Mere Bhav
Friday, 4 February 2022
मां की नजर
किसी को मैं आवारा सा दिखता था
किसी को मैं बेगारा सा दिखता था
जब भी मेरी मां की नजरों ने देखा
मां को आंखों का तारा सा दिखता था
"जय कुमार "
मजदूर की रोटी
मेहनत का बस इक मर्ज होता है
मजदूर की रोटी पर कर्ज होता है
"जय कुमार "
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