Wednesday, 27 May 2015

परिवार आज बँट


परिवार आज बँट रहे , अपने अपने काम ।
समाज आज बदल चुका , अपने अपने राम ।
अपने अपने राम , धर्म के अब दंगल होवे ।
राह - राह पर खून , मनुज मनुजता खोवे ।।
"जय कुमार"27/5/15

खुले आशमान


खुले आशमान में उड़ना चाहता हर कोई ।
दर्द की आहट से भागना चाहता हर कोई ।
कामयाबी तो शूलों की नोंक पर चलती है ,
फूल भरी राह पे चलना चाहता हर कोई ।।
"जय कुमार"27/5/15

आज सुनों तुम


आज सुनों तुम मोरे सँयां ।
ऐसें ना पकड़ो तुम बैंयाँ ।
रोजई रोज छेड़त रेत हो ,
मोखो अच्छो लगत नैंयाँ ।।
"जय कुमार"27/05/15

एक बात हम


एक बात हम तुमसें कय दयें ,
हमसे प्रीत लगईओ ने ।
बोलत चालत तो तुम रईयो ,
नैना हमसे मिलईओ ने ।।
अपने खेत में तुम जईओ ।
कुरा करकट खूब पटईओ ।
जिनके लिगों जाने सो जाने ,
इते तो नजर उठईओ ने ।।
मुलक में तुम घूमत रेने ।
अपनी बातेँ खूब सुनाने ।
हम जानत तुमको अच्छे से ,
अपनी जात बतईओ ने ।।
उतई हते तुम जिते हते हम ।
मगर की आँखे होती है नम ।
तनक मनक बचा जो रखी हो ,
अपनो डोल बजईओ ने ।।
"जय कुमार"27/05/15

Tuesday, 26 May 2015

नामुराद तेरी


नामुराद तेरी रुशवाई का गिला नहीं ।
कागज की कलियाँ थी फूल खिला नहीं ।
"जय कुमार"25/05/15

पर्वत को चीरकर


पर्वत को चीरकर रास्ता बनाने का दम रखते है ।
जमाना बदल गया लोगों से ताल्लुक कम रखते है ।।
"जय कुमार"25/05/15

अंधों की नगरी में


अंधों की नगरी में , बैंरो का राज ।
घोड़े के नाम पे , गधे के सर ताज ।
"जय कुमार"24/05/15

मेहनत के हाथ


मेहनत के हाथ रहे , नयन से बहे खून ।
हाथ में कुदाली रही , तब रोटी दो जून ।
तब रोटी दो जून , जीवन यूँ बढ़ता रहा ।
राह में रहे शूल , फूलों का घेरा सहा ।।
"जय कुमार"24/05/15

महाराणा से वीर


महाराणा से वीर का गुणगान लिख दूँ ।
अपनी भारत माता का सम्मान लिख दूँ ।
भारत भूमि पर जन्म लिया हम सबने ,
दिल के हर हिस्से पे हिदुस्तान लिख दूँ ।।
"जय कुमार"23/05/15

नयन नीर


नयन नीर से भर गये ,,,देख जगत की रीत !
जीवन भर जो संग रहे ,,,,,गात बिदाई गीत !!
गात बिदाई गीत ,,,,,साथ मरघट तक जावे !
तीन दिवस के बाद , उन्ही की खाख उड़ावे !!
"जय कुमार"23/05/15

जिंदगी एक


जिंदगी एक खुली किताब बना ।
रोशनी बिखेरता आफताब बना ।
फिसलन न रहे तेरे दामन में यार ,
उलझे ना कोई वो हिसाब बना ।।
"जय कुमार"
20/05/15

हर पल जिनका


हर पल जिनका जिक्र करे दिल ,
जाने वो कहाँ पर खोये हुए है ।
हर आरजू में वो हर दुआ में वो ,
जाने किस कंधे पर रोये हुए है ।
मशरुफ है जमाने के रंगो में अब ,
जाने किन बाँहों में सोये हुए है ।
मस्त निगाही का भरम इस कदर ,
किन ख्वाबों को सँजोये हुए है ।।
"जय कुमार19/05/15

ख्वाब में तकदीर


ख्वाब में तकदीर जगाते क्यों हो ?
रेत को मुठ्रठी में दबाते क्यों हो ?
चलना तेरा काम है चलते जाना ,
पानी पर तस्वीर बनाते क्यों हो ?
"जय कुमार"17/05/15

मुहब्बत जीत जाये


मुहब्बत जीत जायेगी तुम जो साथ दो ।
रुत हँसेंगी शक की जंजीर जो काट दो ।
रुठकर क्या मिला तन्हाई के सिवा यार ,
फासले मिट जायेंगे बढ़कर जो हाथ दो ।।
"जय कुमार"15/05/15

मेरी बस्ती में


मेरी बस्ती में ना आया करो ,
यह ख्वाबों से सजाई गई है ।
जतन से सँभारा मैने तन को ,
हस्ती मिट्रटी में दबाई गई है ।
हाड़ माँस का पुतला बना हूँ ,
इंसाँ बना इज्जत बाढ़ाई गई है ।
चेहरे पर चमक चार दिन की ,
वक्त की चाल चलाई गई है ।
जिंदगी चंद पलों का खेल है ,
आयु की लगाम लगाई गई है ।
"जय कुमार"14/05/15

दोस्ती एक प्यारा


दोस्ती एक प्यारा अहसास होता है ।
क्या गम है जब दोस्त पास होता है ।
खून का रिश्ता नहीं भरोसे का रिश्ता ,
रिश्तों में रिश्ता बेहद खास होता है ।।
"जय कुमार"11/05/15
मैं तो एक मुसाफिर हूँ तेरा ,
जहाँ ले जायेगी चला जाऊँगा ।
जिंदगी तेरी नाव में बैठा हूँ , 
तू जब कहेगी उतर जाऊँगा ।।

11/5/15

ह्रदय की बात


ह्रदय की बात बता देते तुम ।
दिल के हालात दिखा देते तुम ।
ह्रदय के कोने में रहते है हम ,
जग के जंजाल भुला देते तुम ।
कलियो का मान रख लेते तो ,
कुछ फूलों को खिला देते तुम ।
फूलों की बस्ती में रहकर भी ,
एक पाषाण ही हिला देते तुम ।
अमर रहा है अमर रहेगा जब ,
शक की दीवार गिरा देते तुम ।
"जय कुमार"9/5/15

जख्मों पे बहार


जख्मों पे बहार आती रही ।
नींद आँखों से जाती रही ।।
यादों के कारवाँ बुलाते रहे ,
जिंदगी यूँ ही दर्द पाती रही ।
मुकम्मल मुकाम के लिए ,
मुसीबत लाख उठाती रही ।
जज्बा जलाते रहे चिराग ,
वो बेदर्द हवा बुजाती रही ।
तिनके तिनके से बना घर ,
जलजला से मिटाती रही ।
राह राह पे खार बोता रहा ,
जर्रे जर्रे फूल बिछाती रही ।
पके पत्ते साथ छोड़ा डाल ने ,
जिसे वो दूध पिलाती रही ।
"जय कुमार"6/5/15

विश्वास हिमालय


विश्वास हिमालय सा अटल हो ।
भुजाओं में फौलाद सा बल हो ।
चले चीर के पर्वत के सीने को ,
मन पवित्र पावन गंगाजल हो ।।
"जय कुमार"5/5/15

पसीने की रोटी


पसीने की रोटी में दर्द का बसेरा देखा ।
मुस्कराती जिन्दगी में तम घनेरा देखा ।
गम के बादल छायेंगे छाने दो मेरे यार ,
आफताप के साथ भी हमने अँधेरा देखा ।
आस से आसमाँ टिका भरोसा ना रहा ,
भयानक वन मृग ने शेरों का घेरा देखा ।
मुकम्मल इंसान पाक नियत से होता है ,
होश खो बैठा आईने में चेहरा मेरा देखा ।
रात काली काल का भय न करना तुम ,
आस कि किरण आसमाँ से सबेरा देखा ।
"जय कुमार"30/04/15

रोज ख्वाव


रोज ख्वाव में जो आते रहे ।
जिंदगी वही जुल्म ढाते रहे ।
टीस देते जो जुम्ले हर पल ,
गीतों में वही हम गाते रहे ।।
"जय कुमार"29/04/15

खुदा तेरा नूर


खुदा तेरा नूर अगर सब में समाया है ,
जिंदगियों में यूँ अँधेरा घनेरा न होता ।
रहम अगर बरसती रहनुमा की यारों ,
पसीने कि रोटी में दर्द का बसेरा न होता ।
"जय कुमार"29/04/15

दर्द भरा फसाना था ।



इक परिन्द्रे का दर्द भरा फसाना था ।
दरख्त की टहनियाँ इक ठिकाना था ।
तेज तूफाँ था बिजली संग बारिष भी ,
बच्चे थे छोटे घौंसला भी पुराना था ।।
सूखता था कंठ गीत गुनगुनाना था ।
पत्थरों बीच आसियाना बनाना था ।
कंधे झुक चुके वक्त की मार में यारों ,
जिम्मेदारियों का बोझ तो उठाना था ।।
कट चुके पंख घर पर ना खाना था ।
सैय्याद की नजर बेदर्द जमाना था ।
अपने कुल को बचाने के खातिर उसे ,
घनघोर तम दूर तलक उड़ जाना था ।।


"जय कुमार"29/04/15

रोज नये नये


रोज नये नये सवाल होते रहे ।
यूँ ही हर दिन बवाल होते रहे ।
दौलत के अमीर शहरों के इंसाँ ,
जज्वात ए दिल कंगाल होते रहे ।
करते रहे दुआ हम खैरियत कि ,
हमारे जज्वात हलाल होते रहे ।
सुलझने का नेक प्रयास करते थे ,
शक के अजीब जंजाल होते रहे ।
पढ़ने वाले तो फ़ेल होते देखें हैं 
बिन पढ़ें पास कमाल होते रहे ।
दुश्मन तो तरस खा छोड़ गऐ,
रखवाले मेरे ही दलाल होते रहे


"जय कुमार"29/04/15

तेरी वेवफाई का


तेरी वेवफाई का सितम दूर तलक झेलता रहा ।
मेरे साथ समय यूँ ही बेरहम खेल खेलता रहा ।
सजी महफिलों में मगरुर हो पैमाने झलकते रहे ,
खूबसूरत नजारों के बीच वो शख्स अकेला रहा ।
तस्वीर सीने से लगा सूरत दिल में बसाई रखी ,
दिल के जज्वातों को रेत पे हर वक्त उकेरता रहा ।
मंजूर ए मुहब्बत कि खातिर मगरुर जमाने में ,
कोई दीवाना फिर बुतों के सामने बोलता रहा ।
मुकम्मल जहां की चाह मगरुर दिल कि लेकर ,
लहू को अश्क बना जज्बे को यूँ बिखेरता रहा ।
बज्म में बैठकर हँसना बन गया था जिनका पैसा ,
जय बेदर्द जमाने में राज -ए- दिल खोलता रहा ।
"जय कुमार"28/4/15

मैदान - ए - जंग


मैदान - ए - जंग से मुहब्बत के अफसाने होते ।
वक्त पे पराये तो पराये अपने भी बेगाने होते ।
आशमाँ दूर नहीं दूरियों की ना होती हदें उनकी ,
मिट जाते इक वादे लिए प्रेम के जो दीवाने होते ।।
"जय कुमार"28/4/15

Sunday, 17 May 2015

दुआ खुदा से

दुआ खुदा से किसी को हालात सख्त ना देना ।
जिसको ना हो फिक्र तेरी उसको वक्त ना देना ।
चला जाये अगर वो साँस लेना हो मुश्किल ,
किसी को जिंदगी पर इतना हक ना देना ।।
"जय कुमार"27/04/15

प्रकृति के अति

प्रकृति के अति दोहन से , काँपत धरती आज ।
मानव के अति स्वार्थ से , बिगड़ रहे सब काज ।।
"जय कुमार"25/04/15

रिश्तों में अब

रिश्तों में अब व्यापार हो गया ।
परिवार अब बाजार हो गया ।
जब मिलते चार यार साथ में,
हुड़दंग अब त्यौहार हो गया ।
खून के अश्क बहाहे लिखने में ,
प्रेम का खत अखवार हो गया ।
ईमान कि कसमें खाकर इंसाँ ,
बिकने को अब तैयार हो गया ।
कुदरत की घुट रही साँसें अब ,
शहरों का ऐसा निखार हो गया ।
मुँह में मिसरी दिल में जहर है ,
आदमी का यह व्योहार हो गया ।
वासनाओं का खेल खेलते रोज ,
भैया लड़के को प्यार हो गया ।
दुनिया का अजीब चलन देख ,
जय आज फिर बीमार हो गया ।।
"जय कुमार"24/04/15

पत्थरों पर

पत्थरों पर उसका नाम न लिख 
सदियों का प्रेम बदनाम न लिख 

दिल का दर्द बयाँ करने के लिए 
शौक तेरा उसका जाम न लिख 

रब से पाया अदा कर दे उसको 
जिंदगी में अपनी हराम न लिख 

शब्दों को जोड़ता है जय नादान
दिल को  न लगे कलाम न लिख 

"जय कुमार"23/04/15

साथ हो तेरा

किसी राह में मेरा भी ,,, इक घर हो !
साथ हो तेरा खूबसूरत,,, सफर हो !!

मुकम्मल हो कैंसे ,,,,, दुनिया हमारी ,
परिन्द्रो को जब सैय्याद का डर हो !

जालिमों ने लूटा हो ,,, दाना पेट का ,
सिर पर हो आसमां,, कैंसे बसर हो !

जर्रे जर्रे में रब का ,,, नूर दिखता है ,
इंसां गर तेरी ,,,,,,,,,,,, पाक नजर हो !

खुदगर्जी की आग में झुलझता रहा ,
इस जहां में भी इक ,,,, प्रेम नगर हो !

भरोसा किस पे करें  ,खुदगर्ज जहां ,
राज छुपाये रखो,, राजदाँ अगर हो !

जय चल सके सुकूं से ईमान कि राह ,
जमाने में बता गर ,,,,,,कोई डगर हो !!

"जय कुमार"23/04/15

आपके हुस्न के

आपके हुस्न के चर्चे चारों ओर होते रहे ।
हम मुहब्बत करके गुमनामी में खोते रहे ।
हमदर्द हमराही जिंदगी के बनते मेरे जो ,
चेहरे पर तेरे सैंकड़ो मुस्कराते मुखोटे रहे ।
टूटकर बिखर गया भीषण आग दिल में ,
अश्क मेरे दामन को फिर भी भिगोते रहे ।
तुम रकीब की बाँहो में मुश्कराते थे जब ,
हम जलील होकर इस जमाने से रोते रहे ।
तुमने काँटों की राहें दिखाई थी जो हमको ,
उन्ही राहों में हम फूलो के बीज बोते रहे ।
मुसाफिर की राह खत्म कब बसेरा कैंसा ,
आफताब ने साथ छोड़ा वहीं पे सोते रहे ।
जय रोज की पराजय ना छेल सका यारों ,
दिल कि बस्ती अपनी खुद ही लुटाते रहे ।।
"जय कुमार"21/04/15

पापी पेट के

पापी पेट के खातिर पाप करते ,
जमाना गिरी नजरों से देखता है ।
दो निवाले न दे सका जो समाज ,
भरी सभाओं में बैठकर टोकता है ।
दीवाना जो घूमते मेरी गलियों में ,
भरे बाजार में मुझे ही रोकता है ।
राज को राज रहने दो राजदार हम ,
सारा राज हमारे कोठों पे खुलता है ।
बेशर्म कहते फिरते हमें जो लोग ,
दर पे हमारे इज्जत से वो मिलता है । ।
"जय कुमार"20/04/15

खो गई संवेदनाये

खो गई संवेदनाये मानवता के देश में ।
रो गई अवलाये सियासत के संदेश में ।
वागवान ने जब फूलों की अस्मत लूट ली ,
घर सुरक्षित न रहा आज के परिवेश में ।।
"जय कुमार"20/04/15

बैसाख आया

बैसाख आया
बरसात है लाया
गर्मी भूलके
प्रकृति रुष्ठ
काल परिवर्तन
टूटता चक्र

हरेक दिन
हर रात बदली
बदली हवा
बीज का जन्म
कृषि उपज कहाँ
मृत मौसम
"जय कुमार"18/04/15

कोई शिकवा

कोई शिकवा ना रहा कोई शिकायत न रही ।
मुहब्बत में जीने मरने की रवायत ना रही ।
फूल काँटों की तरह चुभने लगे आज यारों ,
काँटों की क्या कहे फूलों में नजाकत ना रही ।।
"जय कुमार"17/04/15

तेरी वेवफाई से

तेरी वेवफाई से गिला कैंसे करें मेरे यार ,
तुझसे ही महफिलों में मेरा नाम आता है ।
"जय कुमार"17/04/15

कुछ ना बोलो

कुछ ना बोलो तो सवाल करते है ।
कुछ जो बोलो तो बवाल करते है ।।
"जय कुमार"

बड़ा अजीब

बड़ा अजीब रिश्ता है उसका मेरा ,
आँखो में मेरा दिल पड़ लेता है वो ।
"जय कुमार"

कहीं पत्थरों

कहीं पत्थरों पर दूध बहते देखा ।
कहीं बच्चोँ को पानी से बिलखते देखा ।
पत्थरों को छप्पन भोग लगते रोज ,
कहीं माँ बाप को निवाले को तड़पते देखा ।।
"जय कुमार"17/04/15

बर्बाद हुए

बर्बाद हुए अपना मानने का हरजाना हुआ ।
मानते तुझे अपना दिल तो मनमाना हुआ ।।
"जय कुमार"17/04/15

चंद सवाल

चंद सवाल पैदा कर गये वो ।
फिर बवाल पैदा कर गये वो ।
लूटत रहे जिंदगी भर मुझको ,
एक कंगाल पैदा कर गये वो ।।
"जय कुमार"16/04/15

चंद सवालात थे

चंद सवालात थे ।
बिगड़े हालात थे ।
होठ न हिलने देगें ,
उनके जबाब थे ।।
"जय कुमार"16/04/15

बड़ा अजीब

बड़ा अजीब रिवाज देखा तेरा भी मेरे रब ,
प्रेम को रोते देखा बेमुरब्बत खुश रहते है ।
इस जमाने में पत्थरों का राज हो चला आज ,
बेईमान इज्जत ईमानदार जिल्लत सहते है ।
"जय कुमार"15/04/15

हमको जो

हमको जो दगा देते रहे ।
मेरी जफायें भुलाते रहे ।
लूटते रहे प्रेम में मुझको ,
उनसे वफा निभाते रहे ।।
रिश्ते दर बदर हो गये ।
प्रेम के पँछी फिर रो गये ।
खुशी के जो चार पल थे ,
गम के आगोश में खो गये ।।
"जय कुमार"15/04/15

खारों के साथ

खारों के साथ चलना सीख लिया हमने ।
मुश्किलों साथ रहना सीख लिया हमने ।
तूफां हो रवानी पे चाहे हो काल का वार ,
हिम्मत से आगे बढ़ना सीख लिया हमने ।।
तेज तूफान में कस्ती बढ़ानी होगी अब ।
भँवर के साथ जान लड़ानी होगी अब ।
पतवार टूटे चाहे छेद हो जाये कस्ती में ,
साहिल तक कस्ती पुँहुचानी होगी अब ।।
रेगिस्तान का ताप जला न पायेगा हमे ।
जलजला धरा का हिला न पायेगा हमें ।
हम मतवाले जिँदगी के हमको डर कहाँ ,
आकाश का रुधन रुला ना पायेगा हमें ।।
"जय कुमार15/04/15

मेरा जो सुकून

मेरा जो सुकून छीन लेता है ।
हर पल वो मुझे दर्द देता है ।
कातिल जो मेरे जज्वातों का ,
दिल उसे क्यों दुआ देता है ।।
"जय कुमार"14/04/15

दिल ऐ नादान

दिल ऐ नादान का रिश्ता अनजाना निकला ।
बेगाना ही हमारा जाना पहचाना निकला ।
हमे भरम था खुद पर काबू रख लेते हम ,
दिल का तराना हमारा , मनमाना निकला ।।
"जय कुमार"13/04/15

खुशी के गीत

खुशी के गीत गाकर मुस्कराते ,
दर्द दिल का तुम छुपाते क्यों हो ।
आसमाँ से रोशनी पाई हमने ,
धरती का कर्ज बताते क्यों हो ।
धूप छाँव में जिंदगी रहती तेरी ,
बुतों को मर्ज यूँ सुनाते क्यों हो ।
राज राज कब रहे जमाने में ,
लोगों को राजदाँ बनाते क्यों हो ।
पत्थरो से दिल हुए जमाने के ,
फूलों की कहानी सुनाते क्यों हो ।
रात हिज्र की तन्हाई का आलम ,
तमन्ना ए चिराग जलाते क्यों हो ।
मौत आयेगी स्वागत हो उसका ,
हसीन पल जय मिटाते क्यों हो ।
"जय कुमार"12/04/15

मुकम्मल

मुकम्मल मंजिल मिलती मुझको भी शायद यारो ,
जिक्र ए हिज्र रुह ए हिम्मत खत्म कर गया कोई ।

"जय कुमार"11/04/15

खुदगरजी

खुदगरजी का सारा रिश्ता नाता है ।
प्रेम इस जमाने में कौन निभाता है ।।
"जय कुमार"11/04/15

सुख- दुख

सुख- दुख के फूल काँटे ।
जीवन में हमने ही वाँटे ।
खुदका मन देख सके न ,
डहराये जग झूठे साँचे ।
मृग तृष्णा न खत्म हुई ,
मन वासनाओं में नाँचे ।
जग के लेख वाँचत रहे ,
लिखा अपना ना वाँचें ।
"जय कुमार"11/04/15

रिश्तों के भँवर

रिश्तों के भँवर में फँसते रहे हम।
भावों कि चक्की में पिस्ते रहे हम ।
बेशर्म बददिमाग कीमत लगाते ,
बेमोल बाजार में बिकते रहे हम ।
प्रेम की अगन दिल में दबी रही ,
ठंडे मौसमों में भी जलते रहे हम ।
तूफान अपनी जवानी दिखाता रहा
चिराग जिन्दगी के जलाते रहे हम ।
"जय कुमार" ,11/04/15

आग जल उठी

आग जल उठी अंगारे बिखर रहे ।
पानी नसीब न प्यासे अधर रहे ।
लुट रहा भावनाओं का काफिला ,
अँधेरी रात लुटेरों पर नजर रहे ।
बीत चुकी रात राह देखते रहते ,
रोज के राहगीर बता किधर रहे ।
टूट चुकी मोतिओं की माल फिरसे ,
रेशम के धागों के कहाँ बसर रहे ।
रुह तक लूट चुके वो मेरी प्रेम में ,
मिटा आस्तित्व कैसे सबर रहे ।
जमाने से मिलते रहे हम रोज रोज ,
अपने आपसे मिले हम खबर रहे ।
नये जमाने नये खून कि ये दास्ताँ ,
बुजुर्गो के कहाँ जय अब असर रहे ।।
"जय कुमार"10/4/15

हर किसी के

हर किसी के काम आये ,
जीवन हो जायेगा जल ।
मन मानव हो जाये तेरा ,
पर्वत अम्बर सा अटल ।
वर्तमान में जीना सीखे ,
भूल जाये अपना कल ।
काल राह ना रोक सके ,
भुजा में हो इतना बल ।
भूखा कोई सो ना पाये ,
बनाले अपने को सबल ।
खुशियों से महका ले तू ,
जीवन का हर एक पल ।
जीवन पथ पे बढ़ जाना ,
गाथाओं में गायेंगा कल ।

"जय कुमार"9/4/15

किसी मंदिर

किसी मंदिर किसी मस्जिद के दर बैठा ।
कभी इसके तो कभी उसके घर बैठा ।
देख सका ना ह्रदय , मैं स्वंय अपना ही ,
जिसमें ईश्वर अल्लाह जिंदगी भर बैठा ।।
"जय कुमार"9/4/15

पत्थर का दिल

पत्थर का दिल , रेत का घर नही है ।
जिंदगी खारों में , काल का डर नहीं है ।
नियत निमित मंजिल के बनाये हुए ,
चलना मुकद्दर , छोटा सफर नहीं है । ।
"जय कुमार"9/4/15

जीवन काँटो

जीवन काँटो का वसेरा होगा ।
अगर अब भी न सबेरा होगा ।
जीत ले खुदको प्रकाश से मिल ,
वरना चारों तरफ अँधेरा होगा ।।
"जय कुमार"6/4/15
काल की गोद मैं बैठ , पल पल लुटता जाय ।
जीवन हर पल छिन रहा , मानव तू मुस्कराय ।।
"जय कुमार"6/4/15

प्रकृति का खेल

प्रकृति का खेल निराला होगा ।
समुंदर ने अमृत निकाला होगा ।
मन मानव का मैला होता जाऐ ,
जलज का जल भी विषैला होगा ।।
"जय कुमार"5/4/15

प्रेम नगरिया

प्रेम नगरिया लुट रही , लुट गये रिश्ते आज ।
वासना के जाल प्रबल , खुदगरजी के काज ।।
"जय कुमार"

बेटियाँ तो

बेटियाँ तो कोयल के बोल सी है ।
बेटियाँ तो मिश्री के घोल सी है ।
बेटियों को बेटो से कम मत आँकना ,
बेटियाँ तो पारस पत्थर के मोल सी है ।।
"जय कुमार"4/4/15

फरेब की बिसात

फरेब की बिसात तुम बिछाते क्यों हो ?
फितरत मासूमियत से छिपाते क्यों हो ?
हर पल साथ रहे साथ रहेगे हम तुम ,
जुनून ऐ मुहब्बत तुम दिखाते क्यों हो ?
रोज - रोज ही अँधेरा देखते चारो ओर ,
रोशनी की किरणे तुम बुलाते क्यों हो ?
कद्र नही की दर्द ऐ दिल कि कभी यार ,
मुहब्बत के कद्रदान मुझे बनाते क्यों हो ?
दामन उस बेमुरब्बत यार ने छुटाया था ,
अश्क के दरिया तुम अब बहाते क्यों हो ?
वागवान ने लूटा था कलियों का वसेरा ,
सूखे हुए फूलों को अब खिलाते क्यों हो ?
सारे सपने धराशाही हुए प्यार में तेरे ,
मेरे सपनों में आकर तुम रुलाते क्यों हो ?
बिछड़े जमाने हुए चेहरे भी धूमिल हुए ,
बिछड़े हुए दर्दो को जय मिलाते क्यों हो ?
"जय कुमार"4/4/15

चारों तरफ शहर

चारों तरफ शहर में अँधेरा छाया है ।
बेकसूर कोई गुनहगार ठहराया है ।
मर्ज ए दर्द सजे होंगे फिर बस्ती में ,
किसी मासूम का जनाजा उठाया है ।।
"जय कुमार"3/4/15

मेरे सपनों

मेरे सपनों का शहर धराशाही हुआ ।
मेरे अपनों का असर धराशाही हुआ ।।
"जय कुमार"3/04/15
आज न रोने देंगे तुमको ।
आज न खोने देंगे तुमको ।
जीवन भर ना जाग सके ,
आज न सोने देंगे तुमको ।।
"जय कुमार"2/04/15

मन मोहन मन

मन मोहन मन में बसे , मन के बने मनमीत ।
बिखरा विष इस तन से , अमृत सी जा प्रीत ।
अमृत सी जा प्रीत , गीत प्रेम के नित गावे ।
पाकर हरि के पाँव , छाँव हियरे में पावे ।।
"जय कुमार"2/04/15
सभी को मुकम्मल जहां कहाँ मिलता है ।
हर एक वगिया में फूल कहाँ खिलता है ।
मायने बदल गये जमाने के आज कल ,
भाग्य सिक्का हर वार कहाँ चलता है ।।
"जय कुमार"1/04/15

काल की

काल की विकराल चाल , एक समान ना होय ।
सूर्य की धूप छाँव को , बाँध सके ना कोय ।।
"जय कुमार"1/04/15

आफत मत

आफत मत मोल लेना ।
शब्द अपने तौल लेना ।
शब्द फूल शब्द काँटे है ,
शब्द मीठे बोल लेना ।।
"जय कुमार"1/04/15

रंग रुप

रंग रुप निहारत रहे , बजते खाली गाल ।
मैं मैं का ढोल पीटत , बैठ काल की डाल ।।
"जय कुमार"1/4/15

समुन्दर रेत के

समुन्दर रेत के कस्ती ले चला था ।
दिल न थे जिनके उनसे गिला था ।
नजर नहीं आता रोशनी पास थी ,
अँधेरों के उस उजाले से मिला था ।।
"जय कुमार"31/03/15

पौंछ सकूँ आँसू

पौंछ सकूँ आँसू किसी के एहसान कर
मिल सकूँ अपने आप से पहचान कर
आके ना जाये कभी दिल से दिलवर ,
मन में ही मूरत वसे ऐसा मेहमान कर
"जय कुमार"31/03/15