Friday, 27 June 2014

" मुक्तक "

किसी खिड़की पर खड़ा वो आज भी झाँकता होगा
हमारे कदमों की जमीन वो आज भी नापता होगा
गुजरे लम्हों की कसक जब करती होगी बैचेन
उस वक्त यादों से मुझे वो आज भी माँगता होगा





जय कुमार २७ /०६/१४

"हाइकु"

मैं बेटी तेरी
क्या गलत हुआ है
जो मारा मुझे

जन्म का हक
क्यों छीना गया मेरा
अंश हूँ तेरा

कभी अपनी
आत्मा से पूछना माँ
क्या किया तुने

आज ना आप
होते ना मैं हर माँ
करती यह

जीवों को मारा
हत्यारा कहा गया
बेटी मारा क्या

मरघट में
राख होता शरीर
या पेट में ही

बंद करो माँ
जीने का हक दे दो
जग खत्म है

तेरी मर्जी ही
सर्वोपरि होगी माँ
कोई और ना

मानव नाम
मिट जायेगा जब
जागो अब भी

"जय कुमार"26/06/14

"हाइकु"

चिंता को त्याग
कर आज से प्रेम
होके निडर

"जय कुमार"25/06/14

जिस चिराग

जिस चिराग के सहारे निकले थे अँधेरी राह में ,
उस चिराग ने ही जय अँधेरे से दोस्ती कर ली ।

"जय कुमार" 25/06/14

"हाइकु"

प्रतिकार में
स्वीकार हो क्या तब
प्रेम है यही

डाँट माँ की
शिक्षक की फट्कार
प्रेम ग्रसित

अपनत्व में
कड़क होना होता
भाव भला है

निर्विकार जो
प्रेम करता वही
सिर्फ सोचता

भौंरे का फूल
लगाव होता सदाँ
विकार युक्त

जड़ का पौधा
प्रेम निर्विकार है
जीवन देता

माँ का पुत्र को
दूध निर्मल भाव
ना कोई आस

"जय कुमार" 25/06/14

"हाइकु"

दमन किया
वासनाओं को तब
स्वयं को जिया

धन लालच
संपत्ति आसक्ति ना
आत्म को जिया

मगन मन
औरों का भला कर
जहर पिया

आपना नाम
इच्छा ना सताई जो
जीवन जिया

मोह मुक्त हो
जन भक्त बनके
काम को किया

चलता रहे
कर्म पथ पर वो
सच्चा जीवन

"जय कुमार" 25/06/14

Wednesday, 25 June 2014

" मुक्तक "

मिलता मुझे भी कस्ती का सहारा यह अरमान था
डूब जाओ दरिया में कस्तियों का यह फरमान था
अफसाने सारे भँवर में उनका रुश्वाई का आलम
यह अंजाम मुहब्बत का मेरे उसके दरमियान था

"जय कुमार" 25/06/14                                               

" मुक्तक "

वो खुलते दरवाजों की आवाज कहाँ गई
मिट्रटी के घरोंदों की खुशबु अब कहाँ गई
चबूतरों की बैठक में ठहाकों का आलम
वो आँगन में तुलसी की पूजा अब कहाँ गई

"जय कुमार"25/06/14

" मुक्तक "

गुजारिस थी उनसे अब याद ना आया करो ।
बिखर चुके है हम अब और ना सताया करो ।
बहुत मुश्किल से लड़खड़ाते हुए खड़े होते हैं ,
दुआयें देकर मुझे अब और ना गिराया करो ।

"जय कुमार"24/06/14

" मुक्तक "

कभी मुझे हिन्दु कहा गया
कभी मुसलमान कहा गया
मानवता की नजर ने देखा
तब मुझे इंसान कहा गया

"जय कुमार" 24/06/14

" मुक्तक "

मौन मगन मन नाचत अपने आप
चुप चाप चलत करत अपने जाप
तीरत कीरत ना करें करता प्रयास
पग पग पल पल पात अपने प्रताप

"जय कुमार"24/06/14

" मुक्तक "

बेवजह इल्जाम ना लगाया करो
मुझपर ऐसे ना मुस्कराया करो
हम तो सिर्फ तुम्हे ही चाहते है
शक के तीर यूँ ना अजमाया करो

"जय कुमार" २३/०६/१४

मुक्तक

अपनी ख्वाहिशों को पर दिया करो
अपने गमों को खुद हर लिया करो
किसी की उम्मीद में मत रहना यार ,
अपने सपनों को खुद ही जिया करो    
"जय कुमार"23/06/14

"हाइकू"

"हाइकू"

गंग नीर में
मलिन मन डूबा
मलिन गंगा

नाले नीर में
पवित्र मन डूबा
पवित्र नाला

"जय कुमार"23/06/14

"हाइकू"

"हाइकू"

जो कमल है
कीचड़ में खिले है
तेज में पले

पलास फूल
निडर चमकता
ज्येष्ठ गर्मी में

गुलाब काँटों
बीच मुस्कराता है
बंधन बीच

आग सूर्य की
विचलित ना करे
ठंड हिम की

बिष पान जो
किया जिनने है वो
सिर्फ शिव है

सत्य जन ही
सुंदर होता है वो
सुंदर शिव

भय मुक्त वो
ललाट लालिमा जो
वो सत्य जन

"जय कुमार"23/06/14

" मुक्तक "

कोई राजा तो कोई रंक देखा
अच्छो अच्छो का अंत देखा
कोई ना अछूता रहा मृत्यु से
जन , संत और सामंत देखा

"जय कुमार" २२ /०६/१४ 

"हाइकू"

"हाइकू"

बीज से पौधा
तना डालियाँ पत्ते
फूल व फल

क्रम चलता
निरंतर यही जो
प्राकृतिक है

फल फूल से
पत्ता डाली तना से
जड़ जमीन

मानव तन
माँ पिता वीरज से
हाड माँस है

जन्म रुदन
माँ रस अमृत जो
पोषण देता

समय गति
करती पुष्ट जो
पाता जगत

फिर छूटता
समय होता बूड़ा
त्वचा चिपकी

जींड़ तन में
ऊर्जा खत्म होती है
मन उदास

नव जीवन
पाने को आतमन
छोड़ती तन

क्रम जारी जो
जगत है चलता
जीव पलता

एक प्रश्न जो
करता है बैचेन
आत्मन क्या

आत्माराम जो
वह चाहता क्या है
यूँ बदलना

चिंतन करो
सच्चे मन से मिलो
रास्ते खोजना

बढ़ना फिर
कष्टदायक होगे
चलना होगा

बढ़ते चलो
मंजिल मुमकिन
बस चलना

जहाँ प्रकाश
शाँति परम जहाँ
दुख से मुक्त

तम से मुक्त
प्रकाश ही प्रकाश
परम पद

समस्त मुक्त
परम युक्त होगा
निर्विकार जो

"जय कुमार"22/06/14

"हाइकु"

"हाइकु"

सुख से दुख
संबंध घनिष्ठ है
दिन से निशा

छाँव से धूप
तम का प्रकाश से
ज्ञान अज्ञान

फूल काँटों से
प्रभात का साँझ से
जन्म मृत्यु से

"जय कुमार"22/06/14

Saturday, 21 June 2014

"मँहगाई"

रेल जेब काटेगी फिरसे ,
अच्छे दिन आने वाले है ।
बस जेब खाली कर देगी ,
अच्छे दिन आने वाले है ।
बजट रुलायेगा गृहणी को ,
अच्छे दिन आने वाले है ।
मँहगाई ना रुक पायेगी ,
अच्छे दिन आने वाले है ।
फिर प्याज के आँसु रोयेगे ,
अच्छे दिन आने वाले है ।
पतली दाल खायेगे हम ,
अच्छे दिन आने वाले है ।
तेल जला जायेगा हमको ,
अच्छे दिन आने वाले है ।
दाम तो बढ़ायेगी सरकार ,
अच्छे दिन आने वाले है ।
वादे भूल जायेगी सरकार ,
सच्चे दिन आने वाले है ।
प्यार निभायेगी सरकार ,
प्यारे दिन आने वाले है ।


"जय कुमार" 21/06/14

कलि

कलि कलि करती पुकार
कौन दोष है मोरो ।
बाग बागवां बनकर लूटें
कौन दोष है मोरो ।

"जय कुमार" 20/06/14

होंठो पे हँसी

होंठो पे हँसी बसती जिनके ,
दिल में छाले होते है ।
अपने गम को छुपा लेते जो ,
वो चाहने वाले होते है ।

डूबे रहते वो सुरमाला में ।
गाते गीत अपनी हाला में ।
कहते ना अपनी पीड़ा जो ,
खुद में रमने वाले होते है . .

मौन रुप धारण कर लेते ।
अपना सब ओरों को दे देते ।
ओरो पर उपकार करें जो ,
समता में जीने वाले होते है . .

प्रेम की भाषा पड़नी जाने ।
प्रेम ह्रदय को ही पहचाने ।
प्रेम पर मर मिटते वो जो ,
प्रेम में डूबने वाले होते है . . .

मौसम की रवानी उनमें ।
जीवन की जवानी उनमें ।
फूलों सी खुशबु रहती जो ,
पतझड़ में खिलने वाले होते है . .

होंठो पे हँसी बसती जिनके ,
दिल में छाले होते है . .
अपने गम को छुपा लेते जो ,
वो चाहने वाले होते है . .

"जय कुमार"20/06/14

मेरा रकीब

जो मेरा रकीब था ।
वो तेरा नसीब था ।
हिज्र मेरे दामन में ,
तु उसके करीब था ।

"जय कुमार"20/06/14

कभी खुद

कभी खुद से मिलकर तो देखा होता ।
अपने फटे को सिलकर तो देखा होता ।
करते रहे शिकायत जमाने की दोस्तो ,
अपने दिल में झाँककर तो देखा होता ।

"जय कुमार" 20/06/14

Thursday, 19 June 2014

कब्र पर आकर

कब्र पर आकर अब क्यों आँसु बहाते हो ।
जख्मों को कुरेदकर क्यों लहु बहाते हो ।
साँसे चलती रही तब तक सुकून ना मिला ,
अब मेरी मुहब्बत के क्यों किस्से सुनाते हो ।

उस वक्त कहाँ थे जब भटका शहरों में ।
उस वक्त कहाँ थे जिये हिज्र के कहरों में ।
तड़पा के मारा और अफसोस जताते हो ,
उस वक्त कहाँ थे जब टूटते थे पहरों में ।

बेवफाई के बहुत ही बड़े बाजीगर हो तुम ।
अफसानो को लीलने वाले अजगर हो तुम ।
अब क्यों मेरी खाक को यूँ नापाक करते हो ,
मुहब्बत कफन के बहुत बड़े सौदागर हो तुम ।

चले जाओ अपने आप को खोने दो मुझको ।
चले जाओ अपने प्यार पर रोने दो मुझको ।
एहसान कर अरसे के बाद सुकून मिला है ,
चले जाओ मेरे सामने से सोने दो मुझको ।

"जय कुमार" 19/06/14

जब मन

जब मन ही खारा हो गया ।
जब तन ही हारा हो गया ।
स्वार्थ के चंगुल में फँसके ,
अब जन ही मारा हो गया ।

"जय कुमार" १९ /०६ /१४

कुछ कमाल

कुछ कमाल होगा सोचना बेकार है ।
कुछ धमाल होगा सोचना बेकार है ।
खुद करनी होगी खुद की मदद यार ,
कोई अवतार होगा सोचना बेकार है ।

"जय कुमार"१९  /०६ /१४

भौंरे आवारा

भौंरे आवारा हुए नकेल कसना जरुरी है ।
कलियों की कोमलता को बचाना जरुरी है ।
राजनीति के घोड़ो पर बैठा है जो जालिम ,
उतार उसको काला मुँह करना जरुरी है ।

"जय कुमार"/१८ /०६ १४ 

पँछी की उड़ान

पँछी की उड़ान वही होगी
चाहे बदल दो आकाश ।
उल्लु की प्रकृति ना बदलेगी
चाहे बदल दो प्रकाश ।
होने ना होने का अंतर बस
जिसे समझना है यारो ,
शीरत ना बदलेगी कभी यहाँ
चाहे बदल दो लिबास ।

"जय कुमार"१८ /०६ /१४ 

मेरी आँखो को

गुजरे जमाने की यादेँ ,
मेरी आँखो को ,
बरसात दें गईं . .
दिल में पलते ख्वावों को ,
एक पल में लें गईं . . .

कल तक थे जो मेरे साथी ,
हर पल साथ निभाते थे ।
कल तक थे हम तेल और बाती ,
एक दूजे पर मिट जाते थे ।
ऐसी आईं कातिल हवाये ,
मेरी बस्ती को ,
बर्बाद कर गईं . . .

गुजरे जमाने की यादेँ ,
मेरी आँखो को ,
बरसात दें गईं . . .
दिल में पलते ख्वावों को ,
एक पल में लें गईं . .

"जय कुमार"१८ /०६ /१४ 

का जमानों

का जमानों आ गओ भैया ,
अब कोनऊ शर्म ना आत है ।
का जमानोँ आ गओ भैया ,
बेईमान हलुआ पुड़ी खात है . . .

बाप मतारी खौं भूल गये ।
रीत रिवाज खौं भूल गये ।
मोड़ा बऊयों से सबके सामु ,
हँस हँसकर के बुलयात है . .

भूल गयों राम की बतियां ।
भूल गयो काम की बतियां ।
शहर के सड़क किनारे भैया ,
अब तो ईल्लु ईल्लु गात है ।

नीति अनीति बिसरा दई ।
कुरीति रीति खूब चला दई ।
लंगड़ा राजा दोड़ लगा रये ,
न्याय कुर्सी पे अंधों बैठ जात है . .

विकास नीतिया खूबई अच्छी ।
उनकी बतियां खूबई सच्ची ।
दोनई जोर हम पथरा पटकें ,
गरीब भैया नोनई रोटी खात है . .

मोरी कमाई मँहगाई खा गई ।
नेतन की बाँते उल्लु बना गई ।
इते कमाबे उते झट से जाबे ,
भँजी जेरिया पड़ा जबात है . .

गले मिलत ते ईद पे हम ।
बाँटे मिठाई दिवारी पे हम ।
जै सियासी चाले चलत रहे ,
हम मजहब पे लड़ जात है . . .

"जय कुमार"15/06/14

बुरो वखत

बुरो वखत जीवन खो छीन छीन ले जात है ।
अच्छे वक्त की चाह हमें हौंसलों दे जात है ।

"जय कुमार"

बुरो वखत

बुरो वखत जीवन खो छीन छीन ले जात है ।
अच्छे वक्त की चाह हमें हौंसलों दे जात है ।

"जय कुमार"

मुद्दतों बाद

मुद्दतों बाद रुत सुहानी आई ।
मुद्दतों बाद याद पुरानी आई ।
बीते पलों की खुशबु से आज ,
मुद्दतों बाद तबियत पे रवानी आई ।

"जय कुमार" १४ /०६/१४

ख्वाव

ख्वाव पूरे तेरे वतन होंगें ।
ऐसे ही ना हम दफन होंगें ।
तुझपर हो जायेगे कुर्बान ,
मेरे तो तिरंगा कफन होंगे ।

"जय कुमार" 14/06/14

दिल करता मेरा

दिल करता मेरा
तोड़ दूँ बँधन मैं भी
उड़ जाऊँ
मुक्त गगन में
बँधी हूँ
जकड़ी हूँ
रीतिओं से
रिवाजों से
मुझपर पाबंदियाँ
उसपर क्यों नहीं
मैं स्वतंत्र नहीं
घर में
समाज मुझपर नजरें
गड़ाये रहता क्यों
उसी माँ ने
मुझे जना
उसी ने उसको
भेदभाव कैंसा है
मैं खुद को
अभिव्यक्त ना
कर सकुँ
मेरा गुनाह क्या
उसने
मानव जाति बनाई
भेद क्यों बनाया
कमजोर कहते मुझे
अगर हूँ
तो कमजोर
क्यों बनाया
नहीं हूँ तो समाज
क्यों जकड़ता
मेरी सिसक
का गुनहगार कौन
ईश्ळर
समाज
या मैं खुद

"जय कुमार" १४ /०६ /१४

सती पार्वती

सती पार्वती तुम , असली रुप में आओ ।
लक्ष्मी दुर्गावती तुम , जौहर दिखलाओ ।
जग की सृजनकर्ता नारी हो अबला नहीं ,
चंडिका दुर्गा तुम , रौद्र रुप दिखलाओ ।

"जय कुमार"/१४ ०६ /१४ 

पुष्प दिलों

पुष्प दिलों में जब खिलते होगेँ ।
हम तुम यूँ ही जब मिलते होगे ।
उड़ने से रोक ना पाता होगा कोई ,
मुहुब्बत के पर जब निकलते होगे ।

"जय कुमार"12/06/14

मोह पिया

मोह पिया के रंग में , रंगना ओ रंगरेज ।
दूर पिया परदेश से , यादों के रंग है भेज ।
नीर नयन में भरे पड़े , रंग पिया की याद ,
इन दोनों के मिलन से , पिया बने रंगरेज ।

"जय कुमार"१२/ ०६ /१४ 

बोये थे फूल

बोये थे फूल राहोँ में ।
आये है शूल बाँहों में ।
नियत नियति बदली ,
तम छाया निगाहों में ।

"जय कुमार" 12/06/14

भेद मिटा

सारे भेद मिटा दो तुम ।
सारे खेद मिटा दो तुम ।
हम तेरे है बस तेरे ही ,
दिल के छेद मिटा दो तुम ।

"जय कुमार" 12/06/14

अपना बनाया जाये

किसी भूले को रास्ता दिखाया जाये ।
किसी अजनबी को अपना बनाया जाये ।

नफरतों की आग में जल चुके कई शहर ,
किसी भूखे को अब खाना खिलाया जाये ।

बहाते रहे हो दूध आस्थाओं के मंदिर में ,
किसी तड़पते बच्चे को पानी पिलाया जाये ।

सियासत के खेल में सिसकते रहे मासूम ,
दिलोँ में उनके अब अंगार जलाया जाये ।

मुहताज ना हो कोई मजलूम कहीं पर ,
अपने चमन को ऐसा महकाया जाये ।

दुनिया से दोस्ती दिल में हो बस प्यार ,
हर मदरसे में पाठ 'जय' पढ़ाया जाये ।

"जय कुमार"11/06/14

मुखौटा सुंदर

कमल ना जितना सुंदर ,
प्रतिबिम्ब सुंदर बनाते लोग ।
वस्तु ना जितनी सुंदर ,
आवरण सुंदर दिखाते लोग ।
मन में कलुषता भरी पड़ी
तन को सजाया बहुत है ,
ह्रदय ना जितना सुंदर ,
मुखौटा सुंदर लगाते लोग ।

"जय कुमार" 11/06/14

कुछ मजबूरी

कुछ मजबूरी थी कुछ तेरी दूरी थी ।
जिंदगी पूरी थी फिर भी अधूरी थी ।
आसियाना बनाना चाहा तेरे साथ में ,
कुछ मनाही थी कुछ तेरी मंजूरी थी ।

"जय कुमार" ११ //०६ /१४

कह दिया

कह दिया जो उनसे वो इजहार था ।
कह ना पाये जो हम , वो प्यार था ।
ढ़ूड़ते रहे दुनिया में तुझको हम यार ,
दिल में दबा रखी यादें वो इंतजार था ।

"जय कुमार"१० /०६ /१४ 

नयनो से नीर

नयनो से नीर बहा देते तुम ।
ह्रदय की बात बता देते तुम ।
मैँ था नादान समझ ना पाया ,
कुछ अहसास करा देते तुम ।

"जय कुमार" 10/06/14

परिंदो के

परिंदो के घर में ये कौन आया ।
बच्चों को जहर ये कौन पिलाया ।
घौंसला जला आपसी रंजिस में ,
पौधे नफरत के ये कौन लगाया ।

"जय कुमार" 10/06/14

कोई सबकुछ

कोई सबकुछ पाकर भी मचलता है ।
काँटों , कीचड़ में भी फूल खिलता है ।
हयात की विसात क्या है मेरे मित्रो ,
कजा के आगे किसका जोर चलता है ।

"जय कुमार"9/06/14

तपता जून

तपता जून
आया ना मानसून
सब है सून

"जय कुमार" ०९ /०६ /१४

Sunday, 8 June 2014

"मिथ्या"



मुहब्बत का बाजार लगा है ।
कौन किसका यहाँ सगा है ।
आईने में चेहरा देख अपना ,
यह तन भी पराया लगा है ।

"जय कुमार"

जख्म खाकर

जख्म खाकर हम दुआ देते है
दर्द लेकर खुशी हम बहा देते है
फना हो जाते उसपर हम दोस्तो ,
जिसको दिल में बिठा लेते है

"जय कुमार" 7/06/14

"दिल का मिलन"



मेरा दिल उसके दिल से मिल गया ।
दिल की बगिया में फूल खिल गया ।
चोट खाईं जिसने जमाने की लाखों ,
दरकते दिल को अब वो सिल गया ।

"जय कुमार" 7/06/14

"मासूम दिल"



छोटी छोटी बातों पर
यार क्यों तु रुठ जाता है
मेरे अहसासों के बाग को
क्यों तु लूट जाता है
ठिकाना बस तू ही है
मेरे इस मासूम दिल का
अश्क जो निकले तेरे
मेरा दिल टूट जाता है

"जय कुमार" 7/06/14

हम मिट्रटी

हम मिट्रटी के महिल में रहते है ।
हरेक गम को हँसकर सहते है ।
किसी बात से विचलित ना होते ,
शाँत जल धार सम सदैव बहते है ।

"जय कुमार" ७/०६/१४ 

अंगारे दिल

अंगारे दिल में जब दहकते होगें ।
पुष्प बगिया में तब महकते होगें ।
मेहनत परिंदों की रंग लाती तब ,
जब घौंसलों में चूजे चहकते होगें ।

"जय कुमार"5/06/14

जख्म

जख्म को गीत सुना दिया मैंने ।
दर्द को गजल बना दिया मैंनें ।
जानें कल क्या होगा सोचा तो ,
आज को खुश बना लिया मैंने ।

"जय कुमार" 4/05/14

जिंदगी चंद

जिंदगी चंद ख्वायिशों के लिए घिसटती रही ।
संघर्षो के जाल में तिल तिल पिघलती रही ।
ख्वायिशें जो ना हो सकी पूरी जीवन भर में ,
उन्ही के लिए ये यहाँ पल पल मचलती रही ।

"जय कुमार"4/057/14

"नादान दिल"



साथ निभाने वाले कच्चे लगे ।
भरोसा तोड़ने वाले सच्चे लगे ।
दिल बड़ा नादाँ निकला यारों ,
जख्म देने वाले ही अच्छे लगे ।

"जय कुमार" 2/06/14

सभी मुल्जिम

सभी मुल्जिम अब बने से क्यों है ।
खिले ये चेहरे अब बुझे से क्यों है ।
किस न्याय की बात निकल पड़ी जो ,
आज बज्म में सिर झुके से क्यों है ।

"जय कुमार" 1/06/14

बँदायू

बँदायू में है पेड़ गवाह ,
और क्या चाहिए ।
समाज का काला चेहरा ,
और क्या चाहिए ।
सियासत की नाकामी पर
कहते है वो अब ,
लड़कों से हो जाती भूल ,
और क्या चाहिए ।
मुर्दो से उम्मीदें करते हो ,
और क्या चाहिए ।
हवाओं से बातें करते हो ,
और क्या चाहिए ।
हकीकत सामने है सन्नाटा
चारों ओर पसरा ,
बस मजहब की बातें हो ,
और क्या चाहिए ।
समाज के कर्णधार चुप ,
और क्या चाहिए ।
सियासत की रोटी सिकी ,
और क्या चाहिए ।
चुप ना रहो करो खुद से
अब एक सवाल ,
ऐसे ही जीना हमको फिर ,
और क्या चाहिए ।

"जय कुमार" 1/06/14

सिसकते जज्बात


सिसकते जज्बात स्वार्थ के बाजार में ।
सिर्फ वफा की बातें प्रेम के इजहार में ।
मुखौटा पहनते है पल पल यहाँ लोग ,
बस चेहरे मुस्कराते इंसां के व्यवहार में ।

"जय कुमार"1/06/14

gazal


ये कुछ कर गुजरने के दिन है ।
खुद से बात करने के दिन है ।

बातें बहुत हो चुकी मेरे मित्रो ,
हकीकत से मिलने के दिन है ।

मुलाकातों का दौर खत्म हुआ ,
अब दिल में उतरने के दिन है ।

कहाँ फँसे इतिहास के पन्नों में ,
अब नये ख्वाव देखने के दिन है ।

किसको बददुआ दे अब यारो ,
अपने आप से मिलने के दिन है ।

मजहब के नाम पर ना टूटो ,
ये एक साथ बढ़ने के दिन है ।

रुख बदला अब हवाओं ने ऐसे ,
मन मीत से मिलने के दिन है ।

"जय कुमार"31/05/14

gazal

ख्वायिशों के पर निकलने लगे ।
बच्चे अब पैरों पर चलने लगे ।

वक्त ने रुख बदला कुछ ऐसा ,
दुश्मन भी अब गले मिलने लगे ।

सियासत के पाँसे बदल गये अब ,
आशा के फिर पुष्प खिलने लगे ।

रोटी मिलने की आशा कैंसे करें ,
जब पौधों में बिष मिलने लगे ।

गुमनाम हो जाते है यहाँ वो शहर ,
हवा में जिनके जहर घुलने लगें ।

परिंद्रों के घर पर कहर ढाते वो ,
जिनकी रगों में रोग पनपने लगे ।

मुसीबत भी आसान लगती उनको ,
जो अपने आप में ही रहने लगे ।

"जय कुमार" 30/05/14

बैठना चाहा

बैठना चाहा साथ जिनके , खजूर बने वो ।
जब बात उनकी आयी , बेकसूर बने वो ।
धरती छोड़ आसमान में बसर करने लगे ,
इज्जत मिली जो उनको , मगरुर बने वो ।

"जय कुमार"30/05/14

खुली किताब

खुली किताब हूँ पड़ना ना सीखा तुमने ।
प्रेम का सागर हूँ पाना ना सीखा तुमने ।
मंजिल कैसें ना मिलती तुझको मेरे यार ,
मुकम्मल राह हूँ चलना ना सीखा तुमने ।

"जय कुमार" 29/05/14

कठिन रास्ता


कठिन रास्ता ही सफलता का पैगाम लाता है ।
दृढ़ विश्वास से ही यहाँ इंसान का नाम आता है ।
बैठकर सोचने से कुछ भी ना होता मेरे मित्रो ,
परिश्रम का पसीना ही सुख का ईनाम लाता है ।

"जय कुमार"29/05/14

"यादें"



दस्तक देती रही वो यादें ।
राहें खोजती रही वो यादें ।
जिनका दमन करते रहे हम,
मुझसे मिलती रही वो यादें ।

"जय कुमार" 29/05/14

"प्रीत की रीत"



चलो फिर प्रीत की रीत चलायें ।
चलो फिर गीत की जीत गायेँ ।
धरा पर स्वर्ग नजर आ जाये ,
चलो फिर मीत की प्रीत निभायें ।

"जय कुमार" 29/05/14

मौसम

मौसम बदल गये ।
हमराह मिल गये ।
दसको से मुरझाये ,
पुष्प वो खिल गये ।

मनमीत मिल गये ।
प्रेम गीत चल गये ।
मिलने की आस मेँ ,
ख्याल वो पल गये ।

जज्बात पल गये ।
राह पर चल गये ।
साथ रहने के लिए ,
ख्वाब मचल गये ।

"जय कुमार" 29/05/14

"नया युग"



ये नये युग की शुरुवात है ।
ये नयी सुबह की बात है ।
आश प्रबल आप से ही है ,
ये युवा हिँद के जज्बात है ।

"जय कुमार" 26/05/14

"नेक इरादा"


इरादा नेक हो तो रास्ते भी निकल आते है ।
ज्येष्ठ गर्मी में हिम के पर्वत नजर आते है ।
दरिया को पर्वत रोक ना पाया कभी मित्रो ,
बुलंद इरादों को हिमालय भी सर झुकाते है ।

"जय कुमार" 26/05/14

"खास सुबह"

सुबह का सूरज कुछ खास कह रहा है ।
प्रकाश का तेज कुछ खास कह रहा है ।
एक नये दौर की शुरुआत हो रही है ,
हवा का झोका कुछ खास बह रहा है ।

"जय कुमार" २६/०५ /१४   

प्रान जाएं सांची ने कइये
हिले मिले लबरो में रइये

उल्टी चल रै आज हवाये
बौरा  भैया गाना सुनायें
लंगड़ा दाऊ बुट्टी लगायें