देखा है

मै किसान का बेटा हूं
मैने अपनी बगिया को
फूलों से खिलते देखा है

मैं किसान का बेटा हूं
मैने अपने खेतों को
गिरवी रखते देखा है

मैं किसान का बेटा हूं
मैंने अपने बापू को
घुटघुट के मरते देखा है

मैं किसान का बेटा हूं
मैने अपने बापू का
सम्मान उजड़ते देखा है

मै किसान का बेटा हूं
मैने अपनी फसलो को
मिट्टी में मिलते देखा है

मै किसान का बेटा हूं
मैने अपने परिवार को
भूखे बिलखते देखा है

मै किसान का बेटा हूं
मैने अपनी बहनों को
आग में जलते देखा है

मै किसान का बेटा हूं
मैने  अपने  भाईयों को
दर्द  निगलते  देखा है

में किसान का बेटा हूं
मैने अपनी फसलों को
सूत मै बिकते देखा है

मैं किसान का बेटा हूं
मैने  अपने  खेतों  मैं
जीवन जलते देखा है

मैं किसान का बेटा हूं
मैने अपनी महतारी का
सिंदूर मिटते देखा है

मै किसान का बेटा हूं
मैने अपने बापू को
पेड़ से लटके देखा है

मै किसान का बेटा हूं
मैने अपने  बापू  को
रस्सी से लटके देखा है

"जय कुमार " १७/०६/१७



मै किसान का बेटा हूं






Sunday, 11 June 2017

दिन व रात
संबध है घनिष्ट
बाद एक के

मिलन बाद
जुदाई का मौसम
रीत पुरानी

तम घनेरा
उजाले का सूचक
डरना कैंसा

प्रकाश मिला
अपने ही आपसे
तम को जीत

"जय कुमार"

Friday, 9 June 2017

तपता जून
बारिष की फुहार
मगन मन

जीवन ग्रीष्म
सावन की दस्तक
शरद सम

"जय कुमार"

Sunday, 21 May 2017

आईने   सारे   तुड़वा  रहे   है   वो
सच बताने वाला अब कोई न रहे

जय कुमार

Saturday, 20 May 2017

किसी  राह में  मेरा भी  इक  घर  हो !
साथ  हो  तेरा  खूबसूरत  सफर  हो !!

मुकम्मल  हो   कैंसे   दुनिया  हमारी ,
परिन्द्रो को जब  सैय्याद का  डर हो !

जालिमों ने  लूटा  हो  दाना  पेट  का ,
सिर पर हो  आसमां कैंसे  बसर  हो !

जर्रे जर्रे  में  रब  का  नूर  दिखता  है ,
इंसां   गर   तेरी    पाक    नजर   हो !

खुदगर्जी की आग में  झुलझता रहा ,
इस जहां में  भी  इक  प्रेम  नगर  हो !

भरोसा किस  पे  करें  खुदगर्ज  जहां ,
राज  छुपाये  रखो राजदाँ  अगर  हो !

चल सके सुकूं से ईमान कि राह जय ,
जमाने  में  बता  गर  कोई  डगर  हो !!

"जय कुमार"

Thursday, 18 May 2017

आ 
बडा
कदम
राह पर
चले फलक
उस पार हम

ना
रहे
उदास
अब कोई
मानस मन
नव प्रभात हो

Wednesday, 17 May 2017

सफर चला
मीठे खट्टे कल से
हयात तेरा

सूखा भी जल
मृग सम तृष्णा से
जला जीवन

काल की डाल
कट रही धीरे से
आशा समाप्त

आसमान को
धरा से मिलाना था
स्वप्न अधूरा

अर्थ अनर्थ
अंतर नहीं रहा
परम शांति

"जय कुमार"

Monday, 15 May 2017

हालातों   को   अपने    बदलते   रहिये
मुश्किलों   से  हमेशा  निकलते  रहिये
मंजिल मिलेगी इक दिन यकीन रखना
धीरे   धीरे   ही   सही    चलते    रहिये

"जय कुमार"

पूरी  होती हमारी हर मन्नत है
हमारे साथ रहती मां जन्नत है

जय कुमार

Thursday, 4 May 2017

किसी  ने वेगारा  कहा |
किसी ने आवारा कहा |
मां कि  नजरों ने  देखा ,
आंखों  का  तारा कहा ||

"जय कुमार "

Wednesday, 3 May 2017

जख्म   सी  लेना |
जहर   पी   लेना |
कायरता     नहीं ?
घुटघुट जी लेना ||

"जय कुमार "

Tuesday, 2 May 2017

कांच जब जब पत्थर से मुहब्बत करता है
अफसानों  के  नये आयाम  लिखे  जाते  है

"जय कुमार "

कांच जब जब पत्थर से मुहब्बत करता है
अफसानों  के  नये आयाम  लिखे  जाते  है

"जय कुमार "

Monday, 1 May 2017

कोई तो  मुहब्बत  का सिला दीजिए
उस आग के दरिया से मिला दीजिए

तुमे अंधेरे में रहने की  आदत  नहीं
आसियाना  मेरा  ही  जला   दीजिए

"जय कुमार "





Saturday, 29 April 2017

रोज  नये  नये  सवाल  होते  रहे |
यूँ ही हर दिन  बवाल  होते   रहे ||

दौलत के अमीर  शहरों  के इंसां ,
जज्वात ए दिल कंगाल  होते रहे |

करते  रहे दुआ हम  खैरियत कि ,
हमारे  जज्वात  हलाल  होते रहे |

दुश्मन  तो  तरस खा छोड़ते गये ,
अपने बन दोस्त दलाल होत रहे |

नेक प्रयास करते थे सुलझने का ,
शक  के अजीब जंजाल होते रहे |

"जय कुमार"

Thursday, 27 April 2017

भीष्म   लेटे  हुए  मजबूरी  की  शय्या है
अर्जुन को राह  दिखाता इक  कन्हैया है
राष्ट धर्म कर्म पथ पर चलते रहे उनके
रिस्ते  नातों  संबंधो की  डूबती  नैया है

"जय कुमार "

चिंगारियों ने शोर बहुत मचाया कल
इक  आफताब  के डूब  जाने के बाद

"जय कुमार "

मुसीबत  सामने  होती  मैं  मुस्कुरा  देता  हूं
हथियार के बिना ही दुश्मन को हरा देता हूं

"जय कुमार "

आज मुसीबत भी सर्मिंदा  हो गई
मुझे हर  वक्त  मुस्कुराता देखकर

जय कुमार

Tuesday, 25 April 2017

दुनिया के बाजार में कहीं गुम न हो  जाना
यहां पोशाक के साथ  कफन भी बिकते है

जय कुमार

बाजार में गये  दूल्हे  की  पोशाक  खरीदने
उसी दुकां पर हमने कफन भी बिकते देखा

"जय कुमार "

खुदा ने जब  जब अजमाया  है तुझे |
नई  मुसीबतों  से  मिलाया  है  तुझे |
पूंछा क्यो ऐसा करते  , जबाब मिला ,
मुश्किलो  से  लड़ने  बनाया  है तुझे ||

"जय कुमार "

Monday, 24 April 2017

दीवारे  बन  भी  गई   कोई   बात   नहीं
खिड़की बना रखो इक दुआ सलाम को

"जय कुमार "

अपने  वादों से  मुकरता  है कोई|
टूटे आईने सा  बिखरता है कोई |
उजाले के लिए  ही रोज  आग से ,
कहां चिरागों सा गुजरता है कोई ||

"जय कुमार"

Sunday, 23 April 2017

अन्यदाता  नंगा   होता  जिस  देश  में
कौन सुखी रह सकता उस परिवेश में

Saturday, 22 April 2017

बोझ बहुत है कागज पर उतर सकता नहीं
रन्ज  बहुत है आंखों से बिखर सकता नहीं

जय कुमार

Friday, 21 April 2017

बात छेड़कर  जात धरम की  , रोज बखेड़ा करते है
भाई  चारा  तहजीबों   की ,  जड़े   उखेड़ा   करते है
जाने वो क्या देश धरम को , पोषक है जो नफरत के
जिंदा   करके  वो   मुर्दो   को , घाव  उदेड़ा   करते है

"जय कुमार"

गांधीवादी सोच को गाली देना आम हो गया !
सूर्य बादल में छिपा चिंगारी का नाम हो गया !!

"जय कुमार "

Thursday, 20 April 2017

गांधीवादी  सोच  को ,  गाली  देना  आम !
सूरज को काला बता , चिन्गारी का नाम !!

"जय कुमार "

गांधीवादी  सोच  को ,  गाली  देना  आम !
गांधी को समझे नहीं , करते जो बदनाम !!

जय कुमार

Wednesday, 19 April 2017

मंत्रों से नींद खुले या अजान से
दोनों  ही मिलाते  है भगवान से

"जय कुमार "

Tuesday, 18 April 2017

जिंदा  गर हो  भरोशा , पराया सगा  हो  जाता है
दर्द गर हद से गुजरे , जख्मों पर दवा हो जाता है

"जय कुमार "

सपनों को  बुन लेना
अपनों को चुन लेना
जो भी मिले  राह  में
उनसे  भी गुन  लेना

"जय कुमार "

जिंदगी से कोई  , सवाल मत  करना
हुआ जो उसका , बबाल  मत करना
वक्त  के  हाथ   से  छूट   गया   हाथ
जीवन में  ऐसा ,  मलाल  मत  करना

"जय कुमार"

Sunday, 16 April 2017

जब तक  वीरों को दिल्ली की , जंजीरों ने  जकड़ा है
तब तक कुत्तों की फौजों का , झुंड सामने अकड़ा है
यह तो देश  हमारा ही है  , और  सरहदे  भी  अपनी
इन   वीरों  ने  गद्दारों के ,  घर  में   जाकर  रगड़ा   है

जय कुमार

गुलाबों की खुशबू ले  चलती है वो |
ख्वावो में रोज आकर मिलती है वो |

मुहब्बत के  कसमें  वादे  में  मुझसे ,
तुम   मेरे  मै तुम्हारी  कहती  है वो ||

जय कुमार