Thursday, 25 November 2021

जिंदगी  क्या  कटी  पतंग  बनकर रह गई 
सांसों  की  गली  क्यों तंग बनकर रह गई
जो  वादे  किये  थे  खुदसे   नाकाफी  रहे
हर कदम क्या मंजिल ज॔ग बनकर रह गई 

"जय कुमार "25/11/21

Tuesday, 16 November 2021

उनको  हमसे कोई अब  गिला नहीं रहा 
मुहब्बत  का  कोई अब सिला नहीं रहा

ऐसे  गुजरते  हैं  अनजान  बनकर  रोज
क्या मेरी  सांसों में कभी  घुला नहीं  रहा

जिस्म दिल का क्या, रूह में बसा रखा है
चाहत  के  बाग में  बबूल  उगा नहीं रहा 

पागल कहते हैं वो महफिल में आजकल 
क्या दूध में जहर तू अब  मिला नहीं रहा

आज ही तो  कफन के  साये  में आया हूं
आवाज तो दे, सोता है  जय तू जगा नहीं 

"जय कुमार "16/11/21