Monday, 30 March 2015

विपरीत हवायें

विपरीत हवायें चलने लगी ।
कलियाँ कठोर खिलने लगी ।
रोज सौदे होते स्वार्थ साथ ,
आग पानी संग मिलने लगी ।
"जय कुमार"30/03/15

अल्फाज लिखता हूँ

जय कुमार जैन

अल्फाज लिखता हूँ ।
अहसास लिखता हूँ ।
देखके चेहरा खुदका ,
आसपास लिखता हूँ ।
पतझड़ की गर्मी में ,
मधुमास लिखता हूँ ।
धरती पर रहकर मैं ,
आकाश लिखता हूँ ।
तपती रेत बीच रह ,
बरसात लिखता हूँ ।
तम के घनेरे जंगल ,
प्रकाश लिखता हूँ ।
दिल देता गवाह जो ,
हर बात लिखता हुँ ।
हँसकर निकल जाये ,
ऐसी रात लिखता हूँ ।
जुड़ जाये टूटे रिश्ते ,
मुलाकात लिखता हूँ ।
सुकून दे दिल को जो ,
वही मात लिखता हूँ ।
"जय कुमार"29/03/15

उठते फिर

उठते फिर आकाश मिले ।
बढ़ते तो आसपास मिले ।
दुख भूलकर हँसना होगा ,
खिलते ही मधुमास मिले ।
"जय कुमार"29/03/15

चुभते रहे जो

चुभते रहे जो खार से ।
दर्द देते रहे जो वार से ।
मिलने आये आज फिर ,
मिलते रहे जो हार से ।।
"जय कुमार"29/03/15

एक छत में

एक छत में
आशियाना रिश्तों का
बिखरा हुआ
टूटा टूटा सा
दिल का दरवाजा
आता न जाता
आँखे खुली है
नजर नहीं आता
सूर्य प्रकाश
फूल खिले हो
खुशबु बिखरी हो
मंद हवा में
"जय कुमार"28/03/15

जिन्दगी को सजा

जिन्दगी को सजा ना बनने दो ।
खुशियों के कुछ बीज चुनने दो ।
फलक पार जाना सबको अगर ,
पवित्र प्रेम धागों को बुनने दो ।।
"जय कुमार"27/03/15

जीवन एक

जीवन एक आग है ।
जीवन एक काज है ।
मुहब्बत से विताओं ,
जीवन एक साज है ।।
"जय कुमार"24/03/15

अपनी साँसों को

अपनी साँसों को न बिखरने दो ।
गम के सायों को ना सँवरने दो ।
रात गम की निकल जायेगी बस ,
अपनी चाहत को न बदलने दो ।।
"जय कुमार"24/03/15

हर वन्दा मुकम्मल

हर वन्दा मुकम्मल अगर हो जाता ।
वस तेरी ही मुहब्बत में खो जाता ।
आफताफ की आग कौन जलता यहाँ ,
चाँद के आगोश में अगर सो जाता ।।
"जय कुमार"24/03/15

चंचल चपल

चंचल चपल चाँद चौकाने आया ।
चाँदनी चारों छोर चमकाने आया ।
चलो चले चाँद की चमक देखने ,
चाँद चौधरी का ये बहकाने आया ।।
"जय कुमार"24/3/15

Sunday, 29 March 2015

चार दिनों का

चार दिनों का संग रहा , सदियों की जा प्रीत ।
मिले मिलाये छूट गये , मनके जे मन मीत ।।
"जय कुमार"24/3/15

मेरा मुकम्मल

मेरा मुकम्मल नसीब लिख दो ।
जिंदगी उसके करीब लिख दो ।
मुहब्बत की दास्ताँ सुनाये शब्द ,
प्रेम की वह तरकीब लिख दो ।।
"जय कुमार"24/03/15

हम मिलकर

हम मिलकर घर बनायेंगे ।
गुलशन को खूब सजायेंगे ।
साथ मिल जायेगा जब तेरा ,
हम प्रेम का राग बजायेंगे ।।
बिछड़ी खुशी को बुलायेंगे ।
जीवन का हर पल सजायेंगे ।
राज साज सब एक हमारे ,
प्यारे से दो फूल खिलायेंगे ।।
"जय कुमार"23/03/15

मेरा दिल भी

मेरा दिल भी उससे ही लगा ,
दिलों का जो रोज सौदा करता था ।
टूटकर चाहते रहे हम उसे ,
सिक्कों की खनक से जो प्यार करता था ।।
"जय कुमार"19/3/15

मायूस होकर

मायूस होकर क्योँ रोता है ।
कीमती आँसु क्योँ खोता है ।
पाये मोतिओं के बीज जब ,
बबूल के बीज क्यों बोता है ।।
"जय कुमार"

जिंदगी के रंजो

जिंदगी के रंजो - गम साथ लेकर चले ।
बन्दगी से बना जो वो हाथ लेकर चले ।
रोज दिखे गम के अँधियारे चारो ओर ,
दिल ने कहा जो वही बात लेकर चले ।।
"जय कुमार"15/03/15

चाँद ने चाँदनी

चाँद ने चाँदनी सजाई होगी ।
अगन सीने में लगाई होगी ।
शोकियाँ देख उसकी शायद ,
शहनाई अपनी बजाई होगी ।।
"जय कुमार"13/03/15

क्या बात करें

क्या बात करें अब संवेदनाओ की ।
हर आदमी की कहानी वेदनाओं की ।
वफाई वेवफाई के मायने क्या रहे ,
चारो तरफ बाढ़ आई वासनाओं की ।।
"जय कुमार"3/3/15

भूला हुआ

भूला हुआ वो शख्स याद आता है ।
यह मिट्रटी का घर बिखर जाता है ।
यादों के कारवाँ दस्तक देते जब ,
आँखो से पानी भी बिछड़ जाता है ।।
"जय कुमार"

सहमा - सहमा



सहमा - सहमा सा दिखता है ।
हर रोज बाजार में बिकता है ।
पेट आग सीने में दफन न हुई ।
खुरदरा स्पर्श सुईयों स चुभता है ।
"जय कुमार"3/3/15

टूटे पके पत्तों

टूटे पके पत्तों का दर्द सुनता कौन है ।
हरियाली के भँवर में गुनता कौन है ।
तरक्की की राह में टूटते रहे कई दिल
बिखरे हुए धागों को बुनता कौन है ।।
"जय कुमार"1/3/15

कोनऊ ने

कोनऊ ने कछु कह दई ।
कोनऊ ने कछु सुन लई ।
मोरे मन की तो जानी ने ,
कोनऊ ने कछु वुन लई ।।
"जय कुमार"

अंधे की बारात

अंधे की बारात में लँगड़े नाँचे ।
झूठ की बज्म में झूठे ही साँचे ।।
रीत की पीठ पर बैठकर आज ,
अँगना भरोसे का अँधे पोथी वाँचे ।।
"जय कुमार"28/02/15

राज वो सारे अब


राज वो सारे अब अनजान ना रहे ।
फलित हो ऐसे अब वरदान न रहे ।।
मुर्दो की भीड़ दिखती रोज राहों पर ,
क्या शहर में अब शमशान ना रहे ।।
खाली खाली दिखता हर दिल आज ,
दिल पे करें राज वो मेहमान न रहे ।।
सर्द हवाओं ने दस्तक दी आज फिर ,
गर्म मौसम के जय कद्रदान ना रहे ।।
"जय कुमार"27/02/15

कड़ी धूप में भी


'उलझे सवालों में जबाब ढूँढता हूँ ।
मुरझाये फूलों में शबाब ढूँढता हूँ ।।

"जय कुमार"'
कड़ी धूप में भी वेहद चला था ।
वो आदमी भला था . . .
वो आदमी भला था ।।
भूख की आग सँजोकर ।
आँखे खून से भिगोकर ।
पसीने में नहाकर के वो ,
किसी काज से मिला था ।।
वो आदमी भला था . . .
रक्त को पसीना बनाया ।
रिश्तो को जीना बनाया ।
पैरों में फफोले थे पाऊड़ी
वक्त की धार पे चला था ।
वो आदमी भला था . . .
चितड़े लपेटे हुए तन था ।
उज्जवल पवित्र मन था ।
मुख पर चंद्र सा तेज लिए ,
उसे जमाने से न गिला था ।।
वो आदमी भला था . . .
जन्म से हाथों में कुदाल थी।
जीवन नचाती वो चाल थी ।
भीख रहम से नफरत उसे ,
मेहनत के साये में पला था ।
वो आदमी भला था . . .
कड़ी धूप में भी वेहद चला था ।
वो आदमी भला था . . . !!
"जय कुमार" 27/02/15

राज छुपते

राज छुपते नहीं छुपाने से ।
ताज लुटते नहीं लुटाने से ।
किसी डगर मिलें आज वो ,
यार भूलते नहीं भुलाने से ।।
"जय कुमार"26/02/15

ये चूहे बिल्ली

ये चूहे बिल्ली का खेल नहीं ।
ये गुड्डा गुड़िया का मेल नहीं ।
ये प्रेम का प्यारा सा धागा है ,
ये यरवदा सी कोई जेल नही ।।
"जय कुमार"25/2/15

नींद आँखों से

नींद आँखों से बिछड़ जाती है ।
धड़कन दिल की रुक जाती है ।
वक्त ठहर जाता मैं खड़ा बुत ,
यादो में जब तेरी बात आती है ।।
"जय कुमार"25/2/15

चाँद छुप गया घनेरे

चाँद छुप गया घनेरे बादलों में इस तरह ।
किसी बच्चे को रुला दिया हो जिस तरह ।।
बैखोफ घूमने लगे खंजर शहर की राहों में ,
मिल गया हो घासलेट पानी में जिस तरह ।।
तोड़ने वाले ने ऐसा तोड़ा मेरी रुह को यार ,
काँच बिखरा पड़ा हो राह में जिस तरह ।।
जय रोज की पराजय ना झेल सका यारो ,
मिला मिट्टी में मिलती खाख जिस तरह ।।
"जय कुमार"25/02/15

कोई शिकायन ना

कोई शिकायन ना रही उससे मुझे ।
जब चाहत ही ना रही उससे मुझे ।
फूटे दर्द बाँध वो सैलाव बनके आये ,
कोई जब राहत ना रही उससे मुझे ।।
"जय कुमार"24/2/15

जिंदगी के सफर

जिंदगी के सफर में कोई सगा न रहा ।
डूबता हुआ सूरज आज उगा ना रहा ।
रंज गम मिले बेवफाई के फफोले साथ ,
साँस रुकी जिसदिन कोई दगा ना रहा ।।
"जय कुमार"20/2/15

ये हार का मीत है

ये हार का मीत है ।
ये जीत का गीत है ।
जीवन साथ चलें ,
ये हमारी प्रीत है ।।
नया फिर गीत हो ।
जीवन की जीत हो ।
प्रसन्न ह्रदय हो सब ,
ऐसी हमारी रीत हो ।
मनका मन मीत हो ।
सबकी ही जीत हो ।
दिल को जो दे सूकून ,
ऐसे ही बस गीत हो ।
"जय कुमार"18/02/15

नीम चड़ी कड़वी

नीम चड़ी कड़वी बेल सी लगती हो तुम ।
घी के साथ कड़वे तेल सी लगती हो तुम ।
तुम्हारी अदाओं को अब कैसे बयाँ करें यारा ,
आजाद परिंदे को जेल सी लगती हो तुम ।।
"जय कुमार"18/2/15

दिल की बात

दिल की बात फिर लबो पर आने दो ।
जिंदगी के सारे गमों को बह जाने दो ।
फूल के पास तो काँटे ही रहते मेरे यार ,
मगर खुशबू चमन में बिखर जाने दो ।।
"जय कुमार"18/2/15

चलो उम्मीद की

चलो उम्मीद की हम बात करते है ।
मुहब्बत से हम मुलाकात करते है ।
बहुत रहे गमों के साये में हम दोनो ।
चलो जिंदगी की वकालात करते है ।।
"जय कुमार"18/2/15

कुछ बात है

कुछ बात है उसमें भी ।
कुछ बात है हममें भी ।
भूल न पाये नासूर हम ,
कुछ बात है गममें भी ।।
"जय कुमार"18/2/15

उनके सिर

उनके सिर पर ताज रहे ।
हमारे सिर पर काज रहे ।
दिखाया वो छलावा था ,
सत्य तो सदैव राज रहे ।।
"जय कुमार"15/2/15

यादों के वो कारवाँ

यादों के वो कारवाँ बुलाते रहे ।
दिल के जख्मों से मिलाते रहे ।
लम्हा लम्हा जख्म कुरेदता रहा ,
बहार में जख्म मुस्कराते रहे ।।
"जय कुमार"1/2/15

साहिल से कस्ती

साहिल से कस्ती मिल न सकी ।
वक्त की वो कील हिल न सकी ।
मुद्दतों से वागवाँ राह देख रहा ,
आश की वो कलि खिल न सकी ।।
"जय कुमार"1/2/15

जब चाहा

जब चाहा जब जोड़ लिया ।
जब चाहा जब छोड़ दिया ।
हमने मुँह मोड़ा न ख्वाव में ,
जब चाहा मुँह मोड़ लिया ।।
"जय कुमार"1/2/15

चाँद सूरज की

चाँद सूरज की बात मत कर मेरे यार ।
कसमे वादे की बात मत कर मेरे यार ।
प्रेम की खुशवु ही काफी होती समझने ,
जीने मरने की बात मत कर मेरे यार ।।
"जय कुमार" 1/2/15

दिल को अपने

दिल को अपने रुलाता कैंसे ।
अपनी हस्ती मिटाता कैंसे ।
जिसे सँजोया उम्र भर मैंने ,
याद तुम्हारी भुलाता कैंसे ।।
"जय कुमार"1/2/15

जब चाहा

जब चाहा जब जोड़ लिया ।
जब चाहा जब छोड़ दिया ।
हमने मुँह मोड़ा न ख्वाव में ,
जब चाहा मुँह मोड़ लिया ।।
"जय कुमार"1/2/15

वो साबरमती

वो साबरमती का संत था ।
एक धोती में वो अनंत था ।
जिस सोच ने साँसे खत्म कि ,
मानवता का वह अंत था ।।
"जय कुमार"30/01/15

हर बार ही तुम

हर बार ही तुम अपनी
चाल बदल देते हो ।
हालात जैसे भी हो तुम
हाल बदल देते हो ।।
असली हो या नकली हो
चोखा हो या खोटा हो
हम रुठ अगर जाये
तुम माल बदल देते हो ।
हर बार ही तुम अपनी
चाल बदल देते हो . . .
उल्टा हो या सीधा हो
आधा हो या पूरा हो
जैसा भी मैं गुनगुनाऊँ ,
तुम ताल बदल देते हो ।
हर बार ही तुम अपनी
चाल बदल देते हो . . .!
जीना है साथ तेरे अब
मरना है साथ तेरे अब
मैं बात जो करता हूँ
तुम बात बदल देते हो ।
हर बार ही तुम अपनी
चाल बदल देते हो . . .!
"जय कुमार"29/1/15

मुख सुंदर

मुख सुंदर अंदर कुरुप हो तुम ।
काल का विकराल रुप हो तुम ।।
"जय कुमार"30/01/15

चाल गधे की

चाल गधे की एक बार फिर बदल गई ।
सूखे का मौसम आया ठंड निकल गई ।।
"जय कुमार"29/01/15

मौसम का आज

मौसम का आज मिजाज देखिए ।
कौआ कोयल का आगाज देखिए ।
किसी की मौत पर चुन रहे दाना ,
सभ्य समाज का रिवाज देखिए । ।
"जय कुमार"30/ 1/15

साथ चाहा था

साथ चाहा था हमेशा का हमने ,
उनने हर लम्हे का हिसाब रखा ।
आरजू थी दिल में रहने की एक ,
बेरुखी से मुझे बदहबास रखा ।
चाँद तारों की बात की थी कभी ,
गमों से मुलाकात करने को रखा ।
वादा था जिंदगी साथ निभाने का ,
यादो के साथ तस्वीर को रखा ।।
"जय कुमार"27/1/15

गीतों की भाषा

गीतों की भाषा समझ ना पाये तुम ।
गजलों का दर्द समझ ना पाये तुम ।
जीत की हार निभाने आये हो अब ,
ह्रदय की बात समझ ना पाये तुम ।।
"जय कुमार"28/1/15

फरेब खाने



फरेब खाने से जो बाज ना आये ।
भला लुटने से उसको कौन बचाये ।
इश्क का मर्ज इक ऐसा हुआ यार ,
दर्द हद से बढ़े तब दवा हो जाये ।।
"जय कुमार"27/01/15

गीता के साथ

गीता के साथ कुरान हो ।
बाइबिल संग पुराण हो ।
ऐसा भी मंदिर हो जहाँ ,
सबका साथ सम्मान हो ।।
"जय कुमार"26/01/15

हमारी किस्मत

हमारी किस्मत किस तरह रुठी थी ।
आश आसमान पुहुँचकर छूटी थी ।
तिनके - तिनके से जोड़ा था हमने ,
टुकड़ों टुकड़ों में बिखरकर टूटी थी ।।
"जय कुमार"22/1/15

विश्वास में भी

विश्वास में भी विष का वास होता है ।
भरोसे पर तभी तो आघात होता है ।।
"जय कुमार"9/1/15

मिलन का गीत

मिलन का गीत लिख दूँ ।
विरह का मीत लिख दूँ ।
वो जीत रोया मैं हार हँसा ,
हार की ये जीत लिख दूँ ।
"जय कुमार"9/1/15

अंधे की बारात

अंधे की बारात में लँगड़े नाँचे ।
झूठ की बज्म में झूठे ही साँचे ।।
"जय कुमार"8/1/15

उसके दामन

उसके दामन को लहुलुहान किया ,
मेरे दामन पर भी दाग लगे होगे ।
सोया नहीं इबादत की रात थी ,
सोये खुदा शायद अब जगे होगे ।
गया जो आया ना लौटकर कभी ,
सच फरमाया जन्नत में मजे होगे ।
वेवक्त सोया कफन नसीब नहीं ,
मुफलिसी के मर्ज फिर सजे होगे ।
तूफान आया उड़ गई तेरी हस्ती ,
उँगली उठाने वाले भी सगे होगे ।
अँधेरों में रहा शहनाई सुन अपनी ,
सोचता गैर के घर बाजे बजे होगे ।
"जय कुमार"8/1/15

माहौल का

माहौल का ये असर क्यों है ।
हर रिश्ता दर बदर क्यों है ।
किये जो सौदे नाकाफी रहे ,
जिन्दगी आज भँवर क्यों है ।
"जय कुमार"7/1/15

सीमा पर रोज

सीमा पर रोज चली गोलियाँ ।
संसद में रोज बदली बोलियाँ ।
किसी का बेटा सिंदूर किसी का
कभी ना माँगते झूठी तालियाँ ।।
"जय कुमार"7/1/15

उलझे सवालों

उलझे सवालों में जबाब ढूँढता हूँ ।
मुरझाये फूलों में शबाब ढूँढता हूँ ।।
"जय कुमार" 7/01/15