Mere Bhav
Thursday, 3 August 2023
वो गांव वो मेरे शहर
ख़्वाब में आते रोज नज़र
परदेश की चकाचौंध का
कोई पड़ता कहां असर
अपनी बीती रोज़ सुनाता
ज़िंदगी तू सुनती नहीं मगर
मर्ज पेट का कहां ले आया
अंतहीन चल रहा ये सफ़र
कमजोर जड़े दरकता तना
दम तोड़ रहा बूढ़ा शजर
"जय कुमार" ०४/०८/२०२३
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