Wednesday, 31 December 2014

झूठ को सच

झूठ को सच लिखना आसान हो गया ।
कुकर्म को कर्म लिखना आसान हो गया ।
तम को प्रकाश का भय ना रहा शायद ,
सांझ को सुबो लिखना आसान हो गया ।।
"जय कुमार"30/12/14

गीतों की माला

गीतों की माला ले आया मैं ।
प्रेम का प्याला ले आया मैं ।
भेद भाव को छोड़ छाड़कर ,
मधुशाला हाला ले आया मैं ।
जनतंत्र के पवित्र पंथ पर ।
भारत माँ के श्री चरणों में ।
भाषा , रंग , जाति भुलाकर ,
एकता की माला ले आया मैं ।।
जीवन आग जला ना पाई ।
खुदकी हस्ती भुला न पाई ।
सब संघर्षो से निकलकर के ,
दीपक जोत जला लाया मैं ।।
मुझको मुझसे मिलना था ।
पर पीड़ा को समझना था ।
मन की प्यास बुजाकर के ,
जल ज्वाला बुजा आया मैं ।।
गहरी परतों को खोजा था ।
गरतों में खुद को खोजा था ।
मैं मैं में बसने के लिए बस ,
ठाट बाट को भुला आया मैं ।।
गीतों की माला ले आया मैं ।
प्रेम का प्याला ले आया मैं ।।
भेद भाव को छोड़ छाड़कर ,
मधुशाला हाला ले आया मैं ।
"जय कुमार"30/12/14

चंद रुपयोँ

चंद रुपयों में बिकते ईमान को नमन !!
ईमान की कुर्सी पर बेईमान को नमन !
शतरंज की विसात पर बैठे है परिवार ,
नेता पुत्र नेता इस ,,,वरदान को नमन !!

"जय कुमार"29/12/14

खड़े चाहे

खड़े चाहे पहाड़ हो ।
रास्ते भी भिहाड़ हो ।
फिर राह न बदल तू ,
सिंह सी दहाड़ हो । ।
"जय कुमार"29/12/14

जल जाये

जल जाये वो बस्ती नहीं ।
मिट जाये वो हस्ती नहीं ।
चाहे तूफान हो जवानी पे ,
डूब जाये वो कस्ती नहीं ।।
"जय कुमार"29/12/14

हर खुशी

हर खुशी को जिंदगी से बिछड़ते देखा ।
सुबह को आज शाम से मिलते देखा ।
आग जलाती रही लकड़ियों को रोज ,
रुख बदला बर्फ से दूध को जलते देखा । ।
"जय कुमार"29/12/14

मुद्दतों बाद

मुद्दतों बाद मुलाकात करने आये वो ।
वेवक्त खुद खुरापात करने आये वो ।
उन अदभरे जख्मों की तड़प देखी तो ,
जिंदगी की वकालात करने आये वो ।।
"जय कुमार"29/12/14

पिटे को

पिटे को पीटते है सब ।
मिटे को मिटाते है सब ।
खड़ा हो जा अपने बल ,
गिरे को गिराते है सब ।।
लुटे को लूटता देखा है ।
छूटे को छोड़ते देखा है ।
बाजुओं मे रखना दम  ,
टूटे को तोड़ते  देखा है ।।
उँगते का नमन करते है ।
डूबते का दमन करते है ।
जिस राह होता हो स्वार्थ ,
उस रास्ते गमन करते है ।।
"जय कुमार"22/12/14

मुश्किल से

मुश्किल से मेरे अब हालात संभले है ।
शिद्दत से चाहा जिसे वेहया निकले है ।
जिल्लत से जिंदगी का अहसास भूले ,
वेरहम जिंदगी ने अपने रंग बदले है ।।
"जय कुमार"22/12/14

क्या बखान

क्या बखान करें अरमानों का 
हर तरफ मंजर है बीरानों का ।
अमन चैन सिमट रहा कोने में ,
राज बड़ रहा अब शैतानों का ।।
नाँच देख रहे रोज हैवानों का ।
क्या सुनाये रुठती मुस्कानों का ।
खून के प्यासे अब इलाज क्या ?
भटकते मजहबी परवानों का ।।
"जय कुमार"19/12/14

उन्माद है ।

यह कैंसा उन्माद है ।
शैताँ दिल आजाद है ।
मासूमों के कत्ल का ,
यह कैँसा जिहाद है ।।
"जय कुमार"17/12/14

मासूमों का

मासूमों का कत्ल कालक पोत रहे हो क्यों ।
मजहब का नाम ले दफन इंसानी जज्वात ,
ज्वालामुखी जला गला गौंठ रहे हो क्यों ।
एहसास एक दिल का होता इंसानों का ,
लकीर पार इस पार दिल तोड़ रहे हो क्यों ।
मेरा दर्द तेरा दर्द दर्द का ना कोई मजहब ,
लकीरों से धरा बाँटकर दर्द बाँट रहे हो क्यों ।
खून के प्यासे हो जो भूखे हो चीखों के ,
इन दरिंद्रगो से हमदर्दी जोड़ रहे हो क्यों ।
एक पटल पर खड़े हो जाये हम दोनों ,
नस्लो को अब इस राह मोड़ रहे हो क्यो ।

"जय कुमार"17/12/14
सड़क किनारे पड़ा वो काँपता रहा ।
आता जाता हर शख्स झाँकता रहा ।
सुबह - सुबह शोरगुल काफी हुआ ,
रात भर उसपे मौसम नाँचता रहा ।।
"जय कुमार"
फिजा का बदला रंग सा क्योँ है ?
इंसानो का दिल तंग सा क्यों है ?
क्या कोई वेवक्त सो गया राह में ?
शहर का हर चेहरा दंग सा क्योँ है ?
"जय कुमार"

खलिश

खलिश दिल की दवाये हुए है ।
जख्म से खुशियाँ चुराये हुए है ।
फूलों के अर्क नसीब ना मुझको ,
खुशबु पसीने से नहाये हुए है ।।


मिट्टी की महक बदन में समाई ।
मेहनत अपनी चमन में दिखाई ।
जिल्लत से नफरत हुई मुझको ,
हस्ती को हमने अगन में दबाई ।।
"जय कुमार"13/12/14

Monday, 15 December 2014

अदब

इतने अदब से पेश आया जमाना !
बैचेनी का सबब , जख्म पूँछ गया !!

"जय कुमार"
नींद पिता की बेमानी हो गई ।
फर्ज की कठिन कहानी हो गई ।
लोभ के जाल समाज की नजरें ,
बिटिया उसकी सयानी हो गई ।।
"जय कुमार"
एक पथिक हू मैं जीवन का ।
बैठा अंगारों में ठन्डे मन का ।
राह खोजता अपनी मैं खुद ,
शूरवीर हूँ मैं अपने रण का ।।
एक पथिक हूँ मैं जीवन का . .
संघर्ष की दीवारों में रहता ।
सुख दुख हँसकर मैं सहता ।
एक घर मेरा कहते संसार ,
अभिमान नही मुझे धन का ।।
एक पथिक हूँ मैं जीवन का . .
काल की गति समझा करता ।
करता जो बो यहीं पे भरता ।
छुपाना कुछ न आता मुझको ,
अपने मन मंदिर पावन का ।।
एक पथिक हूँ में जीवन का . . .
"जय कुमार"24/11/14
मौन की भाषा मगरुर हो नहीं सकती ।
दृढ़ विश्वास हो तो हार हो नहीं सकती ।
जीतने के लिए हराना जरुरी नहीं यारो ,
हराकर किसी की जीत हो नहीं सकती । ।
"जय कुमार"

यह तू

यह तू कैंसा गुरुर करता है ।
बुझने वाले नूर पे मरता है ।
परख पारखी ना रही तेरी ,
पत्थर को कोहिनूर कहता है ।
मंजिल तेरी एक भ्रम ही है ,
सोच किस राह पे चलता है ।
राज दफन किये है दिल में,
खुली किताब क्यों बनता है ।।
"जय कुमार"21/11/14

काये भैया काये

काये भैया काये रो रये ।
मीठी बातें सुनके ,
जमाने सो रये . . . . . !
काये भैया काये रो रये ।।
देखो करजुग को हाल ।
बेईमान तो मालामाल ।
उजारे को अँधेरो डरात ।
जिंदा भूखो , मुर्दा खात ।
अँधियारी रातों में अब ,
भुनसारे हो रये . . . . . !
ऐसे रो रये . . . !
काये भैया काये रो रये ।
मीठी बातें सुनके ,
जमाने सो रये . . . !
"जय कुमार"22/11/14

नदियों की तरह

नदियों की तरह तुझे बढ़ना होगा ।
फूलों की तरह तुझे खिलना होगा ।
फूल नसीब हो चाहे काँटे राह में ,
अपने पैरो पर तुझे चलना होगा ।
दौर खिलाफ होता या मन हमारा ,
इन इल्जामोँ को तो बदलना होगा ।
जाल बिछाया खुदने खुदको जो ,
तंग रास्तों से अब निकलना होगा ।
तारे स्थिति बदलते अपनी रोज ,
साथ वक्त के तुझे बदलना होगा ।
समय की आँधी में उड़ गये ख्वाव ,
बिसरे ख्वावों को भी मचलना होगा ।
"जय कुमार"26/11/14

Thursday, 20 November 2014

जमाने ने क्या

जमाने ने क्या कहा ये गिला ना रहा ।
मेरी जिंदगी में तू कभी वला ना रहा ।
क्या माँगु और तुझसे अब मेरे दोस्त ,
मेरी वफाओं का जब सिला ना रहा ।।
"जय कुमार"`19/11/14

आँसु आँखो

आँसु आँखो से ना बहने दो ।
जज्वात दिल में ही बढ़ने दो ।
आये न बाहर जमाना बेदर्द
दर्द को सीने में ही रहने दो ।
"जय कुमार"19/11/14

माहौल का

माहौल का ये असर क्यों है ।
हर रिश्ता दर बदर क्यों है ।
किये जो सौदे नाकाफी रहे ,
जिन्दगी आज भँवर क्यों है ।
"जय कुमार"17/11/14

चलने को

चलने को कई डगर है ।
रोकता वो इक मगर है ।
रखो ख्याल जज्वातों का ,
जिंदगी खूबसूरत सफर है ।।
अच्छा बुरा तेरी नजर है ।
दिल तेरा प्यारा नगर है ।
खड़ा हो बलपर तू अपने
चलना चाहता अगर है । ।
"जय कुमार"16/11/14

चलते चलते

चलते चलते दस मिले , खड़े खड़े में पाँच ।
बैठे बैठे एक मिला , पड़े पड़े ना नाँच ।।
पड़े पड़े ना नाँच , बढ़ने से साँस चलती ।
बैठे से कुछ नाय , चलने से मंजिल मिलती ।।
"जय कुमार"9/11/14

खाके मुफ्त को

खाके मुफ्त को वे माल , फूल गये है गाल ।
उखाड़े बाल की खाल , बदल गई है चाल ।।
बदल गई है चाल , पेट बाहर को आवे ।
मुख पे कटू मुस्कान , देश के नेता कहावे ।।
"जय कुमार"9/11/14

हर पल के

हर पल के साथ आईना ,
चेहरे बदलता रहा ।
साँस चलती रही काल ,
उम्र निगलता रहा ।
रिश्ते नाते समाज के बँध
बाँधते रहे मुझको ,
कदम बड़े आगे भ्रम था ,
मैं पीछे फिसलता रहा ।।

"जय कुमार"8/11/14

"हाइकू"


अंत आरंभ
चलता काल चक्र
आरंभ अंत
मृग सी तृष्णा
जीवन पर्यँत हो
जीवन जिया
काम लोभ में
घुटता रहा जीव
माया मद में
सृष्टि का अंग
कार्य किया प्रकृति
जीव उत्पत्ति
"जय कुमार"8/11/14

कठोर पत्थर

कठोर पत्थर भी बिखरते है ।
काले बादल भी गरजते है ।
गम के साये कितने हो गहरे ,
काली रात में तारे चमकते है ।
"जय कुमार"7/11/14

गिरफ्त ख्यालों

गिरफ्त ख्यालों को करले ऐसा प्यार मत करना ।
समझे न जज्वात तेरे उससे इजहार मत करना ।
हिज्र की आग देकर गया ,रहता रकीब के साथ ,
उस बेमुरब्बत यार का अब इंतजार  मत करना ।

"जय कुमार"

गम के

गम के चंगुल कल थे ।
दर्द के सैकड़ो बल थे ।
जलकर राख हुए जो ,
खुशी के चार पल थे ।
"जय कुमार"6/11/14

बूड़े बरगद

बूड़े बरगद की छाँव से वो ।
शहर की भीड़ में गाँव से वो ।
उँगली पकड़ चलाया जिसने ,
तेज लहरों के बीच नाव से वो ।।

"जय कुमार"6/11/14

किसी से हाथ

किसी से हाथ मिलाकर तो देख ।
किसी रोते को हँसाकर तो देख ।
कितना सुकून मिलता रुह को तेरी ,
किसी को गले लगाकर तो देख ।।
"जय कुमार"6/11/14

"हाइकू"


चला जायेगा
पछताना ही होगा
खेल जिंदगी
खिला है फूल
खुशबू है बिखरी
कुछ समय
काँटो का जाल
वासनाओ का खेल
जीवन खत्म
सूर्य सा ताप
ज्वालामुखी का लावा
नाम जवानी
"जय कुमार"6/11/14

Wednesday, 5 November 2014

बेदर्द ज़माने में

बेदर्द  ज़माने में मेरा कैंसे बसर होगा।
राह निशान न बाँकी कैसे सफर होगा।
उजड़ गया घरौंदा आँधियो के दौर में  ,
ए खुदा कहीं तो तेरा भी इक घर होगा ।।

"जय कुमार "  ६/११/१४




झुकना ना जानते

झुकना ना जानते जो हमसे कहते झुकना सीखो ।
हाथ न जोड़े कभी जिनने कहते वो नमना सीखो ।
दूसरे को बदल बाद पहले खुद को बदल यार ,
अनपढ़ शिक्षक है कहते बच्चों से पड़ना सीखो ।।
"जय कुमार"5/11/14

गमों के हवाले

गमों के हवाले ,,,,,,सौंप गया वो !
पीठ पर छुरा,,,,,,,, खौंप गया वो !
बहता रहा आग के ,,, दरिया में ,
मेरी रुह का गला घौंट गया वो !!
"जय कुमार"5/11/14

गमों के हवाले

गमों के हवाले क्यों सौंपते हो ।
छुरा पीठ पर क्योँ खौंपते हो ।
रुलाकर अरसे बाद आकर अब ,
मेरे आँसुओं को क्यों पौंछते हो ।
"जय कुमार"5/ 11 /14

सीख लेकर

सीख लेकर इतिहास से वर्तमान सुधार ले ।
बेसकीमती विचार हम पूर्वजो से उधार ले ।
मजहब भाषा रंग रुप , जाति बंधन तोड़के ,
समाज हमारा उज्जवल हो ऐंसा आधार ले ।।
"जय कुमार"

वक्त की

वक्त की धार पे सिमटी ,
नुमांदगी पे घमंड कैंसा ।
थोड़े से लम्हों में सिमटी ,
बंदगी पर घमंड कैंसा ।
सिकंदर गया राम कृष्ण
महावीर भी यहाँ ना रहे ,
चंद साँसों में सिमटती ,
जिंदगी पर घमंड कैँसा ।।

"जय कुमार"4/11/14

जिंदगी के रस्म

जिंदगी के रस्म रिवाज निभाते चले ।
मिलके प्यार के गीत गुनगुनाते चले ।
आफताब था शबाब पे मंजिल थी दूर ,
मिला जो राह में नीर पिलाते चले ।।
"जय कुमार"4/11/14

अक्सर तस्वीर

अक्सर तस्वीर में हम खुदको खोजते रहे ।
कोरे कागज के खत हम तुझको भेजते रहे ।
जज्वात वयाँ ना कर पाये मुद्दतोँ बाद भी ,
कदमों के तेरे निशान अब तक नापते रहे ।।
"जय कुमार"4/11/14

हर पत्थर खुदा

हर पत्थर खुदा हो यह जरुरी नहीं ।
हर खुदा पत्थर हो यह जरुरी नहीं ।
बेशक तू उसे चाहता है टूटकर यार ,
वो तुझे चाहती हो यह जरुरी नहीं ।।
"जय कुमार"3/11/14

"हाइकू"


बाल खेलता
जवानी सोती रही
रोया बुढ़ापा
लाया जो गया
पाया जो था खो गया
दीवाना रोया
आज की कल
मुलाकात करते
निकला वक्त
मलाल कैंसा
खयाल ही रहा था
सत्य से परे
रब को ढ़ूँडा
जग में विचरण
मन की वस्तु
गगन धरा
मध्य जीवन चला
अनन्त काल
"जय कुमार"3/11/14

हिना का

हिना का रंग सा ।
धतूरे की भंग सा ।
जुनून ए इश्क है ,
मैदान ए जंग सा ।।
"जय कुमार"2/11/14

हकीकत

हकीकत बता दे ।
पर्दा अब हटा दे ।
दिल की दौलत ,
रखने की रजा दे ।।
प्रेम अब जता दे ।
दर्द अब छुपा दे ।
खता क्या हो गई ,
दिल को बता दे ।।
ह्रदय में जगा दे ।
मुश्किल भगा दे ।
सदियों के दर्द है ,
राज वो बता दे ।।
प्यार से मिला दे ।
फूल इक खिला दे ।
दर्द ए मुहब्बत का ,
कुछ तो सिला दे । ।
"जय कुमार"2/11/14

जमाना दौड़ता

जमाना दौड़ता मैं झपटता अकेला ।
दौर निकल गये मैं अटकता अकेला ।
हिज्र और तन्हाई ने दोस्ती करली ,
तुझ से मिलने मैं तड़पता अकेला ।।
"जय कुमार"1/11/14

दिल का

दिल का अरमान वही था ।
दिल का मेहमान वही था ।
कोई न समझा उसके सिवा ,
दिल का कद्रदान वही था । ।
"जय कुमार"1/11/14

मगरुर बनके

मगरुर बनके रोये थे ।
इंसान बनके सोये थे ।
काँटने मिलता वही है ,
जिसके बीज बोये थे ।।
"जय कुमार" 1/11/14

"हाइकू "

सजके चला
शहर की गली में
जाने के बाद
नहाया आज
सुगंदित जल में
प्यास न बाँकी
चला हवा में
सर पर बैठाया
साँस न बाँकी
आग से मिला
प्रकृति का आगोश
बिखर गया
आरम्भ यही
छलाबा रहा सदा
अंत था यही
"जय कुमार "1/11/14

Friday, 31 October 2014

हाइकू "

सजके चला
शहर की गलि में   
जाने के बाद

नहाया आज
सुगंदित जल में
प्यास न बाकी

चला हवा में
सर पर बैठाया
साँस न बाँकी

आग से मिला
प्रकृति के आगोश
बिखर गया

आरम्भ यही
छलाबा रहा सदा 
अंत था यही  

"जय कुमार "1/11/14

खुद को

खुद को जीता बंदगी ने याद किया ।
जीते जमाने पसंदगी ने याद किया ।
जीतकर भी रोते देखे हारे भी हँसे ,
दिल को जीता जिंदगी ने याद किया ।
"जय कुमार"29/10/14

कोई श्रृँगार

कोई श्रृँगार लिखता है ।
कोइ अँगार लिखता है ।
जमाना कहता है मुझसे
तू तेरा प्यार लिखता है ।।
किसी को रब दिखता है ।
किसी को नभ दिखता है ।
हम अब कैँसे कहे यारो ,
मुझे तो जग दिखता है ।।
किसी को काम दिखता है ।
किसी को जाम दिखता है ।
जानता ये जमाना यारो ,
मुझे तेरा नाम दिखता है ।।
किसी को राज दिखता है ।
किसी को साज दिखता है ।
सब जान लो मेरे यारो ,
मुझे बस आज दिखता है ।।
कोई खोता नजर आया ।
कोई रोता नजर आया ।
हालात हो जाये चाहे जैसे ,
मैं तो गाता नजर आया ।।
किसी का मीत लिखता है ।
किसी का गीत लिखता है ।
कलम उठाता जय यारो ,
किसी की प्रीत लिखता है ।
"जय कुमार"29/10/14

"हाइकू"


ठंडी आहट
शरमाई हो धूप
बदली रुत
अंबर साफ
तारे चमक उठे
दीपक जले
परिवर्तन
खुशहाल जिंदगी
गहरा राज
रवानी होगी
शहनाई बजेगी
सजेगी धरा
धरती पर
बीज नया डलेगा
नया जीवन
"जय कुमार"29/10/14

राम नाम

राम नाम की लूट में , भरोसा लूट जात ।
भावना भूख से मरे , लूटन वारे खात ।।
"जय कुमार"29/10/14

रुसवाई मुझको

रुसवाई मुझको लूटती चली गई ।
तकदीर हमारी फूटती चली गई ।
भरम के हाथ निकले न पैर यारो ,
उम्मीद की साँस टूटती चली गई ।।
"जय कुमार"29/10/14

उसके दामन

उसके दामन को लहुलुहान किया ,
मेरे दामन पर भी दाग लगे होगे ।
सोया नहीं इबादत की रात थी ,
सोये खुदा शायद अब जगे होगे ।
गया जो आया ना लौटकर कभी ,
सच फरमाया जन्नत में मजे होगे ।
वेवक्त सोया कफन नसीब नहीं ,
मुफलिसी के मर्ज फिर सजे होगे ।
तूफान आया उड़ गई तेरी हस्ती ,
उँगली उठाने वाले भी सगे होगे ।
अँधेरों में रहा शहनाई सुन अपनी ,
सोचता गैर के घर बाजे बजे होगे ।
"जय कुमार"28/10/14

साँस मुश्किल

साँस मुश्किल से चलती रही ।
ख्वावों में आश मचलती रही ।
ये तो बदनसीबी थी खुशी की ,
गम के साये में जो पलती रही ।।
"जय कुमार"27/10/14

कलियों को

कलियों को मरोड़कर मिला क्या ?
दिल के स्पंदन तोड़कर मिला क्या ?
तमन्नाओं ने कफन पहन ही लिया ,
चंद साँसों को छोड़कर मिला क्या ?
"जय कुमार"26/10/14

जीते जी

जीते जी भोजन नहीं , बाद मृत्यु के भोज ।
अहंकार के दामन में , जीवन को ना खोज ।।
"जय कुमार"26/10/14

अच्छाई

अच्छाई को वंदन है ।
बुराई का खण्डन है ।
जिसका मन सच हो ,
उसका मन चंदन है ।।
"जय कुमार"26/10/14

"हाइकू"


जुदा हो गये
मिलेंगे एक दिन
फलक पार
जल जा अहं
जीवन की आग में
यात्रा अनन्त
पाया जो खोया
नियम प्रकृति का
रहा अटल
ना जटिलता
विवेकहीन जीव
जटिल मन
"जय कुमार" 25/10/14

कैंसे कहूँ

कैंसे कहूँ की दगा है ।
मेरा कातिल सगा है ।
मुँह खोला जो मैंने ,
बफा पे दाग लगा है ।
"जय कुमार"24/10/14

ये मत पूँछो

ये मत पूँछो की घाव कहाँ लगे है ।
दिल की गहराई के वो दर्द जगे है ।
मारने वाले भी यहाँ मेरे सगे है ।
जनाजा ले जाने वाले भी सगे है ।
"जय कुमार"24/10/14

लक्ष्मी

लक्ष्मी लक्ष्मी सब कहे , भूल गये सब राम ।
दीपावली के पर्व पर , सबके सब कुछ दाम ।।
"जय कुमार" 22/10/14

Wednesday, 22 October 2014

"दोहा"

स्वदेशी को प्रचार करे , लात चाइना माल ।
जय अज्ञानी ना समझो , राजनीति को जाल ।।
"जय कुमार"21/10/14

"दोहा"


राम चरण में बैठ के , राम राम मैं गात ।
राम भजे सो राम को , कोई न पूँछे जात ।।
"जय कुमार"21/10/14

"दोहा"


दीपावली के पर्व पर ,जलमग दीप हजार । 
एक दीप दिल में जले , हो जाये उजयार । ।
"जय कुमार"21/10/14

फिजा का बदला

फिजा का बदला रंग सा क्योँ है ?
इंसानो का दिल तंग सा क्यों है ?
क्या कोई वेवक्त सो गया राहों में ,
शहर का हर चेहरा दंग सा क्योँ है ?
"जय कुमार"21/10/14

"दोहा"


निकल पड़े हो सफर पर , अब पीछे ना देख ।
पिछली को तो छोड़ दे , अब आगे की लेख ।।
"जय कुमार"21/10/14

माला जपत

माला जपत साल गये , लेत राम के नाम ।
अहम भूल के देख लो , मन में आतम राम ।।
"जय कुमार"
.

इस दीपावली


Add caption



















 
इस दीपावली इक चलन चलाया जाये ।
कुटिया में किसी के दीपक जलाया जाये ।।
मुफलिसी के मारे समाज से है उप्रेक्षित , 
प्यार से मजलूमों को गले लगाया जाये ।
जमाने ने जिसे कीचड़ कह ठुकरा दिया ,
इस कीचड़ में एक कमल खिलाया जाये ।
चेहरे की झुर्रियाँ गहरी हो गई अब यारो ,
बिछड़ी हुई उन खुशियों से मिलाया जाये ।
सदियों से जाग रहे जो सपनो से मिलने ,
ख्वावो को हकीकत करके मिलाया जाये ।
तंग दिल कब तक रहेंगे हम दुनिया में ,
दिलों की दीवारों को अब हटाया जाये ।
टूटे दिल रो भी ना पाये एक अरसे से ,
रख हाथ उनके कँधों पर रुलाया जाये ।
तेरे मेरे अक्स में फर्क ना किया रब ने ,
भेद भाव की मीनारों को गिराया जाये ।
काँटों की सौबत में काँटे आये है हिस्से ,
महकते फूलों से अब घर सजाया जाये ।
नफरत की आग बहुत जल चुकी यारो ,
वक्त कह रहा प्रेम का गीत गाया जाये ।
"जय कुमार"20/10/14

अँधेरा

अँधेरा बड़ता रहा ।
उजाला लड़ता रहा।
तम ना बड़ने दूँगा , 
दीपक कहता रहा ।।
"जय कुमार"20/10/14

तेरी मेरी बस

तेरी मेरी बस इतनी सी कहानी है ।
दिल में भरा दर्द आँखों में पानी है ।
बिखर ना जाऊँ टूटकर संभाला है ,
प्रेम पाँस में बँधी अपनी जिंदगानी है ।।
"जय कुमार"20/10/14

आँखो से अश्क

आँखो से अश्क बहाना आसान होता ।
दिल के हालात सुनाना आसान होता ।
कोई कँधे पर हाथ रख साथ चलता ,
तो टूटकर बिखर जाना आसान होता ।।
"जय कुमार"19/10/14

बुराई बुरी है

बुराई बुरी है , तो दमन कर ।
लड़ाई खड़ी है , तो अमन कर ।
प्रकाश से ही तम नाश होता , 
भलाई भली है , तो नमन कर । ।
"जय कुमार"19/10/14

Sunday, 19 October 2014

बेमुरव्वत तेरी


बेमुरव्वत तेरी तस्वीर जला ना पाया ।
दिल बाग में और फूल खिला ना पाया ।
ख्वावों में रोज हम तेरे अक्स से मिलते ,
मुहब्बत तेरी आज तक भुला ना पाया ।।
"जय कुमार"19/10/14

तेरी मेरी जीत


तेरी मेरी जीत में बस इतना अंतर है
तू जीतकर जीता है मैं हारकर जीता हूँ
इश्क और दोस्ती में बस इतना फर्क है
तू पहलू में रोता है मैं कंधे पर रोता हूँ
"जय कुमार"18/10/14

जवानी की कहानी

जवानी की कहानी में देश पर कुर्बानी लिख देना ।
खून में आयी रवानी अब स्वाभिमानी लिख देना ।
देश की माटी ने इज्जत से दो गज जमीन दी मुझे ,
गाथायें मत लिखना कब्र पर बलिदानी लिख देना ।।
"जय कुमार"18/10/14

जो


जो
रहा
साथ में
सुकून ना
अरमान था
रहा ना साथ वो
नियति के खेल में ! !
पा
सका
जिसकी
चाहत ना
खोया जो प्यारा
संतुष्ट कभी ना
क्रम यही चलता !!
जा
सका
जहाँ में
जाना ना था
जाना जहाँ था
वहाँ ना पुहँचा
जीवन चला गया !!

जाओ
प्रकाश
तम बड़ा
हराने तुम
समय कठिन
आशा एक ही तुम !!
"जय कुमार"18/10/14

भरम हमारे


भरम हमारे अब सब टूट गये ।
दिल की दौलत को वो लूट गये ।
आँधी ने घरौंदे पर कहर डाया,
पिछली रुत के साथी छूट गये ।
"जय कुमार"17/10/14

"हाइकू"



बंद लिफाफे
तकदीर अंदर
पड़ते कैंसे
लुटा फूल था
खुशबुओं का जब
महके कैंसे
जज्बा नहीं था
मंजिल बड़ी दूर
बढ़ते कैंसे
तूफान बड़ा
दीपक अकेला था
जलता कैंसे
मुफलिसी में
पेट था खाली खाली
चलते कैंसे
घर हवा में
पाँव धरती पर
रहते कैंसे
हम खड़े थे
जल आग के बीच
बढ़ते कैंसे
"जय कुमार"

हकीम के पास


हकीम के पास जाकर मर्ज दिखाना भूल गये ।
कुदरत से जो पाया कर्ज चुकाना भूल गये ।
मानव बनाया था हमको मिलकर रहने को ,
मानवता का भी हम फर्ज निभाना भूल गये । ।
"जय कुमार"17/10/14

रिश्तों


रिश्तों में ये मिलावट कैंसी ।
जज्वातों में सजावट कैंसी ।
राह हो लंबी जब मंजिल की ,
मुसाफिर को थकावट कैंसी ।।
"जय कुमार"16/10/14

"दोहा"


"दोहा"
जीण क्षीण तन हो रहा , छोड़ रहा अब बोझ ।
पंक्षी डाल से उड़ रहा , नया ठिकाना खोज ।।
"जय कुमार"16/10/14

हजारों तमन्नाओं


हजारों तमन्नाओं ने दम तोड़ा है !
दिल की गहराई में ,,,बम फोड़ा है !
मसल पत्थर को,, रेत बना डाला ,
जमाना कहता है कि कम तोड़ा है !!
"जय कुमार"15/10/14

राज पाठ


राज पाठ सब छूट गए , आती देखी साँझ ।
सौ सौ पुत्रों को जना , रही वाँझ की वाँझ ।।
"जय कुमार"15/10/14

चलो जी


चलो जी फिर एक बार बात करते है ।
गुजरे हुये लम्हों से मुलाकात करते है ।
हालात चाहे जितने भी खिलाफ हो ,
मिलकर , गर्मी को बरसात करते है ।।
"जय कुमार"15/10/14

Tuesday, 14 October 2014

किसी का गीत

Jay Kumar Jain
किसी का गीत बन जाता ।
किसी का मीत बन जाता ।
साथ जो तेरा मिलता यार ,
किसी की जीत बन जाता ।।
किसी साजन से मिल जाता ।
किसी आँगन में खिल जाता ।
मजबूर ना होता जीवन जो ,
किसी दामन में पल जाता ।।
किसी की साँसोँ में पलता ।
किसी की बातों में खिलता ।
अभिप्रेरणा जो तू बन जाता
किसी की राहों पे चलता ।।
किसी की प्रीत बन जाता।
किसी की रीत बन जाता।
तू स्वर अगर बनता तो ,
किसी का संगीत बन जाता।

"जय कुमार"14/10/14

तेरा मेरा

तेरा मेरा एक गीत हो ।
हमारी ऐसी प्रीत हो ।
दुआएँ निकले दिल से ,
मन मीत की जीत हो ।
रब सम अपना मीत हो ।
हर हार में भी जीत हो ।
बंदिसे ना हो अब कोई ,
नई एक प्रेम की रीत हो ।
"जय कुमार"14/10/14

ना


ना
कर
इतना
गुरुर तू
मिट्टी की कृति
पुरानी तो होगी
टूटेगे जिस दिन
कहानी समाप्त होगी
जाना ही होगा तुझे तब
मिट्टी मिट्टि में मिल जायेगी !!

"जय कुमार"

कर
इतना
गुरुर तू
मिट्टी की कृति
पुरानी तो होगी
टूटेगे जिस दिन
कहानी समाप्त होगी
जाना ही होगा तुझे तब
मिट्टी मिट्टि में मिल जायेगी !!

"जय कुमार"13/10/14

भैया धागा

भैया धागा प्रेम का , टूट बिखर जो जाय ।
अबकी ऐसे जोड़ियो , बैरी तोड़ न पाय ।।
"जय कुमार"13/10/14

बढ़ेगा कोई

बढ़ेगा कोई कैसे वहाँ यारो ,
केंकड़ा प्रवृति में प्रवीण जहाँ ।
हर कोई कुदाल लिए खड़ा ,
गड़े मुर्दे को भी सुकून कहाँ ।।
"जय कुमार"13/10/14


जाओ
प्रीतम
चाँद आया
प्रेम आसक्त
चाँदनी है लाया
मंद मंद ठंडक
कहत रीत प्रीत की
मीत के गीत ने बुलाया

"जय कुमार"12/10/14

टूटते बिखरते

टूटते बिखरते दिलों के गीत है ।
बिछड़ते मिलते ये मन मीत है ।
गाया जिनने सदियों प्रेम राग ,
गमों में डूबे सुरों के संगीत है । ।
"जय कुमार"12/10/14

खोजत

खोजत खोजत थक गये , मिला न मन का मीत ।
चार दिनों तक संग रयो , दो दिन की जा प्रीत ।।
"जय कुमार"

खामोशी के

खामोशी के आगोश में जीवन पलते रहे ।
आँधियों के साये में खार पथ पे चलते रहे ।
चले हजार कदम एक मैं तीन शून्य साथ थे ,
जद्दोजहद की आग में अरमान मचलते रहे ।।
"जय कुमार"12/10/14

काले दिलों की

काले दिलों की खूबसूरत मुस्कान देखिए ।
बिना शक्कर के अब मीठे पकवान देखिए ।
चरित्रहीन बन बैठे ठेकेदार समाज के जब ,
दौड़ घोड़ों की गधों के खुरों के निशान देखिए ।
"जय कुमार"07/10/14

गली गली में

गली गली में भावनाओं की दुकान देखो जी ।
टूटते बिखरते अरमानों के निशान देखो जी ।
वक्त ने करवट बदली या रुख बदला हवा ने ,
ईमान के रक्षक बन बैठे बेईमान देखो जी ।।
"जय कुमार"06/10/14

Sunday, 28 September 2014

माँ की नजरों

किसी ने बेगारा कहा ।
किसी ने आबारा कहा।
माँ की नजरों ने देखा ,
आँखों का तारा कहा । ।
"जय कुमार"

अनजान महफिलों

अनजान महफिलों में फूल बन महकते रहे ।
अजनबी गमो में आँसु आँख से बरसते रहे ।
अपनी खुशी गम की हमें परवाह ना रही ,
बाग में किसी के चिड़ियों से चहकते रहे । ।
"जय कुमार"28/09/14

खेल खेल में

खेल खेल में जल गयो , सारे तन को तेल ।
सारा कौड़ा जल गयो , राख आग को मेल ।।
राख आग को मेल , उम्र निकल गई सारी ।
यौवन लूटत रहो , चलन की आई बारी ।।
"जय कुमार"28/09/14

उन परिंद्रो को


उन परिंद्रो को दर्द ए गम की फिक्र ना ,
इश्क ए दरिया में जो बसर करते है ।
उन दरख्तों को हवाओं का डर कैंसा ,
सीने में जिनके बबंड़र सफर करते है ।
रोज मिलते जमाने की राहों में लोग ,
भूलते ना जो दिल पर असर करते है ।
पुष्प खिलते बागों में हर दिन नये है ,
महकते वो जो काँटों में बसर करते है ।
किसी रोज पत्थर भी पिगल जाता ,
हम अपनी भावना में कसर करते है ।
बेपनाह मुहब्बत के जज्वात वयां नहीं ,
चाह में उसकी जय रुह नजर करते है ।
"जय कुमार" 27/09/14

जोगी जोग

जोगी जोग भूल गये , लगो भोग को रोग ।
योगी योग भूल गये , बना मुद्रा का योग । ।
"जय कुमार"26/09/14

शेरा वाली मात

शेरा वाली मात के , चरण पखारे आज ।
भक्ति भाव से पूजते , रखियो हमरी लाज ।।
रखियो हमरी लाज , माई तेरो सहारो ।
भव सागर में फँसे ,मात दिखा दो किनारो ।
"जय कुमार"26/09/14

जमाने के

जमाने के चेहरों में एक ,
चेहरा दिखता रहा ।
मेरे जज्वातों का घरोंदा ,
हाट में बिकता रहा ।
टूटकर बिखरता रहा मैं
इन राहों की बाँहों में ,
दर्द दिल में नासूर बन ,
आँखो से रिसता रहा ।।

जय कुमार" 26/09/14

तन्हाई हिज्र की

तन्हाई हिज्र की बहुत होती अजीब है ।
तमन्नाओं का आलम बस होता करीब है ।
पल-पल गुजरता है फिक्र ए यार में ,
रोता है दिल उसके साथ होता रकीब है ।।
"जय कुमार"25/09/14

अनुशासन की

अनुशासन की पाठशाला में ,
होता अनुशासन भंग है ।
दिन अँधेरा रातें जगमगाई ,
विरोधाभासों की जंग है ।
चेहरे मुस्कराते हर पल
मन में छाया गहरा सन्नाटा ,
भाषण व्यापकाता के करते ,
मगर होता दिल तंग है ।

"जय कुमार"25/09/14

खुद की हिम्मत

खुद की हिम्मत को झाँककर देख ।
खुद से ज्यादा कुछ माँगकर देख ।
हिमालय भी सर झुकायेगा दोस्त ,
अपनी सीमाओं को लाँगकर देख ।।
संकीर्ण सीमा से निकलकर देख ।
व्यापक धरातल पर चलकर देख ।
अनन्त पर पुँहुच जायेगा ए दोस्त
विश्वास की लंबाई नापकर देख ।।
"जय कुमार"24/09/14

किसी खिड़की पर

उसी खिड़की पर खड़ा मैं झाँकता रहा हूँ !
तुमारे कदमों की जमीं ,,,,, मैं नापता होगा !
गुजरे लम्हों की कसक करती रही बैचेन ,
हर वक्त तुझे यादों से ,,,,,, मैं माँगता होगा !!
"जय कुमार"24/09/14

जमाने के रिश्तों

जमाने के रिश्तों को हम कमाते रहे ।
कामना ने जकड़ा 'मैं' को भुलाते रहे ।
दुनिया की जंजीरों में ऐसे बँधे हम ,
मिट्रटी की अमानत को सजाते रहे ।।
"जय कुमार" 24/09/14

"हाइकू"

कोलाहल में
आवाज दब गई
मासूम की थी
धन की आड़
चलता है चाबुक
निर्बल खाल
मुफलिसी में
याद नहीं फसाने
याद है रोटी
चले जो सीधा
उल्टा कहे दुनिया
आज की रीत
ईमान दीप
निकला जो मन से
पुँहुचा हाट
कोई डगर
मिलती ना मंजिल
होता अपूर्ण
काल के जाल
हर तरफ होते
बचना कर्म
"जय कुमार" 23/09/14

अपने ही अक्स

अपने ही अक्स से ये गिला कैंसा ।
जफाओं का ए वेहया सिला कैसा ।
उसकी अदाओं का भी जबाब नहीं ,
शिद्दत से चाहा , वो मिला कैंसा ।।
"जय कुमार"20/09/14

मुकद्दर से

मुकद्दर से,,,,,, मिला दीजिए !
कोई तो अब सिला दीजिए !!

रुत फिर ,,,,,सुहानी आई है ,
मुख से परदा,, हटा दीजिए !

बर्बाद न हुआ ,,,,,,,अरसे से ,
मुझे आशिक ,,बना दीजिए !

सदियों से ,,,,,प्यासा दरिया ,
'जय' पानी ,,,,,पिला दीजिए !!

"जय कुमार"20/09/14

तुमसे ही मेरा

तुमसे ही मेरा हर काज है ।
तुमसे ही मेरी यहाँ लाज है ।
इस मिटने वाले जीवन में ,
तुमसे ही मेरा यहाँ ताज है ।
क्यों रुठ जाते हो यूँ पल में ।
क्यों डरते हो यूँ हलचल में ।
आज में जीना सीख लो यार ,
क्यों जीते हो अब यूँ कल में । ।
आज ही तो होता हमारा है ।
भूत तो दुखों का पिटारा है ।
प्रयास कर सच्चे मन से तु ,
भविष्य राज तो तुम्हारा है ।।
हर दर्द को अलविदा करदे ।
यादों के ढ़ाचे को जुदा करदे ।
जीता जा खुदमें यार मेरे अब,
अपने ह्रदय को खुदा करदे ।।
मन मीत अब बनकर रहेंगे ।
हर गम हम मिलकर सहेगे ।
तूफाँ आये अँधेरा हो गहरा ,
संघर्ष पथ पे चलकर रहेंगे ।।
"जय कुमार" 17/09/14

जख्मो पर

जख्मो पर जवानी आई है ।
यादों पर रवानी आई है ।
नकाब उठा यादों का फिर,
याद कोई कहानी आई है ।।
मुद्दतों से जख्म सोये रहे ।
रश्मों रिवाजो पे रोये रहे ।
खड़े है दिल के दवाजे पर ,
नकामी से अपनी खोये रहे ।
"जय कुमार" 17/09/14

मझधार में नाव

मझधार में नाव डगमगा रही है ।
तेज तूफाँ में लौ जगमगा रही है ।
जाने के बाद भी राहत कहाँ यार ,
तन मृत आँखे झिलमिला रही है ।।
"जय कुमार" 17/09/14

बाँट दिया

बाँट दिया तराजू के बाँटों से ।
छेदा गया भरोसे के काँटों से ।
संघर्ष पथ पे मुस्कराता रहा ,
तड़फ उठा प्यार की गाँठों से ।
"जय कुमार"17/09/14

काँटा घूमा

काँटा घूमा समय का , सब अपनो कर लेत ।
काँटा घूमा समय का , सब वापिस कर देत ।
सब वापिस कर देत , यही समय की चाल है ।
हम से कुछ ना लेत , यही समय को जाल है । ।
"जय कुमार"16/09/14

Tuesday, 9 September 2014

रिश्ते नाते



रिश्ते नाते कसमें वादे ।
झूठे सबके सारे इरादे ।
कफन ही होता है सच ,
स्वीकार कर ले शहजादे ।

"जय कुमार"08/09/14

हमपर भरोसा

             Photo: हमपर भरोसा ना कर मगर ,
भरम पर जमाना सलामत है ।
जतन से सजाया जिस तन को ,
यह तो मिट्रटी की अमानत है ।।

"जय कुमार"

हमपर भरोसा ना कर मगर ,
                      भरम पर जमाना सलामत है ।
जतन से सजाया जिस तन को ,
                      यह तो मिट्रटी की अमानत है ।।

               "जय कुमार"07/09/14

जब दर्द गुजरता

जब दर्द गुजरता हो राहों में ।
कैंसे खुशी मनाऊँ बाँहों में ।।

घर के दीपक कैंसे उजारु ,
तम छाया हो गलियारों में ।

खुशबु के बाग मंजूर नहीं ,
जब घुला जहर दिशाओं में ।

उनके खून पसीने को भूले ,
जिनका जीवन है खारों में ।

कैसे निवाला गले से उतरे ,
याद करे जब कोई आहों में ।

वतन के मतवारो को भूले ,
चस्पा दिया अब दीवारोँ में ।

मंदिर मस्जिद में कैसे जाऊँ ,
लिप्त रहा जय जो गुनाहों में ।

"जय कुमार"07/09/14

मुझे भूलकर

           Photo: हमपर भरोसा ना कर मगर ,
भरम पर जमाना सलामत है ।
जतन से सजाया जिस तन को ,
यह तो मिट्रटी की अमानत है ।।

"जय कुमार"

मुझे भूलकर याद करने का गुनाह ना कर ।
अपने ही इरादों को अब यूँ गुमराह ना कर ।
जख्म नासूर बन गये तेरी उल्फत में यारा ,
हरेक पल कुरेदकर इनकी परवाह ना कर ।।

"जय कुमार"06/09/14

मुझे अपनी

मुझे अपनी निगाह से दूर ना कर ।
मुझे अपनी पनाह से दूर ना कर ।
बहुत सुकून मिलता तेरे दर पर ,
मुझे दिल दरगाह से दूर ना कर । ।

"जय कुमार"05/09/14

"हाइकू"



हम अज्ञानी
गुरुवर है ज्ञानी
प्रकाश मिले

तम है छाया
गुरु ज्ञान की खान
ज्ञान से मिले

भूला हूँ रास्ता
वासनाओं में फँसा
सन्मार्ग मिले

भ्रम का जाल
जकड़ता मुझको
विवेक मिले

कर्मो का फल
ढ़ोता जन्म जन्मों से
गुरु से मुक्ति

"जय कुमार"

चलना जिसने

Photo: हमपर भरोसा ना कर मगर ,
भरम पर जमाना सलामत है ।
जतन से सजाया जिस तन को ,
यह तो मिट्रटी की अमानत है ।।

"जय कुमार"

चलना जिसने सीख लिया ।
                    बढ़ना उसने सीख लिया ।
चड़ पाता उँचा शिखर वो ,
                    झुकना जिसने सीख लिया ।

जीना जिसने सीख लिया ।
                    हँसना उसने सीख लिया ।
हर मुश्किल हल हो जाती
                    लड़ना जिसने सीख लिया ।

उठना जिसने सीख लिया ।
                    चलना उसने सीख लिया ।
खार से वो कब डरता है ,
                    खिलना जिसने सीख लिया ।

हारना जिसने सीख लिया ।
                    जीतना उसने सीख लिया ।
जीत हार से विचलित न हो
                  स्वरमना जिसने सीख लिया ।

"जय कुमार"05/09/14

"हाइकू"

बर्षा का पानी
बह गया आसरा
मिट्टी का घर

बर्षा का पानी
बेबस ढह गया
मिट्टी का घर

बर्षा का पानी
गरीबी का आलम
छत आकाश

बर्षा का पानी
उमंग ले आया
उन को जंग

बर्षा का पानी
खाने को दाना नहीं
लाया बेगारी

"जय कुमार"04/09/14

खुदको मिटाकर

खुदको मिटाकर क्या मिला ?
जीवन घटाकर क्या मिला ?
क्यों रंज पालते फिजूल के ,
यूँ दर्द बड़ाकर क्या मिला ? ?

कभी जमाने से मिल लेते ।
किसी बगिया में खिल लेते ।
किस राह पर चले हो यार .
राह ए मुहब्बत पे चल लेते । ।

यूँ उदास होकर क्या मिला ?
बदहबास होकर क्या मिला ?
होश में अपने आप से मिलते ,
यूँ निराश होकर क्या मिला ??

दिल के नजारे से मिल लेते ।
अपने ही उजारे से मिल लेते ।
खास बनाया था रब ने तुम्हे ,
जीवन किनारे से मिल लेते ।।

जिंदगी जलाकर क्या मिला ?
बंदगी भुलाकर क्या मिला ?
कुछ खास करना था मानव ,
मनुष्यता जलाकर क्या मिला ??

चलो फिर आगाज करते है ।
अपने आप से बात करते है ।
क्या जिया है क्या जीना था ,
जिंदगी का हिसाब करते है ।।

"जय कुमार"03/09/14

गला घौंट

गला घौंट कर मेरी बंदगी का ।
हिसाब माँगते मेरी जिंदगी का ।
क्यो छुपाते वेहयाई बेवफाई वो ,
जबाब नहीं उनकी शर्मिँदगी का ।

"जय कुमार" 03/09/14

नयनो से नीर

नयनो से नीर बहा देते तुम ।
कुछ एहसास करा देते तुम ।
मैं था नादाँ समझ ना पाया ,
दिल का हाल बता देते तुम ।

"जय कुमार"

अपने वादो से

अपने वादो से मुकर गया वो ।
मेरे दिल से ही उतर गया वो ।
जिसे जोड़ता रहा एक जमाने से
टूटा सीसा सा बिखर गया वो ।

"जय कुमार"

Tuesday, 2 September 2014

काये भैया

काये भैया तुम काये रो रये
अँधियारी रात में जमाने सो रये
मीठी बाते सुनके तबियत तबेला
मन बौगना हो रये . . . . . .

आदमन की गिनती बढ़तई जा रई
कलुआ की कमाई बच्चन में जा रई
देखो तो कक्का जे का दिन आ गये
सो कक्का ऐसे हम रो रये . . . .

भगुआ के बब्बा की थी पचास बीगा जमीन
ओके नतियाँ अब पाँच पाँच बीगा पा रये
सो दाऊ हम ऐसे रो रये . . . . .

मोरे दद्दा ने कई ती लेलो बेटा ज्ञान
नईं पड़ो हमने सो रोजई जा रई जान
बड़े दद्दा के खेतन में , बेजई भिट्या रये . .
सो कक्का ऐसे रो रये . . . .

बड़े शहर खो गये ते नौकरी करन खो ।
बेगारी ऐसी उते के हजारों बेहा रये . .
सो भैया ऐसे रो रये . . . .

रेलन की भीड़ देख निकर रये प्रान ।
आदमन के बीच में हम हिरा हिरा जा रये . .
सो कक्का ऐसे रो रये . . .

पेंले गाँव घर बड़े दूर दूर होत थे
जमीन घट गई घर डिगों डिगों आ गये
दाऊ के समय में बैलगाड़ी चलत थी
ये जमाने में फटफटियन की लेन लगा रये . .
सो बड़े दद्दा ऐसे रो रये . . . .

रजुआ के एक मोड़ा मोड़ी सो खूबई पड़ा रयो
मोरे के आठ जनै भैया खावे नईं पुजा पा रये . . . .
सो राजा ऐसे रो रये . .

ओकी एक मोड़ी पड़ी लिखी
सो नौने घर में ब्याह रई
मोरे के चार चार विन्ना हरे भैया
सो जे ससरार वारे लाखन मगा रये . . .
सो राम धई ऐसे रो रये . . . .

'जय' तुम हिंदी नई जानत
सो बुन्देली में समझा रये . .

काये भैया तुम काये रो रये
अँधियारी रात में जमाने सो रये
मीठी बातें सुनके तबियत तबेला
मन बौगना हो रये . . . .

"जय कुमार"

चिड़ियों को

चिड़ियों को चहकने का अधिकार चाहिए ।
गगन परियों को उड़ने का अधिकार चाहिए ।
जुल्म ढाये है वागवाँ ने जमाने से जिनपर ,
कलियों को खिलने का अधिकार चाहिए ।।

"जय कुमार"31/08/14

सारे गमों

सारे गमों को बर्बाद कर दो ।
खुशी से ये फरियाद कर दो ।
क्यों पाले बैठे हो रंज मन में ,
मुश्किलों को आबाद कर दो ।।

"जय कुमार" 31/08/14

खिलते मुरझाते

खिलते मुरझाते फिर मचलते रिश्ते ।
गम के सागर में लाश बन तैरते रिश्ते ।
फर्ज कर्ज सब भुला दिया खुदगर्जी में ,
गिरगिट की तरह रंग बदलते रिश्ते ।।

"जय कुमार"31/08/14

"हाइकू"



टूटा बंधन
छण में भाव हीन
रिश्तों की दाताँ

डाल से पत्ता
उड़ चला जो टूटा
कहाँ ठिकाना

पुष्प थे खिले
भौँरो का था भ्रमण
वक्त बदला

कौआ कोयल
एक रंग में मिलें
बोली अलग

बुरा से अच्छा
कोयल कुटिलता
कौआ निर्मल

दिखाता जैसा
मन वैसा ना होता
डंक दो होते

"जय कुमार"

मुझे वक्त

मुझे वक्त के हाथ में सौंपता रहा ।
जहर मिला प्यार परोसता रहा ।
साथ चलने को खड़ा होता रहा मैं ,
मेरे जज्बे को खंजर खौंपता रहा ।

"जय कुमार

गजानन

गजानन , पधारो मारे अँगना ।
गजानन , पधारो मारे अँगना ।

पधारो मारे अँगना ,
पधारो मारे अँगना ,
पधारो मारे अँगना . . .

मूसक पे तुम , बैठ मुस्कराना ।
संग भोले के , मैया को लाना ।

गजानन , पधारो मारे अँगना ।
गजानन , तधारो मारे अँगना ।
. . . . . . . . .

रिध्दि , सिध्दि को संग लाना ।
मोदक मन मन के तुम खाना ।

गजानन , पधारो मारे अँगना ।
गजानन , पधारो मारे अँगना ।
. . . . . . . . . .

हम तो मूरख , कछु ना जाने ।
तेरी ही मूरत , को सब माने ।

गजानन , पधारो मारे अँगना ।
गजानन , पधारो मारे अँगना ।
. . . . . . . . . .

हम तो आतुर , पूजन को तेरे ।
श्रृध्दा भाव के , पुष्प है मेरे ।

गजानन , पधारो मारे अँगना ।
गजानन , पधारो मारे अँगना ।
. . . . . . . . . .

तेरी मूरत , मन में बस गई ।
देख तुझे , हर पीड़ा मिट गई ।

गजानन , पधारो मारे अँगना ।
गजानन , पधारो मारे अँगना ।
. . . . . . . . .

प्रथम पूज्य , देव तुम हमारे ।
सबरे काज , तुमने ही संभारे ।

गजानन , पधारो मारे अँगना ।
गजानन , पधारो मारे अँगना ।
. . . . . . . . . .

हम गरीब , पूजा तेरी रचायें ।
घर में जो कुछ , तुझे खिलायेँ ।

गजानन , पधारो मारे अँगना ।
गजानन , पधारो मारे अँगना ।
. . . . . . . . . .

एक छोटी सी , विनती हमारी ।
बिखेर जाओ ये , छटा तुमारी ।

गजानन , पधारो मारे अँगना ।
गजानन , पधारो मारे अँगना ।

पधारो मारे अँगना ,
पधारो मारे अँगना ,
पधारो मारे अँगना . . . .

"जय कुमार"29/08/14

समस्त मित्रों को गणेश चतुर्थी
की हार्दिक शुभकामनायें . .जय गणेश

भैया चले

भैया चले ससुराल , खायें मुफत को माल ।
बात पे रोव दिखावे , बदल गई अब चाल ।
बदल गई अब चाल , खाके माल पेट पटे ।
फूल गये अब गाल , ठाट बाट से दिन कटे ।

"जय कुमार" 27/08/14

Wednesday, 27 August 2014

गीत गजलों

Jay Kumar Jain's photo.
गीत गजलों की भाषा हूँ ।
सोते इंसान को जगाता हूँ ।
आँखों से आँसु सूख गये ,
उनके दर्द को सुनाता हुँ ।
धरती है जिनका बिछोना ,
बीच उनके खुदको पाता हूँ ।
शहनाई गीत ना भाते मुझे ,
मजबूरी मन की सुनाता हूँ ।
घोर निराशा के अंधेरों में ,
एक आशा दीप जलाता हूँ ।
जिनको धुतकारा जमाने ने ,
मैं उनको भी गले लगाता हूँ ।
जो वतन पर जान लुटाये ,
उनको मैं शीश झुकाता हूँ ।
कदम मिलाकर चलने में ही ,
मैं जय विश्वास जताता हू ।
"जय कुमार"27/08/14

"दोहा"

करत रहें दिन रात जे , मोबाइल पे बात ।
लाज शरम सब भूल के , ईलू ईलू गात । ।

"जय कुमार" 25/08/14

गीत गजलों

गीत गजलों की भाषा हूँ ।
सोते इंसान को जगाता हूँ ।
आँखों से आँसु सूख गये ,
मैं उनके दर्द को सुनाता हुँ ।

"जय कुमार"25/08/14

चलो जी

चलो जी कुछ बात करें
अब ना जात - पात करें
नफरत बहुत हो चुकी 
फिरसे नई शुरुवात करें

"जय कुमार"25/08/14

पीकर खुद जहर



पीकर खुद जहर अमृत बने जमाने को तुम ,
हर पल नेकी उपकार में बिताया है तुमने ।

बिरोधी हो जायेंगे सहमत एक दिन जरुर ,
दुश्मन को भी महफिल में बुलाया है तुमने ।

अपने आप को जलाकर उजाला करने वाले , 
तन मन धन को सच पर लगाया है तुमने ।

कर्म पथ चलने में मुसीबत जलवा दिखाती ,
आँधियों के दौर में दीपक जलाया है तुमने ।

एक दिन आयेगा आकाश झुक जायेगा तुमेँ ,
आदर्श पथ पे चलकर फूल खिलाया है तुमने ।

जिंदगी जो हिसाब पूछने लगे नेकी वदी का ,
दिखा देना जो जीवन भर कमाया है तुमने ।

जमाने याद करेंगे तुमको अपने इतिहास में ,
प्रेम की खुशवु से जो चमन सजाया है तुमने ।

"जय कुमार "25/08/14

कभी यह भूमि

कभी यह भूमि जोग भूमि बनी ।
कभी यह भूमि योग भूमि बनी ।
भारत घुट रहा इंडिया आया है , 
अब यह भूमि भोग भूमि बनी ।।

"जय कुमार"24/08/14

मलाई उनने

मलाई उनने खाई , हमे पानी पकरा गये ।
माखन उनने खाओ , हमें छाँछ पिला गये ।
सियासत को खेल , सरकारी सिस्टम जो , 
चाँदी उनने काटी , हमें मिट्रटी सरका गये ।।

"जय कुमार"24/08/14

"दोहा"

वासनाओं के खेल में , प्रेम की आड़ लेत ।
प्रेम के अँगना में जे , हवस के खंजर टेत ।।

"जय कुमार"

"दोहा"

पथरा बोले काँच से , न कर हमसे बैर ।
मोरो कुछ ना बिगड़े , अपनी रखना खैर ।।

"जय कुमार" 23/08/14

मन में पाप

मन में पाप छुपा रखें , जग खो भाषण देत ।
मीठी वाणी बोल के , सब अपनो कर लेत ।
सब अपनो कर लेत , लूट हथियार के बिना ।
नाम राम को लेत , बने बैरागी धन गिना ।
धर्म शास्त्र की बात करे , करते काले काम ।
कलयुग की जा माया , बिकते हर दिन राम ।
बिकते हर दिन राम , हाट खोल बैठे भगत ।
धरम करें बदनाम , अंधो बनो देखत जगत । 
पुण्य पाप कि बातन से , हमें तुमे डरात ।
हम तुम उपवास करें , खुद मलाई खात ।
खुद मलाई खात , दूध दोहन अपन करें ।
परिश्रम अपनो होत , वे अपनी कोठी भरें ।।

"जय कुमार" 22/08/14