Saturday, 29 September 2018

आदमी  जमीर से आज गुमनाम दिखता है
नादान  क्यों  पाती  तू   बेनाम  लिखता  है

कोठियां,  कारे,   ऐशो    आराम    है   तेरा
कार्यालयों  में  कोढियों  के दाम बिकता है

"जय कुमार"

Thursday, 27 September 2018

मेरे  केवल  कुछ कहने  से,  कैंसे तुम  यूं  रूठ गये  हो
अहसासों की  छोड़ी  बगिया, फूलों  जैंसे  टूट  गये  हो

कुछ कड़वी बातों से मेरी,  आपका शायद है मन मैला 
मेरे  मन   मंदिर   में  तेरा, प्रेम  प्रकाश  केवल है फैला
जैसे बाती मिले  तेल से,  वैसे दिल से दिल मिल जाता
प्रीतम तुम जब रहो साथ में, जीवन का हर पल खिल जाता

ह्रदय से ह्रदय जब मिलता, प्रेम पथ पर पथिक है चलता
ह्रदय  का  दामन  अब छोड़ा  , शीशे  जैसे  फूट  गये  हो

कुछ कहनी कुछ ना कहनी थी, कहने  से जब मैं चूक गया
ह्रदय की प्रिय एक ना पड़ी , प्रेम का फूल तब सूख गया
कल  तक  तेरा  मेरा  ना था, चलते थे हम  साथ साथ में
सारा घर खुशबु  से  महकता, रहते थे जब  हाथ  हाथ में

नजर मिलाने से क्यों डरते, क्या काला जो दिल में रखते
वेहयाई   की  भनक  न  लगी,  चोरों  जैंसे  लूट  गये  हो

मेरे  केवल  कुछ  कहने   से, कैंसे  तुम  यूं  रूठ  गये हो
अहसासों  की  छोड़ी   बगिया, फूलों  जैंसे  टूट  गये  हो

"जय कुमार"14/10/2018

Wednesday, 26 September 2018

Mere Bhav
Tuesday, 27 September 2016

उन परिंद्रो को दर्द ए गम की  फिक्र कहां
इश्क ए दरिया में  जिंदगी  बसर  करते है

उन  दरख्तों  को  हवायें  कहां डरा पाती
सीने  में  जिनके  बबंड़र  सफर  करते है

रोज मिलते है  जमाने  की  राहों  में लोग
भूलते नही जो  दिल  पर असर  करते  है

पुष्प  खिलते  है बागों  में हर दिन ही नये
महकते  वो  जो काँटों  में  बसर  करते है

इक  रोज पत्थर भी  पिगल  जाता  मगर
हम  अपने  जज्वातों  में  कसर  करते  है

बेपनाह  मुहब्बत  के  जज्वात  वयां नहीं
चाह  में  उसकी  जय  रूह नजर करते है

"जय कुमार"

Wednesday, 19 September 2018

पढ़ले हर कोई

पढ़ले  हर  कोई  किताब  की  तरह
छुपाये  न कुछ भी  नकाब की तरह

उलझन न रख  अपने दामन में यार
देखले  हर  कोई  लिबास की  तरह

कभी न कभी  वह सामने आ जाता
जनाब  उस बिगड़े हिसाब की तरह

इश्क वक्त के साथ करे गहरा असर
पुरानी   बंद  उस   शराब  की  तरह

लाख  जिंदगी   जिये  ऐशो  आराम
सुकूं  नहीं  उसके  आदाब की तरह

जिंदगी  मीठे  जहर  का नाम  दोस्त
महफिले-यार   के  शबाब  की तरह

हिज्र की  आग को  बयां  करु  कैंसे
जला  है तू जय  आफताब की तरह

"जय कुमार "16/09/18

यह मेरी मौलिक रचना है

Saturday, 15 September 2018

पढ़ले हर कोई

पढ़ले  हर  कोई  किताब  की  तरह
छुपाये  न कुछ भी  नकाब की तरह

उलझन न रख  अपने दामन में यार
देखले  हर  कोई  लिबास की  तरह

कभी न कभी  वह सामने आ जाता
जनाब  उस बिगड़े हिसाब की तरह

इश्क वक्त के साथ करे गहरा असर
पुरानी   बंद  उस   शराब  की  तरह

जिंदगी  मीठे  जहर  का नाम  दोस्त
महफिले-यार  उस शबाब  की तरह

"जय कुमार "16/09/18

Monday, 10 September 2018

दिल बिकता

दिल  बिकता  रहा रोज बाजार में
सिर्फ  घाटा है  दिल के व्यापार में
कम  लोग  ही  मुनाफे  में पाते  हैं
खबर  पहली है आज अखबार में

" जय कुमार "11/09/18

आस

आस आसमान से टूटती रही
जिंदगी  जन्म  से  लूटती रही
गिरा उठा चलने को हर दफा
भरोसे  की  गगरी फूटती रही

"जय कुमार "11/09/18

मैंने  दिल में तेरा करम पाल रखा है
तुझे भरोसा नहीं वहम पाल रखा है
आज भी उजला चेहरा तेरा दिखता
तू समझता नहीं अहम पाल रखा है

"जय कुमार"10/09/18