ये शहर लौटकर आना मुश्किल होगा
इन जख्मों को समझाना मुश्किल होगा
भार कंधों पर उठा खफा दी जिंदगी
बेगानापन यह भुलाना मुश्किल होगा
सोचा न था कोठियां भरी थी जिनकी
उनको निवाले खिलाना मुश्किल होगा
गगन चुम्मी इमारतें हमने बनाई थी
पता न था सर छुपाना मुश्किल होगा
यतीम होकर बच्चे सड़क पर बिलखते
मां के बिन दूध पिलाना मुश्किल होगा
बड़े बड़े वादे किये सियासत तूने
आइना देख मुंह दिखाना मुश्किल होगा
बेबसी बेइंतहां सड़को पर भटकती
जय ये मंजर भूल जाना मुश्किल होगा
"जय कुमार" 17/05/20