भारत माँ के श्री चरणो में ,
सादर शीश ,,,झुकाता हूँ !
बलिदानों की अमर कहानी ,
सबको आज,, ,सुनाता हूँ !!
झाँसी की रानी ,,,मरदानी !
तलवारो से लिखे कहानी !
महल छोड़ रण में लड़ती थी !
दुश्मन पर भारी पड़ती थी !!
प्राणो की बलि ,,,_देने वाली !
स्वराज आग जलाने वाली !!
भारत का स्वाभिमान है जो ,
रानी कि गाथा ,,,,,,गाता हूँ !!
वलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज ,,,,,__सुनाता हूँ !!
भगत सिंह से ,,,,वीर हमारे !
आजादी के थे ,,,,,,,,मतवारे !!
स्वराज्य से यारी ,,करते थे !
दिल से वतन पर ,,,मरते थे !!
चड़ फाँसी विदा हो गये वो !
अमर अमिट नाम कर गये वो !!
शहीद वीर भगत सिंह जी को ,
श्रध्दा सुमन ,,,,,,,,,चढ़ाता हूँ !!
वलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज ,,,,,,,सुनाता हूँ !!
चलि हवा जब ,,,,दुराचार की ,
अहिंसा का तब मसिहा आया !
एक देश एक आवाज बनी तब !
सत्याग्रह की बात ,,,चली जब !!
लिख गई तब एक नई कहानी !
देश ने देखी थी ,,,,तब जवानी !!
तिरंगे को सम्मान ,,,,,मिल गया ,
स्वराज की बात,,,,,, बताता हूँ ।
वलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज ,,,,,,,,,सुनाता हूँ ।
कोई उत्तर कोई दक्षिण का !
कोई पूरब कोई पश्चिम का !
कोई तमिल कोई हिंदी का !
कोई भेद ना सारे हिंद का !
सबने अपना लहु बहाया !
भुला दिया गया उनका साया !!
इतिहास भुला रहा जिनको !
मैं उनको शीश,,,, नभाता हूँ !!
वलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज ,,,,,,सुनाता हूँ !!
लाखों शहीदों कि आजादी !
सम्भाल के रख न कर बर्बादी !!
लोकतंत्र को घुन न लगा अब !
खुदगर्जी से ऊपर उठ अब !!
अपने वतन को देखो भाई !
आपस में ना करो लड़ाई !!
जो ना माने ,,,,,,हार काल से ,
उन वीरो कि गाथा गाता हूँ !!
वलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज ,,,,,,सुनाता हूँ !!
भारत माँ के श्री चरणों में ,
सादर शीश,,,,,,, झुकाता हूँ !
वलिदानो की अमर कहानी ,
तुमको आज ,,,,,,सुनाता हूँ !!
"जय कुमार"14/08/14