Wednesday, 22 July 2015

ममता भरा

ममता भरा
स्नेह नेह हो केवल
माँ का आँचल
खिलता पुष्प
महके मधुवन
माँ का आँचल

नींद सुहानी
ममता की कहानी
माँ का आँचल
खिलती धूप
पीपल की हो छैया
माँ का आँचल
शाँत हो नदी
समुंदर गहरा
माँ का आँचल
पुष्प कोमल
मनका हो पावन
माँ का आँचल
बहती नदी
बरसता बादल
माँ का आँचल
प्यार से प्यारा
निश्छल हो निर्मल
माँ का आँचल
सदाँ सुहाना
ईश्वर का दर्शन
माँ का आँचल
सुबो सुहानी
शाम की हो रंगत
माँ का आँचल
धरा से बड़ा
ब्रम्हाण्य की सीमायें
माँ का आँचल
"जय कुमार"22/7/15

"व्यापम की व्यथा"


व्यापम अब व्यापक हुआ , रहा न शिव पर नाज ।
दाग लगे वजीरों के , बन बैठे सरताज ।।
जाल बिछा अब मौत का , बचा न पाये साख ।
भरम टूटा मामा से , महल बनाकर लाख ।।
व्यापम की माया बड़ी , खोल रही अब पोल ।
खुल्ले को टटोल रही , बंद किये वो खोल ।।
बहुत समय से दबा जो , बाहर आया दोश ।
आँख खोलकर देख लो , कैँसे हो मदहोश ।।
रोज बबाल मच रहे , बाहर दिखते एक ।
कुछ के मुँह बंद किये , मरघट जाके देख ।।
"जय कुमार"21/7/15

मेरे हँसने

मेरे हँसने का सबब पूछते हो ,
क्या फिर नया रुलाने का वादा है ।
बड़े अदब से पेश आते हो दोस्त ,
क्या कोई जख्म देने का इरादा है ।।
"जय कुमार "21/07/15

गुजरे पल

गुजरे पल
वापिस नहीं आते
खुशबु बाँकी
जख्म भरते
दर्द घटता रहा
निशान बाँकी

गुजरे पल
वापिस नहीं आते
टीस रहती
खुशी व गम
साथ रहते रहे
फूल व काँटे
बदन गौर
चमकती धूप में
मुरझा गया
उम्र निकली
चमकता चेहरा
लकीरो भरा
टूटती साँस
मिट्टी का मिट्टी हुआ
प्यारा बदन
"जय कुमार"21/07/15

व्यापम व्यापम

व्यापम व्यापम हो गया , अब सारा भोपाल ।
विधान सभा चली नहीं ,,,, सारी काली दाल ।
सारी काली दाल ,,,,,,, धूम धड़ाके बिक गई ।
बिछे मौत के जाल ,,, फँसके साँस रुक गई ।।
"जय कुमार"20/07/15

अपना नहीं

अपना नहीं
ओरों का दुख बड़ा
प्रेम से भरा
कल की नहीं
आज में खुश रहा
जीवन भला

टीस न रख
नित नया जीवन
बुरा न भला
खिला जो फूल
काँटो के बीच रहा
मुस्कुराते ही
कोई चुनौती
जीवन नहीं हुआ
कर्म चुनौती
पकड़ राह
चित चिँतन नित
मंजिल मिले
"जय कुमार"20/07/2015

दर्पण कल

दर्पण कल कहने लगा ,,,,,, तेरी सूरत नाय ।
अपनी सूरत देख ले , जन्म सफल हो जाय ।।
"जय कुमार"18/07/15

पढ़ले हर शख्स

पढ़ले हर शख्स वो किताब बन ।
देखले हर शख्स वो हिसाब बन ।
उलझन में न रह न रख किसी को ,
सुनले हर शख्स वो आवाज बन ।।
"जय कुमार"18/07/'15

सीख लेकर इतिहास

सीख लेकर इतिहास से वर्तमान सुधार ले ।
बेसकीमती विचार हम पूर्वजो से उधार ले ।
मजहब भाषा रंग रुप , जाति बंधन तोड़के ,
समाज हमारा उज्जवल हो ऐंसा आधार ले ।।
"जय कुमार"18/07/15

खिला है फूल

खिला है फूल
खुशबू है बिखरी
कुछ समय
काँटो का जाल
वासनाओ का खेल
जीवन खत्म

सूर्य सा ताप
ज्वालामुखी का लावा
नाम जवानी
"जय कुमार

काया माया

काया माया इक हुई , तनिक घड़ी की बात ।
माया आवत जात है , तन मरघट लो साथ ।।
"जय कुमार"

मायने बदलते

मायने बदलते नहीं अच्छे नाम से ।
मतलबी पूछते है तुझे तेरे दाम से ।
सस्ती लोकप्रियता दो दिन टिकती ,
शोहरत मिलती है अच्छे काम से ।।
"जय कुमार"16/07/15

रात निकल

रात निकल जाती है , ख्वाहिशों में मचलाते हुए ।
दिन निकल जाता है , नाकामी पर झुंझलाते हुए ।
खुशी की चाह में यार , रंज का मेला मिलता रहा ,
उम्र निकल जाती है , पहेलियों को सुलझाते हुए ।।
"जय कुमार"15/07/15

राज खुलते

राज खुलते रहे ।
हाथ मिलते रहे ।
साथ ना छोड़ेगे ,
लोग कहते रहे ।।
समय की मार ने ।
ताज के खुमार ने ।
तोड़ दिया घरौंदा ,
भरोसे की डार ने ।।
विष विश्वास हुआ ।
लुटा अहसास हुआ ।
छोड़ने वालो का ये ,
दिल निवास हुआ ।।
मोह की माया से ।
मिट्टी की काया से ।
रंज बहुत पाले है ,
पाया न पाया से ।।
"जय कुमार"14/07/15

बनते बिगड़ते

बनते बिगड़ते खेल देखिए ।
पटरी एक , दो रेल देखिए ।
जम्हूरियत की सियासत में ,
साँप नेवले का मेल देखिए ।।
"जय कुमार"1/07/15

साम्प्रदायिक

साम्प्रदायिक हवा में बह गये वो ।
चोट करने की बातें कह गये वो ।
मजहब तो मानव के लिये बनते ,
मानवीयता में पीछे रह गये वो ।।
"जय कुमार"30/06/15

ताल तलैयाँ

ताल तलैयाँ भर रहे ,,,,,,,, मेघ करें बौछार ।
बन मोती जल बरस के , शीतल करे बयार ।।
हरि चुनरिया ओड़ के , धरा रही मुस्काय ।
रूप बदल पर्वत रहे , नव जीवन को पाय ।।
बीज पड़े खिलने लगे ,,,,,,,, आशा नई जगाय ।
छोड़ चले आलस्य को , नव जीवन खिल जाय ।।
"जय कुमार"28/06/15

राज करन

राज करन को सब खड़े , देखत नाही देश ।
कुछ तो है परदेश से ,,,, कुछ घूमे परदेश ।।
"जय कुमार"28/06/15
प्रकृति ने फूल दिये , जग ने बोये शूल ।
समाज में दुर्जन बने , रहे प्रकृति मूल ।।
"जय कुमार"28/06/15

हँसने का

हँसने  का सबब पूछते हो मेरा 
क्या फिर नया रुलाने का वादा है
बड़े अदब से पेश आते हो दोस्त
क्या फिर कोई जख्म देने का इरादा है

"जय कुमार "

भारत माँ का

भारत माँ का ,, मान तिरंगा
देशवाशियों कि शान तिरंगा
देश भक्तो में …… जोश भरे
मतवालों की ,, जान तिरंगा

जोश का ,,,,, सन्देश तिरंगा
भारत का ,, परिवेश तिरंगा
हँसकर मौत से ,, गले मिले
शहीदों का ,,,,,,, भेष तिरंगा


"जय कुमार "