Friday, 30 June 2017

मोबयल

काम धाम  सब  छोड़ छाड़के
मोबायल   पे   बतयाऊं  लगे
लरका    उजारे   जाऊं   लगे
............

ये खोरन  से  ओ खोरन तक
भरी  बजरिया के छोरन तक
घूमे    ठलुआ   बनके   राजा
फटफटिया  खो  घुमाऊं लगे

लरका   उजारे   जाऊं   लगे
.............

लाज शरम अब कछु ने आवे
ईलू      ईलू      खुलके   गाबें
राजश्री   के   पाऊच   दवाके
दद्दा    सें      बतयांऊ     लगे

लरका   उजारे   जाऊं   लगे
...............

काऊ  की  तो   सुनने  नइंया
कोनऊ   बात   गुनने   नइंया
कही  एक  जे   मानत  नइंया
अपनी  अपनी  चलाऊं  लगे

लरका   उजारे    जाऊं   लगे
.................

जींस  टी  सर्ट  फोग  लगाके
बूटन   पे   पालस    करबाके
सल्लु मियां की अदा दिखाके
छोरि  पे  जाल  बिछाऊं  लगे

लरका   उजारे    जाऊं   लगे
....................

काम  धाम  सब छोड छाड़के
मोबायल   पे   बतयाऊं  लगे
लरका   उजारे    जाऊं   लगे

"जय कुमार "२६/०६/१७

काम धाम  सब  छोड़ छाड़के
मोबायल   पे   बतयाऊं  लगे
लरका    उजारे   जाऊं   लगे
............

ये खोरन  से  ओ खोरन तक
भरी  बजरिया के छोरन तक
घूमे    ठलुआ   बनके   राजा
फटफटिया  खो  घुमाऊं लगे

लरका   उजारे   जाऊं   लगे
.............

लाज शरम अब कछु ने आवे
ईलू      ईलू      खुलके   गाबें
राजश्री   के   पाऊच   दवाके
दद्दा    सें      बतयांऊ     लगे

लरका   उजारे   जाऊं   लगे
...............

काऊ  की  तो   सुनने  नइंया
कोनऊ   बात   गुनने   नइंया
कही  एक  जे   मानत  नइंया
अपनी  अपनी  चलाऊं  लगे

लरका   उजारे    जाऊं   लगे
.................

जींस  टी  सर्ट  फोग  लगाके
बूटन   पे   पालस    करबाके
सल्लु मियां की अदा दिखाके
छोरि  पे  जाल  बिछाऊं  लगे

लरका   उजारे    जाऊं   लगे
....................

काम  धाम  सब छोड छाड़के
मोबायल   पे   बतयाऊं  लगे
लरका   उजारे    जाऊं   लगे

"जय कुमार "२६/०६/१७

Sunday, 25 June 2017

जिस्म

जिस्म की चाहत मुहब्बत का नाम बहुत हुआ
इबादत के घर का बेसबब बदनाम बहुत हुआ

"जय कुमार "

मुहब्बत

मुहब्बत  से  ही खुदा  ने अपना  नाम  कर रखा है
जिस्म की चाहत ने इश्क को बदनाम कर रखा है

"जय कुमार "

कोनऊ लाज शरम

कोनऊ लाज  शरम  ने  आबे
लरका  भरे  बाजार  बुलयाबे
नियम कायदा सबरे तोड़ रये
मोडिन  के संग  नैना   लडाबे

कोनऊ  लाज  शरम ने  आबे
.............

घर के  सबई  काम धाम छोड़े
बैठ  चौंतरा  पे  करत  गपोड़े
नौनी  आदत  एकई  ने  सीखे
ठलुओं  के संग चिलम दबाबे

कोनऊ  लाज  शरम ने  आबे
................

कोने चला  दव  जो मोबायल
ये रोग से गांव भर  के घायल
कानों में लगा लई  इक  डोरी
जाने  कोन   बैरी सें  बतयाबे

कोनऊ लाज शरम  ने  आबे
.................

खैतन की तो वे गैल भूल गय
गैया  बछिया वे बैल  भूल गय
जींस  लगाके जे पटपटिया पे
गांव भर कि खोरन में उबराबे

कोनऊ  लाज  शरम  ने आबे
...................

बहुअन खो जे कैंसे  सजा रय
हल्के हल्के कपड़ा जे पैरा रय
मरई   पर   जाय  ये   फैंसन पे
घरभर की जे इज्जत लुटवाबे

कोनऊ  लाज  शरम  ने  आबे
लरका  भरे   बाजार  बुलयाबे

"जय कुमार "

बेखोफ चोरों  आना  जाना  हुआ
चिराग मित्र बने अंधेरे के जबसे

"जय कुमार"

Monday, 19 June 2017

मुझे बोझ मत समझ हयात तू
मुकाम आते  ही उतर जाऊंगा

आईना  बन   रहा  हूं   सदियों
ठोकर  लगते  बिखर  जाऊंगा

जिंदगी  तेरे  साथ  चल रहा हूं
छोडेगी   तो   किधर   जाऊंगा

Saturday, 17 June 2017

में किसान का बेटा हूं
मैने अपने बापू को
खेतों से लडते देखा है

मैं किसान का बेटा हूं
मैने अपने खेतों को
फसलो से भरते देखा है

मै किसान का बेटा हूं
मैने अपने खेतो को
सोना उगलते देखा है

मै किसान का बेटा हूं
मैने अपनी बगिया को
फूलों से खिलते देखा है

मैं किसान का बेटा हूं
मैने अपने खेतों को
गिरवी रखते देखा है

मैं किसान का बेटा हूं
मैंने अपने बापू को
घुटघुट के मरते देखा है

मैं किसान का बेटा हूं
मैने अपने बापू का
सम्मान उजड़ते देखा है

मै किसान का बेटा हूं
मैने अपनी फसलो को
मिट्टी में मिलते देखा है

मै किसान का बेटा हूं
मैने अपने परिवार को
भूखे बिलखते देखा है

मै किसान का बेटा हूं
मैने अपनी बहनों को
आग में जलते देखा है

मै किसान का बेटा हूं
मैने  अपने  भाईयों को
दर्द  निगलते  देखा है

में किसान का बेटा हूं
मैने अपनी फसलों को
सूत मै बिकते देखा है

मैं किसान का बेटा हूं
मैने  अपने  खेतों  मैं
जीवन जलते देखा है

मैं किसान का बेटा हूं
मैने अपनी महतारी का
सिंदूर मिटते देखा है

मै किसान का बेटा हूं
मैने अपने बापू को
पेड़ से लटके देखा है

मै किसान का बेटा हूं
मैने अपने  बापू  को
रस्सी से लटके देखा है

"जय कुमार " १७/०६/१७



मै किसान का बेटा हूं






Sunday, 11 June 2017

दिन व रात
संबध है घनिष्ट
बाद एक के

मिलन बाद
जुदाई का मौसम
रीत पुरानी

तम घनेरा
उजाले का सूचक
डरना कैंसा

प्रकाश मिला
अपने ही आपसे
तम को जीत

"जय कुमार"

Friday, 9 June 2017

तपता जून
बारिष की फुहार
मगन मन

जीवन ग्रीष्म
सावन की दस्तक
शरद सम

"जय कुमार"