Monday, 21 April 2025

कोई अगलू कोई

कोई  अगलू कोई  जुम्मन फिर मिल न पायेगा
तेरी नफरत  का ये पत्थर अब हिल  न पायेगा 
खून  में   जो  दौडता   मजहब   का  खारापन
ह्रदय में  पुहुंचकर  कभी यह  संभल न पायेगा 

"जय कुमार "

Saturday, 19 April 2025

आम के आम गुठलियों

आम  के आम  गुठलियों के दाम चाहिए 
बिना  काम  के  जमाने  में  नाम चाहिए 
ईमान   की   बात  ही  बेमानी सी लगती 
मेहनत किसी की किसी को नाम चाहिए 

"जय कुमार "

Monday, 7 April 2025

मौन की भाषा कभी मगरुर हो नहीं सकती 
दृढ़ संकल्प हो तो कभी हार हो नहीं सकती 
जीतने  के  लिए  हराना  जरुरी  नहीं दोस्तों 
हराकर  सच्ची  कभी   जीत हो नहीं सकती 

"जय कुमार

Tuesday, 1 April 2025

घर की दीवारों को दरकते देखा
जमाना रास्ता बनाने लगा ।

जय कुमार

डर जाये वह हस्ती कैंसी

डर  जाये  वह हस्ती कैंसी 
लुट जाये वह  बस्ती कैंसी 
तूफ़ानों  का जोर बहुत हो
डूब जाये वह कश्ती कैसी 

"जय कुमार"