Sunday, 28 September 2014

माँ की नजरों

किसी ने बेगारा कहा ।
किसी ने आबारा कहा।
माँ की नजरों ने देखा ,
आँखों का तारा कहा । ।
"जय कुमार"

अनजान महफिलों

अनजान महफिलों में फूल बन महकते रहे ।
अजनबी गमो में आँसु आँख से बरसते रहे ।
अपनी खुशी गम की हमें परवाह ना रही ,
बाग में किसी के चिड़ियों से चहकते रहे । ।
"जय कुमार"28/09/14

खेल खेल में

खेल खेल में जल गयो , सारे तन को तेल ।
सारा कौड़ा जल गयो , राख आग को मेल ।।
राख आग को मेल , उम्र निकल गई सारी ।
यौवन लूटत रहो , चलन की आई बारी ।।
"जय कुमार"28/09/14

उन परिंद्रो को


उन परिंद्रो को दर्द ए गम की फिक्र ना ,
इश्क ए दरिया में जो बसर करते है ।
उन दरख्तों को हवाओं का डर कैंसा ,
सीने में जिनके बबंड़र सफर करते है ।
रोज मिलते जमाने की राहों में लोग ,
भूलते ना जो दिल पर असर करते है ।
पुष्प खिलते बागों में हर दिन नये है ,
महकते वो जो काँटों में बसर करते है ।
किसी रोज पत्थर भी पिगल जाता ,
हम अपनी भावना में कसर करते है ।
बेपनाह मुहब्बत के जज्वात वयां नहीं ,
चाह में उसकी जय रुह नजर करते है ।
"जय कुमार" 27/09/14

जोगी जोग

जोगी जोग भूल गये , लगो भोग को रोग ।
योगी योग भूल गये , बना मुद्रा का योग । ।
"जय कुमार"26/09/14

शेरा वाली मात

शेरा वाली मात के , चरण पखारे आज ।
भक्ति भाव से पूजते , रखियो हमरी लाज ।।
रखियो हमरी लाज , माई तेरो सहारो ।
भव सागर में फँसे ,मात दिखा दो किनारो ।
"जय कुमार"26/09/14

जमाने के

जमाने के चेहरों में एक ,
चेहरा दिखता रहा ।
मेरे जज्वातों का घरोंदा ,
हाट में बिकता रहा ।
टूटकर बिखरता रहा मैं
इन राहों की बाँहों में ,
दर्द दिल में नासूर बन ,
आँखो से रिसता रहा ।।

जय कुमार" 26/09/14

तन्हाई हिज्र की

तन्हाई हिज्र की बहुत होती अजीब है ।
तमन्नाओं का आलम बस होता करीब है ।
पल-पल गुजरता है फिक्र ए यार में ,
रोता है दिल उसके साथ होता रकीब है ।।
"जय कुमार"25/09/14

अनुशासन की

अनुशासन की पाठशाला में ,
होता अनुशासन भंग है ।
दिन अँधेरा रातें जगमगाई ,
विरोधाभासों की जंग है ।
चेहरे मुस्कराते हर पल
मन में छाया गहरा सन्नाटा ,
भाषण व्यापकाता के करते ,
मगर होता दिल तंग है ।

"जय कुमार"25/09/14

खुद की हिम्मत

खुद की हिम्मत को झाँककर देख ।
खुद से ज्यादा कुछ माँगकर देख ।
हिमालय भी सर झुकायेगा दोस्त ,
अपनी सीमाओं को लाँगकर देख ।।
संकीर्ण सीमा से निकलकर देख ।
व्यापक धरातल पर चलकर देख ।
अनन्त पर पुँहुच जायेगा ए दोस्त
विश्वास की लंबाई नापकर देख ।।
"जय कुमार"24/09/14

किसी खिड़की पर

उसी खिड़की पर खड़ा मैं झाँकता रहा हूँ !
तुमारे कदमों की जमीं ,,,,, मैं नापता होगा !
गुजरे लम्हों की कसक करती रही बैचेन ,
हर वक्त तुझे यादों से ,,,,,, मैं माँगता होगा !!
"जय कुमार"24/09/14

जमाने के रिश्तों

जमाने के रिश्तों को हम कमाते रहे ।
कामना ने जकड़ा 'मैं' को भुलाते रहे ।
दुनिया की जंजीरों में ऐसे बँधे हम ,
मिट्रटी की अमानत को सजाते रहे ।।
"जय कुमार" 24/09/14

"हाइकू"

कोलाहल में
आवाज दब गई
मासूम की थी
धन की आड़
चलता है चाबुक
निर्बल खाल
मुफलिसी में
याद नहीं फसाने
याद है रोटी
चले जो सीधा
उल्टा कहे दुनिया
आज की रीत
ईमान दीप
निकला जो मन से
पुँहुचा हाट
कोई डगर
मिलती ना मंजिल
होता अपूर्ण
काल के जाल
हर तरफ होते
बचना कर्म
"जय कुमार" 23/09/14

अपने ही अक्स

अपने ही अक्स से ये गिला कैंसा ।
जफाओं का ए वेहया सिला कैसा ।
उसकी अदाओं का भी जबाब नहीं ,
शिद्दत से चाहा , वो मिला कैंसा ।।
"जय कुमार"20/09/14

मुकद्दर से

मुकद्दर से,,,,,, मिला दीजिए !
कोई तो अब सिला दीजिए !!

रुत फिर ,,,,,सुहानी आई है ,
मुख से परदा,, हटा दीजिए !

बर्बाद न हुआ ,,,,,,,अरसे से ,
मुझे आशिक ,,बना दीजिए !

सदियों से ,,,,,प्यासा दरिया ,
'जय' पानी ,,,,,पिला दीजिए !!

"जय कुमार"20/09/14

तुमसे ही मेरा

तुमसे ही मेरा हर काज है ।
तुमसे ही मेरी यहाँ लाज है ।
इस मिटने वाले जीवन में ,
तुमसे ही मेरा यहाँ ताज है ।
क्यों रुठ जाते हो यूँ पल में ।
क्यों डरते हो यूँ हलचल में ।
आज में जीना सीख लो यार ,
क्यों जीते हो अब यूँ कल में । ।
आज ही तो होता हमारा है ।
भूत तो दुखों का पिटारा है ।
प्रयास कर सच्चे मन से तु ,
भविष्य राज तो तुम्हारा है ।।
हर दर्द को अलविदा करदे ।
यादों के ढ़ाचे को जुदा करदे ।
जीता जा खुदमें यार मेरे अब,
अपने ह्रदय को खुदा करदे ।।
मन मीत अब बनकर रहेंगे ।
हर गम हम मिलकर सहेगे ।
तूफाँ आये अँधेरा हो गहरा ,
संघर्ष पथ पे चलकर रहेंगे ।।
"जय कुमार" 17/09/14

जख्मो पर

जख्मो पर जवानी आई है ।
यादों पर रवानी आई है ।
नकाब उठा यादों का फिर,
याद कोई कहानी आई है ।।
मुद्दतों से जख्म सोये रहे ।
रश्मों रिवाजो पे रोये रहे ।
खड़े है दिल के दवाजे पर ,
नकामी से अपनी खोये रहे ।
"जय कुमार" 17/09/14

मझधार में नाव

मझधार में नाव डगमगा रही है ।
तेज तूफाँ में लौ जगमगा रही है ।
जाने के बाद भी राहत कहाँ यार ,
तन मृत आँखे झिलमिला रही है ।।
"जय कुमार" 17/09/14

बाँट दिया

बाँट दिया तराजू के बाँटों से ।
छेदा गया भरोसे के काँटों से ।
संघर्ष पथ पे मुस्कराता रहा ,
तड़फ उठा प्यार की गाँठों से ।
"जय कुमार"17/09/14

काँटा घूमा

काँटा घूमा समय का , सब अपनो कर लेत ।
काँटा घूमा समय का , सब वापिस कर देत ।
सब वापिस कर देत , यही समय की चाल है ।
हम से कुछ ना लेत , यही समय को जाल है । ।
"जय कुमार"16/09/14

Tuesday, 9 September 2014

रिश्ते नाते



रिश्ते नाते कसमें वादे ।
झूठे सबके सारे इरादे ।
कफन ही होता है सच ,
स्वीकार कर ले शहजादे ।

"जय कुमार"08/09/14

हमपर भरोसा

             Photo: हमपर भरोसा ना कर मगर ,
भरम पर जमाना सलामत है ।
जतन से सजाया जिस तन को ,
यह तो मिट्रटी की अमानत है ।।

"जय कुमार"

हमपर भरोसा ना कर मगर ,
                      भरम पर जमाना सलामत है ।
जतन से सजाया जिस तन को ,
                      यह तो मिट्रटी की अमानत है ।।

               "जय कुमार"07/09/14

जब दर्द गुजरता

जब दर्द गुजरता हो राहों में ।
कैंसे खुशी मनाऊँ बाँहों में ।।

घर के दीपक कैंसे उजारु ,
तम छाया हो गलियारों में ।

खुशबु के बाग मंजूर नहीं ,
जब घुला जहर दिशाओं में ।

उनके खून पसीने को भूले ,
जिनका जीवन है खारों में ।

कैसे निवाला गले से उतरे ,
याद करे जब कोई आहों में ।

वतन के मतवारो को भूले ,
चस्पा दिया अब दीवारोँ में ।

मंदिर मस्जिद में कैसे जाऊँ ,
लिप्त रहा जय जो गुनाहों में ।

"जय कुमार"07/09/14

मुझे भूलकर

           Photo: हमपर भरोसा ना कर मगर ,
भरम पर जमाना सलामत है ।
जतन से सजाया जिस तन को ,
यह तो मिट्रटी की अमानत है ।।

"जय कुमार"

मुझे भूलकर याद करने का गुनाह ना कर ।
अपने ही इरादों को अब यूँ गुमराह ना कर ।
जख्म नासूर बन गये तेरी उल्फत में यारा ,
हरेक पल कुरेदकर इनकी परवाह ना कर ।।

"जय कुमार"06/09/14

मुझे अपनी

मुझे अपनी निगाह से दूर ना कर ।
मुझे अपनी पनाह से दूर ना कर ।
बहुत सुकून मिलता तेरे दर पर ,
मुझे दिल दरगाह से दूर ना कर । ।

"जय कुमार"05/09/14

"हाइकू"



हम अज्ञानी
गुरुवर है ज्ञानी
प्रकाश मिले

तम है छाया
गुरु ज्ञान की खान
ज्ञान से मिले

भूला हूँ रास्ता
वासनाओं में फँसा
सन्मार्ग मिले

भ्रम का जाल
जकड़ता मुझको
विवेक मिले

कर्मो का फल
ढ़ोता जन्म जन्मों से
गुरु से मुक्ति

"जय कुमार"

चलना जिसने

Photo: हमपर भरोसा ना कर मगर ,
भरम पर जमाना सलामत है ।
जतन से सजाया जिस तन को ,
यह तो मिट्रटी की अमानत है ।।

"जय कुमार"

चलना जिसने सीख लिया ।
                    बढ़ना उसने सीख लिया ।
चड़ पाता उँचा शिखर वो ,
                    झुकना जिसने सीख लिया ।

जीना जिसने सीख लिया ।
                    हँसना उसने सीख लिया ।
हर मुश्किल हल हो जाती
                    लड़ना जिसने सीख लिया ।

उठना जिसने सीख लिया ।
                    चलना उसने सीख लिया ।
खार से वो कब डरता है ,
                    खिलना जिसने सीख लिया ।

हारना जिसने सीख लिया ।
                    जीतना उसने सीख लिया ।
जीत हार से विचलित न हो
                  स्वरमना जिसने सीख लिया ।

"जय कुमार"05/09/14

"हाइकू"

बर्षा का पानी
बह गया आसरा
मिट्टी का घर

बर्षा का पानी
बेबस ढह गया
मिट्टी का घर

बर्षा का पानी
गरीबी का आलम
छत आकाश

बर्षा का पानी
उमंग ले आया
उन को जंग

बर्षा का पानी
खाने को दाना नहीं
लाया बेगारी

"जय कुमार"04/09/14

खुदको मिटाकर

खुदको मिटाकर क्या मिला ?
जीवन घटाकर क्या मिला ?
क्यों रंज पालते फिजूल के ,
यूँ दर्द बड़ाकर क्या मिला ? ?

कभी जमाने से मिल लेते ।
किसी बगिया में खिल लेते ।
किस राह पर चले हो यार .
राह ए मुहब्बत पे चल लेते । ।

यूँ उदास होकर क्या मिला ?
बदहबास होकर क्या मिला ?
होश में अपने आप से मिलते ,
यूँ निराश होकर क्या मिला ??

दिल के नजारे से मिल लेते ।
अपने ही उजारे से मिल लेते ।
खास बनाया था रब ने तुम्हे ,
जीवन किनारे से मिल लेते ।।

जिंदगी जलाकर क्या मिला ?
बंदगी भुलाकर क्या मिला ?
कुछ खास करना था मानव ,
मनुष्यता जलाकर क्या मिला ??

चलो फिर आगाज करते है ।
अपने आप से बात करते है ।
क्या जिया है क्या जीना था ,
जिंदगी का हिसाब करते है ।।

"जय कुमार"03/09/14

गला घौंट

गला घौंट कर मेरी बंदगी का ।
हिसाब माँगते मेरी जिंदगी का ।
क्यो छुपाते वेहयाई बेवफाई वो ,
जबाब नहीं उनकी शर्मिँदगी का ।

"जय कुमार" 03/09/14

नयनो से नीर

नयनो से नीर बहा देते तुम ।
कुछ एहसास करा देते तुम ।
मैं था नादाँ समझ ना पाया ,
दिल का हाल बता देते तुम ।

"जय कुमार"

अपने वादो से

अपने वादो से मुकर गया वो ।
मेरे दिल से ही उतर गया वो ।
जिसे जोड़ता रहा एक जमाने से
टूटा सीसा सा बिखर गया वो ।

"जय कुमार"

Tuesday, 2 September 2014

काये भैया

काये भैया तुम काये रो रये
अँधियारी रात में जमाने सो रये
मीठी बाते सुनके तबियत तबेला
मन बौगना हो रये . . . . . .

आदमन की गिनती बढ़तई जा रई
कलुआ की कमाई बच्चन में जा रई
देखो तो कक्का जे का दिन आ गये
सो कक्का ऐसे हम रो रये . . . .

भगुआ के बब्बा की थी पचास बीगा जमीन
ओके नतियाँ अब पाँच पाँच बीगा पा रये
सो दाऊ हम ऐसे रो रये . . . . .

मोरे दद्दा ने कई ती लेलो बेटा ज्ञान
नईं पड़ो हमने सो रोजई जा रई जान
बड़े दद्दा के खेतन में , बेजई भिट्या रये . .
सो कक्का ऐसे रो रये . . . .

बड़े शहर खो गये ते नौकरी करन खो ।
बेगारी ऐसी उते के हजारों बेहा रये . .
सो भैया ऐसे रो रये . . . .

रेलन की भीड़ देख निकर रये प्रान ।
आदमन के बीच में हम हिरा हिरा जा रये . .
सो कक्का ऐसे रो रये . . .

पेंले गाँव घर बड़े दूर दूर होत थे
जमीन घट गई घर डिगों डिगों आ गये
दाऊ के समय में बैलगाड़ी चलत थी
ये जमाने में फटफटियन की लेन लगा रये . .
सो बड़े दद्दा ऐसे रो रये . . . .

रजुआ के एक मोड़ा मोड़ी सो खूबई पड़ा रयो
मोरे के आठ जनै भैया खावे नईं पुजा पा रये . . . .
सो राजा ऐसे रो रये . .

ओकी एक मोड़ी पड़ी लिखी
सो नौने घर में ब्याह रई
मोरे के चार चार विन्ना हरे भैया
सो जे ससरार वारे लाखन मगा रये . . .
सो राम धई ऐसे रो रये . . . .

'जय' तुम हिंदी नई जानत
सो बुन्देली में समझा रये . .

काये भैया तुम काये रो रये
अँधियारी रात में जमाने सो रये
मीठी बातें सुनके तबियत तबेला
मन बौगना हो रये . . . .

"जय कुमार"

चिड़ियों को

चिड़ियों को चहकने का अधिकार चाहिए ।
गगन परियों को उड़ने का अधिकार चाहिए ।
जुल्म ढाये है वागवाँ ने जमाने से जिनपर ,
कलियों को खिलने का अधिकार चाहिए ।।

"जय कुमार"31/08/14

सारे गमों

सारे गमों को बर्बाद कर दो ।
खुशी से ये फरियाद कर दो ।
क्यों पाले बैठे हो रंज मन में ,
मुश्किलों को आबाद कर दो ।।

"जय कुमार" 31/08/14

खिलते मुरझाते

खिलते मुरझाते फिर मचलते रिश्ते ।
गम के सागर में लाश बन तैरते रिश्ते ।
फर्ज कर्ज सब भुला दिया खुदगर्जी में ,
गिरगिट की तरह रंग बदलते रिश्ते ।।

"जय कुमार"31/08/14

"हाइकू"



टूटा बंधन
छण में भाव हीन
रिश्तों की दाताँ

डाल से पत्ता
उड़ चला जो टूटा
कहाँ ठिकाना

पुष्प थे खिले
भौँरो का था भ्रमण
वक्त बदला

कौआ कोयल
एक रंग में मिलें
बोली अलग

बुरा से अच्छा
कोयल कुटिलता
कौआ निर्मल

दिखाता जैसा
मन वैसा ना होता
डंक दो होते

"जय कुमार"

मुझे वक्त

मुझे वक्त के हाथ में सौंपता रहा ।
जहर मिला प्यार परोसता रहा ।
साथ चलने को खड़ा होता रहा मैं ,
मेरे जज्बे को खंजर खौंपता रहा ।

"जय कुमार

गजानन

गजानन , पधारो मारे अँगना ।
गजानन , पधारो मारे अँगना ।

पधारो मारे अँगना ,
पधारो मारे अँगना ,
पधारो मारे अँगना . . .

मूसक पे तुम , बैठ मुस्कराना ।
संग भोले के , मैया को लाना ।

गजानन , पधारो मारे अँगना ।
गजानन , तधारो मारे अँगना ।
. . . . . . . . .

रिध्दि , सिध्दि को संग लाना ।
मोदक मन मन के तुम खाना ।

गजानन , पधारो मारे अँगना ।
गजानन , पधारो मारे अँगना ।
. . . . . . . . . .

हम तो मूरख , कछु ना जाने ।
तेरी ही मूरत , को सब माने ।

गजानन , पधारो मारे अँगना ।
गजानन , पधारो मारे अँगना ।
. . . . . . . . . .

हम तो आतुर , पूजन को तेरे ।
श्रृध्दा भाव के , पुष्प है मेरे ।

गजानन , पधारो मारे अँगना ।
गजानन , पधारो मारे अँगना ।
. . . . . . . . . .

तेरी मूरत , मन में बस गई ।
देख तुझे , हर पीड़ा मिट गई ।

गजानन , पधारो मारे अँगना ।
गजानन , पधारो मारे अँगना ।
. . . . . . . . .

प्रथम पूज्य , देव तुम हमारे ।
सबरे काज , तुमने ही संभारे ।

गजानन , पधारो मारे अँगना ।
गजानन , पधारो मारे अँगना ।
. . . . . . . . . .

हम गरीब , पूजा तेरी रचायें ।
घर में जो कुछ , तुझे खिलायेँ ।

गजानन , पधारो मारे अँगना ।
गजानन , पधारो मारे अँगना ।
. . . . . . . . . .

एक छोटी सी , विनती हमारी ।
बिखेर जाओ ये , छटा तुमारी ।

गजानन , पधारो मारे अँगना ।
गजानन , पधारो मारे अँगना ।

पधारो मारे अँगना ,
पधारो मारे अँगना ,
पधारो मारे अँगना . . . .

"जय कुमार"29/08/14

समस्त मित्रों को गणेश चतुर्थी
की हार्दिक शुभकामनायें . .जय गणेश

भैया चले

भैया चले ससुराल , खायें मुफत को माल ।
बात पे रोव दिखावे , बदल गई अब चाल ।
बदल गई अब चाल , खाके माल पेट पटे ।
फूल गये अब गाल , ठाट बाट से दिन कटे ।

"जय कुमार" 27/08/14