खूबसूरत सपने,,,,, सजाये हुए है
दिल में अरमान ,,,,,, दवाये हुए है
जिल्लत का जीवन बर्दास्त नहीं
पसीने कि खुशबु में नहाये हुए है
"जय कुमार"२४/०४/१६
खूबसूरत सपने,,,,, सजाये हुए है
दिल में अरमान ,,,,,, दवाये हुए है
जिल्लत का जीवन बर्दास्त नहीं
पसीने कि खुशबु में नहाये हुए है
"जय कुमार"२४/०४/१६
ये जिंदगी ,,,,चार दिन की है
ख्वाहिशों की खैर कर लेना
हर छोर छोटा ,,,,,,,,,इंसां को
जमाने की सैर,,, कर लेना
"जय कुमार"
वजूद जिससे वो बोझ लगने लगा है !
टहनियों को तना अब खलने लगा है !!
उंगली पकड़ चलाया जिस बच्चे को ,
अपने पैरों पर अब वो चलने लगा है !!
"जय कुमार "
हिंदु था न वो मुसलमान था
दुश्मन था न वो मेहमान था
सड़क किनारे वो पड़ा मिला
भूख का सताया,,इंसान था
"जय कुमार "०३/०४/१६
फिजाओं में फैला ,,,,,चारों ओर जहर है
असर रिश्तों का अब बेहद बेअसर है
बच्चे जवान ,,,,, रिश्तों में बुढ़ापा आया
मौत से बत्तर यह,,,, बुढ़ापे का सफर है
"जय कुमार "२/४/१६