Thursday, 20 November 2014

जमाने ने क्या

जमाने ने क्या कहा ये गिला ना रहा ।
मेरी जिंदगी में तू कभी वला ना रहा ।
क्या माँगु और तुझसे अब मेरे दोस्त ,
मेरी वफाओं का जब सिला ना रहा ।।
"जय कुमार"`19/11/14

आँसु आँखो

आँसु आँखो से ना बहने दो ।
जज्वात दिल में ही बढ़ने दो ।
आये न बाहर जमाना बेदर्द
दर्द को सीने में ही रहने दो ।
"जय कुमार"19/11/14

माहौल का

माहौल का ये असर क्यों है ।
हर रिश्ता दर बदर क्यों है ।
किये जो सौदे नाकाफी रहे ,
जिन्दगी आज भँवर क्यों है ।
"जय कुमार"17/11/14

चलने को

चलने को कई डगर है ।
रोकता वो इक मगर है ।
रखो ख्याल जज्वातों का ,
जिंदगी खूबसूरत सफर है ।।
अच्छा बुरा तेरी नजर है ।
दिल तेरा प्यारा नगर है ।
खड़ा हो बलपर तू अपने
चलना चाहता अगर है । ।
"जय कुमार"16/11/14

चलते चलते

चलते चलते दस मिले , खड़े खड़े में पाँच ।
बैठे बैठे एक मिला , पड़े पड़े ना नाँच ।।
पड़े पड़े ना नाँच , बढ़ने से साँस चलती ।
बैठे से कुछ नाय , चलने से मंजिल मिलती ।।
"जय कुमार"9/11/14

खाके मुफ्त को

खाके मुफ्त को वे माल , फूल गये है गाल ।
उखाड़े बाल की खाल , बदल गई है चाल ।।
बदल गई है चाल , पेट बाहर को आवे ।
मुख पे कटू मुस्कान , देश के नेता कहावे ।।
"जय कुमार"9/11/14

हर पल के

हर पल के साथ आईना ,
चेहरे बदलता रहा ।
साँस चलती रही काल ,
उम्र निगलता रहा ।
रिश्ते नाते समाज के बँध
बाँधते रहे मुझको ,
कदम बड़े आगे भ्रम था ,
मैं पीछे फिसलता रहा ।।

"जय कुमार"8/11/14

"हाइकू"


अंत आरंभ
चलता काल चक्र
आरंभ अंत
मृग सी तृष्णा
जीवन पर्यँत हो
जीवन जिया
काम लोभ में
घुटता रहा जीव
माया मद में
सृष्टि का अंग
कार्य किया प्रकृति
जीव उत्पत्ति
"जय कुमार"8/11/14

कठोर पत्थर

कठोर पत्थर भी बिखरते है ।
काले बादल भी गरजते है ।
गम के साये कितने हो गहरे ,
काली रात में तारे चमकते है ।
"जय कुमार"7/11/14

गिरफ्त ख्यालों

गिरफ्त ख्यालों को करले ऐसा प्यार मत करना ।
समझे न जज्वात तेरे उससे इजहार मत करना ।
हिज्र की आग देकर गया ,रहता रकीब के साथ ,
उस बेमुरब्बत यार का अब इंतजार  मत करना ।

"जय कुमार"

गम के

गम के चंगुल कल थे ।
दर्द के सैकड़ो बल थे ।
जलकर राख हुए जो ,
खुशी के चार पल थे ।
"जय कुमार"6/11/14

बूड़े बरगद

बूड़े बरगद की छाँव से वो ।
शहर की भीड़ में गाँव से वो ।
उँगली पकड़ चलाया जिसने ,
तेज लहरों के बीच नाव से वो ।।

"जय कुमार"6/11/14

किसी से हाथ

किसी से हाथ मिलाकर तो देख ।
किसी रोते को हँसाकर तो देख ।
कितना सुकून मिलता रुह को तेरी ,
किसी को गले लगाकर तो देख ।।
"जय कुमार"6/11/14

"हाइकू"


चला जायेगा
पछताना ही होगा
खेल जिंदगी
खिला है फूल
खुशबू है बिखरी
कुछ समय
काँटो का जाल
वासनाओ का खेल
जीवन खत्म
सूर्य सा ताप
ज्वालामुखी का लावा
नाम जवानी
"जय कुमार"6/11/14

Wednesday, 5 November 2014

बेदर्द ज़माने में

बेदर्द  ज़माने में मेरा कैंसे बसर होगा।
राह निशान न बाँकी कैसे सफर होगा।
उजड़ गया घरौंदा आँधियो के दौर में  ,
ए खुदा कहीं तो तेरा भी इक घर होगा ।।

"जय कुमार "  ६/११/१४




झुकना ना जानते

झुकना ना जानते जो हमसे कहते झुकना सीखो ।
हाथ न जोड़े कभी जिनने कहते वो नमना सीखो ।
दूसरे को बदल बाद पहले खुद को बदल यार ,
अनपढ़ शिक्षक है कहते बच्चों से पड़ना सीखो ।।
"जय कुमार"5/11/14

गमों के हवाले

गमों के हवाले ,,,,,,सौंप गया वो !
पीठ पर छुरा,,,,,,,, खौंप गया वो !
बहता रहा आग के ,,, दरिया में ,
मेरी रुह का गला घौंट गया वो !!
"जय कुमार"5/11/14

गमों के हवाले

गमों के हवाले क्यों सौंपते हो ।
छुरा पीठ पर क्योँ खौंपते हो ।
रुलाकर अरसे बाद आकर अब ,
मेरे आँसुओं को क्यों पौंछते हो ।
"जय कुमार"5/ 11 /14

सीख लेकर

सीख लेकर इतिहास से वर्तमान सुधार ले ।
बेसकीमती विचार हम पूर्वजो से उधार ले ।
मजहब भाषा रंग रुप , जाति बंधन तोड़के ,
समाज हमारा उज्जवल हो ऐंसा आधार ले ।।
"जय कुमार"

वक्त की

वक्त की धार पे सिमटी ,
नुमांदगी पे घमंड कैंसा ।
थोड़े से लम्हों में सिमटी ,
बंदगी पर घमंड कैंसा ।
सिकंदर गया राम कृष्ण
महावीर भी यहाँ ना रहे ,
चंद साँसों में सिमटती ,
जिंदगी पर घमंड कैँसा ।।

"जय कुमार"4/11/14

जिंदगी के रस्म

जिंदगी के रस्म रिवाज निभाते चले ।
मिलके प्यार के गीत गुनगुनाते चले ।
आफताब था शबाब पे मंजिल थी दूर ,
मिला जो राह में नीर पिलाते चले ।।
"जय कुमार"4/11/14

अक्सर तस्वीर

अक्सर तस्वीर में हम खुदको खोजते रहे ।
कोरे कागज के खत हम तुझको भेजते रहे ।
जज्वात वयाँ ना कर पाये मुद्दतोँ बाद भी ,
कदमों के तेरे निशान अब तक नापते रहे ।।
"जय कुमार"4/11/14

हर पत्थर खुदा

हर पत्थर खुदा हो यह जरुरी नहीं ।
हर खुदा पत्थर हो यह जरुरी नहीं ।
बेशक तू उसे चाहता है टूटकर यार ,
वो तुझे चाहती हो यह जरुरी नहीं ।।
"जय कुमार"3/11/14

"हाइकू"


बाल खेलता
जवानी सोती रही
रोया बुढ़ापा
लाया जो गया
पाया जो था खो गया
दीवाना रोया
आज की कल
मुलाकात करते
निकला वक्त
मलाल कैंसा
खयाल ही रहा था
सत्य से परे
रब को ढ़ूँडा
जग में विचरण
मन की वस्तु
गगन धरा
मध्य जीवन चला
अनन्त काल
"जय कुमार"3/11/14

हिना का

हिना का रंग सा ।
धतूरे की भंग सा ।
जुनून ए इश्क है ,
मैदान ए जंग सा ।।
"जय कुमार"2/11/14

हकीकत

हकीकत बता दे ।
पर्दा अब हटा दे ।
दिल की दौलत ,
रखने की रजा दे ।।
प्रेम अब जता दे ।
दर्द अब छुपा दे ।
खता क्या हो गई ,
दिल को बता दे ।।
ह्रदय में जगा दे ।
मुश्किल भगा दे ।
सदियों के दर्द है ,
राज वो बता दे ।।
प्यार से मिला दे ।
फूल इक खिला दे ।
दर्द ए मुहब्बत का ,
कुछ तो सिला दे । ।
"जय कुमार"2/11/14

जमाना दौड़ता

जमाना दौड़ता मैं झपटता अकेला ।
दौर निकल गये मैं अटकता अकेला ।
हिज्र और तन्हाई ने दोस्ती करली ,
तुझ से मिलने मैं तड़पता अकेला ।।
"जय कुमार"1/11/14

दिल का

दिल का अरमान वही था ।
दिल का मेहमान वही था ।
कोई न समझा उसके सिवा ,
दिल का कद्रदान वही था । ।
"जय कुमार"1/11/14

मगरुर बनके

मगरुर बनके रोये थे ।
इंसान बनके सोये थे ।
काँटने मिलता वही है ,
जिसके बीज बोये थे ।।
"जय कुमार" 1/11/14

"हाइकू "

सजके चला
शहर की गली में
जाने के बाद
नहाया आज
सुगंदित जल में
प्यास न बाँकी
चला हवा में
सर पर बैठाया
साँस न बाँकी
आग से मिला
प्रकृति का आगोश
बिखर गया
आरम्भ यही
छलाबा रहा सदा
अंत था यही
"जय कुमार "1/11/14