Wednesday, 27 August 2014

गीत गजलों

Jay Kumar Jain's photo.
गीत गजलों की भाषा हूँ ।
सोते इंसान को जगाता हूँ ।
आँखों से आँसु सूख गये ,
उनके दर्द को सुनाता हुँ ।
धरती है जिनका बिछोना ,
बीच उनके खुदको पाता हूँ ।
शहनाई गीत ना भाते मुझे ,
मजबूरी मन की सुनाता हूँ ।
घोर निराशा के अंधेरों में ,
एक आशा दीप जलाता हूँ ।
जिनको धुतकारा जमाने ने ,
मैं उनको भी गले लगाता हूँ ।
जो वतन पर जान लुटाये ,
उनको मैं शीश झुकाता हूँ ।
कदम मिलाकर चलने में ही ,
मैं जय विश्वास जताता हू ।
"जय कुमार"27/08/14

"दोहा"

करत रहें दिन रात जे , मोबाइल पे बात ।
लाज शरम सब भूल के , ईलू ईलू गात । ।

"जय कुमार" 25/08/14

गीत गजलों

गीत गजलों की भाषा हूँ ।
सोते इंसान को जगाता हूँ ।
आँखों से आँसु सूख गये ,
मैं उनके दर्द को सुनाता हुँ ।

"जय कुमार"25/08/14

चलो जी

चलो जी कुछ बात करें
अब ना जात - पात करें
नफरत बहुत हो चुकी 
फिरसे नई शुरुवात करें

"जय कुमार"25/08/14

पीकर खुद जहर



पीकर खुद जहर अमृत बने जमाने को तुम ,
हर पल नेकी उपकार में बिताया है तुमने ।

बिरोधी हो जायेंगे सहमत एक दिन जरुर ,
दुश्मन को भी महफिल में बुलाया है तुमने ।

अपने आप को जलाकर उजाला करने वाले , 
तन मन धन को सच पर लगाया है तुमने ।

कर्म पथ चलने में मुसीबत जलवा दिखाती ,
आँधियों के दौर में दीपक जलाया है तुमने ।

एक दिन आयेगा आकाश झुक जायेगा तुमेँ ,
आदर्श पथ पे चलकर फूल खिलाया है तुमने ।

जिंदगी जो हिसाब पूछने लगे नेकी वदी का ,
दिखा देना जो जीवन भर कमाया है तुमने ।

जमाने याद करेंगे तुमको अपने इतिहास में ,
प्रेम की खुशवु से जो चमन सजाया है तुमने ।

"जय कुमार "25/08/14

कभी यह भूमि

कभी यह भूमि जोग भूमि बनी ।
कभी यह भूमि योग भूमि बनी ।
भारत घुट रहा इंडिया आया है , 
अब यह भूमि भोग भूमि बनी ।।

"जय कुमार"24/08/14

मलाई उनने

मलाई उनने खाई , हमे पानी पकरा गये ।
माखन उनने खाओ , हमें छाँछ पिला गये ।
सियासत को खेल , सरकारी सिस्टम जो , 
चाँदी उनने काटी , हमें मिट्रटी सरका गये ।।

"जय कुमार"24/08/14

"दोहा"

वासनाओं के खेल में , प्रेम की आड़ लेत ।
प्रेम के अँगना में जे , हवस के खंजर टेत ।।

"जय कुमार"

"दोहा"

पथरा बोले काँच से , न कर हमसे बैर ।
मोरो कुछ ना बिगड़े , अपनी रखना खैर ।।

"जय कुमार" 23/08/14

मन में पाप

मन में पाप छुपा रखें , जग खो भाषण देत ।
मीठी वाणी बोल के , सब अपनो कर लेत ।
सब अपनो कर लेत , लूट हथियार के बिना ।
नाम राम को लेत , बने बैरागी धन गिना ।
धर्म शास्त्र की बात करे , करते काले काम ।
कलयुग की जा माया , बिकते हर दिन राम ।
बिकते हर दिन राम , हाट खोल बैठे भगत ।
धरम करें बदनाम , अंधो बनो देखत जगत । 
पुण्य पाप कि बातन से , हमें तुमे डरात ।
हम तुम उपवास करें , खुद मलाई खात ।
खुद मलाई खात , दूध दोहन अपन करें ।
परिश्रम अपनो होत , वे अपनी कोठी भरें ।।

"जय कुमार" 22/08/14

हर अरमान


हर अरमान मेरा रुठ गया ।
आशाओं का भरम टूट गया ।

ह्रदय में खामोशी छाई है ,
भावों का दरिया सूख गया ।

हाथों में लहराती तलवारें ,
मानवता का बंधन टूट गया ।

वासनाओं की आँधी आई है ,
रिश्तों का भरोसा टूट गया ।

युग का यह कैंसा पड़ाव है ,
इंसान को इंसान लूट गया ।

अनाचार के मंजर देखे जब ,
साहस का बाँध ये फूट गया ।

खामोश हुआ जीवन स्पंदन ,
साँसो से ह्रदय जब रुठ गया ।

"जय कुमार"21/08/14

"हाइकू"



मित्र से मित्र 
शत्रुता से शत्रुता
मीत से मीत

कल को कल 
आज को मिला आज
अभी को अभी

उग्र से उग्र
संयम से संयम
नम्र से नम्र

कद्र से कद्र
रुसवा से रुसवा
भद्र से भद्र

जंग से जंग
मिलन से मिलन
शाँति से शाँति

दिल से दिल
दिमाग से दिमाग
प्रीत से प्रीत

गीत से गीत
संगीत से संगीत
स्वर से स्वर

कर्म से फल
जतन से जीवन
पुष्प खिलता

"जय कुमार"

हम और तुम

हम और तुम अब मिलकर चलेंगे 
सामने जमाने के खुलकर चलेंगे 
नफरत पैदा ना कर पायेगा कोई 
साजिशों से उनकी संभलकर चलेंगे

"जय कुमार"21/08/14

अपने अंधेरों

अपने अंधेरों से निकल जा ।
खुदके पाँवों पर संभल जा ।
मंजिल तेरे नजदीक ही है ,
राह के निशानों पर चल जा ।

"जय कुमार" 21/08/14

अपने ही दिल

अपने ही दिल में आग लगा , जलता क्यों है ।
गिराकर बार बार खुदको, संभलता क्यों है । 
बैठा रहा जिस डाल पर काटता उसी को ,
मशल के जज्वात अपने , मचलता क्यों है ।

"जय कुमार"21/08/14

जख्म बहुत

जख्म बहुत खाये है जमाने के पीठ पर ,
ह्रदय पर आघात हो तो कुछ बात बने ।

जुल्म बहुत ढाये है हमपर इस जमाने ने ,
तेरी मेरी एक जात हो तो कुछ बात बने ।

"जय कुमार" 21/08/14

"हाइकू"

"हाइकू"

होंठ बाँसुरी
कानन हो कुंड़ल 
मोहन मारो

गायन संग
वन में जो घूमत
माखन चोर

माखन चोर
गौवरधन धारी
कृष्ण मुरारी

रास रचाये
माखन चोरी खाये
मन मोहन

यशोदा प्यारो
नंदलाल कहायो
देवकी जायो


मन बसिया
रस रसिया कृष्ण
कण में बसा

कारे तन में
प्रेम को उजारो है
भक्ति में बसो

मोर मुकुट
मुरली के धारक
कृष्ण हमारो

गीता का ज्ञान
कर्म का भान करा
जन सम्भारो

"जय कुमार"20/08/14

Wednesday, 20 August 2014

ह्रदय में


 

                      
                         ह्रदय में खामोशी छाई है ,
                                         भावों का दरिया सूख गया ।
                         हाथों में लहराती तलवारें ,
                                         मानवता का बंधन टूट गया ।
                         वासनाओं की आँधी आई है ,
                                         रिस्तों का भरोसा टूट गया
                         युग का ये कौनसा पड़ाव है ,
                                          इंसान को इंसान लूट गया ।
                         खामोश हुआ जीवन स्पंदन ,
                                          साँसो से ह्रदय जब रुठ गया ।।


                                      "जय कुमार"20/08/14
  

"हाइकू"

चंचल मन
चहुओर घूमता
संयम बिना

राज भोग में
राजा लिप्त रहता
संयम हीन

अनुशासन
नियंत्रण ना होता
भोग में जीता

मद में गज
भुलाता ये जीवन
पीड़ा का भोगी

तन का जोगी
मन का भोगी होता
अंत में पीड़ा

जड़ता मन
करनी मन ने की
तन ने भोगी

तन का रंग
चंद दिवस होता
मन अनंत

"जय कुमार"20/08/14

"मुक्तक"


घरों की दीवार पक्की हो गई है ।
शहर की दुनिया सच्ची हो गई है ।
चकाचौंद जहां का स्वार्थ का आलम ,
रिश्तों की डोर कच्ची हो गई है । ।

"जय कुमार"19/08/14

"मुक्तक

चारों तरफ एक मंजर देखा है
खिले फूलों पर खंजर देखा है
मासूमियत कोमलता कुचलते
सजे तन में मन बंजर देखा है

"जय कुमार" 19/08/14

"हाइकू"

कर्म है धर्म
कर्म पथ जो चला
कृष्णा को पाया

मन मंदिर
तन तीरथ हुआ
मन में कृष्णा

साँवला रुप
अहं विहीन होता
पावन जो है

अहं जो खोता
तिमिर नष्ट होता
मिलती मुक्ति

सृष्टि रचता
पालन जो करता
परम ब्रम्ह

"जय कुमार"19/08/14

मोहन

मोहन मन में ।
तीरथ तन में ।
साँवला बसा ,
जन जीवन में ।

"जय कुमार" 18/08/14

Monday, 18 August 2014

मेरे अरमान



मेरे अरमान भी बड़े सख्त निकले है ।





हर राह में बस काँटे ही काँटे निकले है । 
यार प्यार घर वार रंग देखे है सबके ,
रिस्ते नाते सब खोटे सिक्के निकले है ।।

"जय कुमार"15/08/14

भारत माँ


Photo
भारत माँ के श्री चरणो में , 
सादर शीश झुकाता हूँ ।
बलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज सुनाता हूँ ।

झाँसी की रानी मरदानी ।
तलवारो से लिखे कहानी ।
महल छोड़ रण में लड़ती थी ।
दुश्मन पर भारी पड़ती थी ।
प्राणो की बलि देने वाली । 
स्वराज आग जलाने वाली ।
भारत का स्वाभिमान है जो ,
रानी कि गाथा गाता हूँ ।

वलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज सुनाता हूँ ।

भगत सिंह से वीर हमारे ।
आजादी के थे मतवारे ।
स्वराज्य से यारी करते थे ।
दिल से वतन पर मरते थे ।
चड़ फाँसी विदा हो गये वो ।
अमर अमिट नाम कर गये वो ।
शहीद वीर भगत सिंह जी को ,
श्रध्दा सुमन चढ़ाता हूँ ।

वलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज सुनाता हूँ ।

चलि हवा जब दुराचार की ।
अहिंसा का तब मसिहा आया ।
एक देश एक आवाज बनि तब ।
सत्याग्रह की बात चली जब ।
लिखी गई एक नई कहानी ।
देश ने देखी तब जवानी ।
तिरंगे को सम्मान मिल गया ,
स्वराज की बात बताता हूँ ।

वलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज सुनाता हूँ ।

कोई उत्तर कोई दक्षिण का ।
कोई पूरब कोई पश्चिम का ।
कोई तमिल कोई हिंदी का ।
कोई भेद ना सारे हिंद का ।
सबने अपना लहु बहाया ।
भुला दिया गया उनका साया ।
इतिहास भुला रहा जिनको ।
मैं उनको शीश नभाता हूँ

वलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज सुनाता हूँ ।

लाखों शहीदों कि आजादी ।
सम्भाल के रख न कर बर्बादी ।
लोकतंत्र को घुन न लगा अब ।
खुदगर्जी से ऊपर उठ अब ।
अपने वतन को देखो भाई ।
आपस में ना करो लड़ाई ।
जो ना माने हार काल से ,
उन वीरो कि गाथा गाता हूँ ।

वलिदानों की अमर कहानी ,
तुमको आज सुनाता हूँ ।

भारत माँ के श्री चरणों में ,
सादर शीश झुकाता हूँ ।
वलिदानो की अमर कहानी ,
तुमको आज सुनाता हूँ ।

"जय कुमार"14/08/14

Thursday, 14 August 2014

यार वो पुराना

यार वो पुराना फिर याद आया है ।
सूखे हुए जख्मों पे बहार लाया है ।

बदल गई है मासूमियत की चादर ,
वेहया मुस्कान से चेहरा सजाया है ।

घूँघट की ओट में पल रही सिलवटे ,
सूखे हुए दरिया में उफान लाया है ।

तन पर लिपटे चिथड़ों की बेबसी को ,
आज शहर के उन बच्चो ने दिखाया है ।

पुराने दरख्तों की टहनियाँ बिखरती ,
कोई ना सम्भाले यह दौर में आया है ।

उन परिंदो के पर कटते है हर रोज ,
ईमान तिनको से जिनने घर बनाया है

गमगीन हो गयी मौत मंजर देखकर ,
वालिद ने औलाद को कँधा लगाया है ।

उन दरख्तो की हिफाजत कौन करे ,
जिनपे अब कोई फल ना आया है ।

मुफलिसी मजबूरी का ऐसा आलम ,
बीमार माँ ने बच्चों को भूखा सुलाया है ।

"जय कुमार" 13/08/14

Friday, 8 August 2014

अपनी जिंदगी

अपनी जिंदगी को दुस्वार ना कर । 
ख्वावों को अपने लाचार ना कर । 
अश्क रोक दे प्यार का तकाजा है , 
मेरा तू टूटकर यूँ इंतजार ना कर । 

"जय कुमार"08/08/14

कर्तव्यों को

कर्तव्यों को हम पीछे छोड़ आये ।
अपने माँ बाप से मुह मोड़ आये ।
चारो धाम की यात्रा को चले है ,
घर में साक्षात् ईश्वर को छोड़ आये ।

"जय कुमार"8/8/14

यादों के

यादों के कारवाँ आके मचल जाते ।
हँसते रोते वो दिन निकल जाते ।
बाबा की साईकिल की आहट सुन ,
मुरझाये वो चेहरे जब खिल जाते ।

"जय कुमार"08/08/14

माँ की

किसी ने नाकारा कहा । 
किसी ने बेगारा कहा ।
माँ की नजरोँ ने देखा ,
आँखों का तारा कहा ।

"जय कुमार" 7/08/14

जिसके साथ

जिसके साथ कर्म बल वो ना विचारा होगा ।
मजबूरियाँ लाख सही उसका किनारा होगा ।
संघर्स से जीना सीख लिया जिस इंसान ने ,
निश्चित उसका बुलंदियोँ पर सितारा होगा ।

"जय कुमार" 07/08/14

"हायकू"



जीवन नाव
डगमग होती है 
धैर्य का माँझी 

सूरज तेज
झुलजता ना पौधा
पत्ती रक्षक

प्रकृति देती
व्यवस्था जीव करे
अपनी रक्षा

सूर्य उगना
उगकर ढलना
चक्र नियत

समय चाल
जीवों का बड़ा होना
मृत्यु को पाना

नियत वक्त
रुके ना थके ना जो
कुदरत का

पुष्प खिलता
मुरझाता गिरता
बिखर जाता

प्रकृति नया
खिलाती पुष्प फिर
क्रम चलता

आज का कल
कल होगा फिर से
कल जो आज

"जय कुमार" 7 /08/14

नैतिकता की

नैतिकता की बात कर , करते काले काम ।
ईमान के संदूक में , रखते काले दाम । 
रखते काले दाम , वही करते रखवाली ।
पाते वो ईनाम , जनता जा भोलि भाली ।

"जय कुमार"06/08/14

हौंसलों को पर

हौंसलों को पर दिया करो ।
कभी अपने को जिया करो ।

जिंदगी जीना हो सम्मान से ,
थोड़ा थोड़ा ही पिया करो ।

खूब रंज पाले हो दिल में ,
बेवजह ही हँस लिया करो ।

जिससे मिले दिल को सुकूँ ,
काम वो भी कर लिया करो ।

चिराग अँधेरे से हारते नहीं ,
एक चिराग जला लिया करो ।

मौसम की रवानी को देखके ,
बूँदों में ही भीग लिया करो ।

जो दिल ना दे गवाही यार ,
काम हरगिज ना किया करो ।

रंग बदलती दुनिया में अब ,
एक पहचाँ बना लिया करो ।

इश्क याद आये महफिल में ,
अपने अश्क छुपा लिया करो ।

मुहब्बत की गैरत मर जाये ,
जज्जवात दबा लिया करो ।

गुल्सिता को हो जरुरत तेरी ,
हँसते हुए कुर्बानी दिया करो ।

सारे गमों को कह अलविदा ,
जिंदा दिली से जिया करो ।

"जय कुमार" 06/08/14

"मुक्तक "


टूटी हुई साँसों पर रवानी आई है 
आज फिर कोई याद पुरानी आई है 
जहन में आये वो खूबसूरत लम्हें ,
रुठी हुई रुह पे फिर जवानी आई है 

"जय कुमार"5/08/14

गम के साये


गम के साये में खुशियाँ ना पलने दे ।
अश्को से भरे समुंदर अब बहने दे ।
नाकामी को कामयाबी बना अपनी ,
छिपाए हुए अपने जज्बे को चलने दे ।

"जय कुमार"05/08/14

कोलाहल में

   "हाइकू"     

कोलाहल में 
आवाज दब गई 
मासूम की थी 

धन की आड़ 
चलता है चाबुक
निर्बल खाल

मुफलिसी में
याद नहीं फसाने
याद है रोटी

चले जो सीधा
उल्टा कहे दुनिया
आज की रीत

ईमान दीप
निकला जो मन से
पुँहुचा हाट

कोई डगर
मिलती ना मंजिल
होती अपूर्ण

काल के जाल
हर तरफ होते
बचना कर्म

"जय कुमार"5/08/14

Tuesday, 5 August 2014

अराजकता



  1. अराजकता फैल रही , राजा जब शैतान ।
    नगर डगर घूमत रहें , भूखे जे हैवान ।
    भूखे जे हैवान , लगाम लगावे न कोई ।
    लाठी जिसके हाथ , जा भैँस उसी की होई ।

    "जय कुमार"

वासना इंसान


वासना इंसान को हैवान बना देती है
साधना जीवन को वरदान बना देती है
किसी ने ना देखे अपनी आँखो से ईश्वर
भावना पाषाण को भगवान बना देती है

"जय कुमार"04/08/14

ये तेरा आसियाना

ये तेरा आसियाना है जो
फूलों से घिरा ठिकाना है जो
खूबसूरत जमाने के सपने
फँसा इसमें दीवाना है जो
मिलकियत तेरी बस पानी है
एक दिन तो इसे बह जानी है
सोहरत में डूब गया इतना तू
यह पल दो पल की कहानी है
जाति धर्म के फंदो में फँसा
रंग रुप के इन कुंदो में फँसा
इस तन की विसात क्या है
चार दिन के चिन्हो में फँसा
रजनी भोर की निशानी है
भोर रजनी की कहानी है
दोपहर के सूर्य की रोशनी
साँझ आने पर पुरानी है

"जय कुमार"01-08-14

मुझे वक्त के

मुझे वक्त के हाथ में सौंपता रहा ।
जहर मिला प्यार परोसता रहा ।
साथ चलने को खड़ा होता रहा मैं ,
मेरे जज्बे को खंजर खौंपता रहा ।।

"जय कुमार"

जातिवाद का


जातिवाद का दंश झेल रहा हूँ मैं ।
छुआछूत का कंश झेल रहा हूँ मैं ।
हमें इस देश में दलित कहते यारो ,
हरिजन का हंस झेल रहा हूँ मैं । ।

"जय कुमार"31/07/14

खंजर की नोक

खंजर की नोक पर अमन पल रहा ।
बंजर जमीन पर गुलाब खिल रहा ।
बदनसीबी देखो उस वक्त की जब ,
खुदगर्जी से बेटा बाप से मिल रहा ।।

"जय कुमार"31/07/14

बचपन में कागज

बचपन में कागज की कश्ती से खेलते रहे
जवानी में जमाने की मस्ती से खेलते रहे
एक दौर आया जब साथ छोड़ने लगा तन
आभास हुआ वजूद की हस्ती से खेलते रहे

"जय कुमार"30/07/14

हमारे चमन

हमारे चमन की फिजाओं मेँ अमन हो
अमन के पैगामों से भरा यह गगन हो
मजहबी नफरत को ना हो कोई जगह
वतन में ईद व दिवाली का मिलन हो

ईद मुबारक हो मित्रो . .

"जय कुमार "29/07/14

नेकी बदी अपने

नेकी बदी अपने आप से साँझा कीजिये
जीवन की हर घड़ी को बाँदा कीजिये
दर्पण ना देखे तो धूल जमा हो जाती
नित अपने आप को भी माँझा कीजिये

"जय कुमार"29/07/14

चाँद की चाँदनी

चाँद की चाँदनी रहेगी जब तक
पवित्र गंगा सिंधु बहेगी जब तक
जब तक चमकेगा सूरज नभ में ,
भारतीय सभ्यता जियेगी तब तक

"जय कुमार"28/07/14

जीवन की


जीवन की डगमग नौका पार हो
साँसे थोड़ी सत्य जीवन अपार हो
जाऊँ संसार छोड़ आप से मिलने
गले में सदकर्म पुष्पों का हार हो

"जय कुमार"27/07/14

लहु ही लहु

लहु ही लहु दिखेगा जब
रखवाला खंजर होगा ।
अमन चैन छिन जायेगा
यही एक मंजर होगा ।
दूर दूर राहत ना दिखेगी
राह चिन्ह मिट जायेंगे ,
मिट्टी आग हो जायेगी तब
हर खेत बंजर होगा ।

"जय कुमार"27/07/14