Mere Bhav
Thursday, 24 July 2025
लतीफों ने जो छोड़ा
लतीफों ने जो छोड़ा है
हास्य व्यंग का रोड़ा है
मंचों की अंधी चाहत में
कविता ने दम तोड़ा है
जय कुमार
Thursday, 17 July 2025
जिनके कंधों पर
जिनके कंधों पर बोझ होता है
उनके जीवन में ओज होता है
जिनको जिम्मेदारियां नही हो
उनका जीवन भी बोझ होता है
"जय कुमार "
Saturday, 12 July 2025
जो तलबा चाटे हैं
जो तलबा चाटे हैं
वो हलवा खाते हैं
यहां स्वाभिमानी के
घाटे ही घाटे हैं
"जय कुमार "११/०७/२५
Friday, 11 July 2025
नज़रें जमाने के सामने ऐसे झुका गई
नज़रें जमाने के सामने झुका गई
राज सारे अपने दिल में दबा गई
बीज से ही तो फूल फल बनते हैं
मेरी ही कमी थी जो उसमें आ गई
"जय कुमार "११/०७/२५
Wednesday, 9 July 2025
करें सवाल हम वाजिब ये खेल खेलने वालों से
जाति धर्म और भाषा पर ज्ञान पेलने वालों से
लाशों पर सियासती रोटियां बेलने वालों से
राज चलाने आये हो या राष्ट्र जलाने आये हो
करें सवाल हम वाजिब ये खेल खेलने वालों से
"जय कुमार "
Sunday, 6 July 2025
जो वादे किये थै सारे वादे भुलाने
जो वादे किये थै सारे वादे भुलाने के लिए
यादों के सारे पुलिंदे अपने जलाने के लिए
मेरे भरे पूरे बाग को उजाड़ कर चली गई
केवल रक़ीब के दो फूलों को खिलाने के लिए
*जय कुमार "6/7/25
जो वादे किये थै सारे
जो वादे किये थै सारे वादे भुला दिए
यादों के सारे अपने पुलिंदे जला दिए
मेरे पूरे बाग को उजाड़ कर चली गई
केवल रक़ीब के तूने दो फूल खिला दिए
*जय कुमार "
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