Wednesday, 5 November 2025

सत्य अहिंसा  प्रेम  से,‌  जीत   लिया‌  संसार ।
सजल आंख की प्रीत ही, जीवन का आधार ।।

"जय कुमार "

Tuesday, 14 October 2025

ग़ज़ल

कमजोरियों  को   पार  करते  चले  गये 
हम  रास्ते  भर  विचार करते  चले  गये

जीतना भी मुश्किल हारना भी मुश्किल 
जीतकर  भी  हम  हार  करते  चले गये

एक अर्से  से   शिद्दत  से  पुकारते  रहे
हर  कोशिश  बेकार  करते   चले   गये 

हौंसला   अफजाई   होती   कहां   यहां 
काम  हौसलों के  पार  करते  चले  गये

माफ करते रहे हम गुस्ताखियां जिनकी
लगातार  वही   वार   करते   चले  गये 

बेहयाई   रुसवाइयों  का  आलम    रहा 
उससे   ही  जय  प्यार  करते  चले  गये 

"जय कुमार " 







Saturday, 30 August 2025

बलि जो  करे  वह‌  इंसान  कैसे हुआ ? 
दर्द और खौफ से अनजान कैसे हुआ ?
जिसके हृदय  में करुणा  बसती नहीं ,
बलि जो मांगे वह भगवान  कैसे हुआ ?

"जय कुमार "


Thursday, 24 July 2025

लतीफों ने जो छोड़ा

लतीफों ने जो  छोड़ा  है 
हास्य  व्यंग  का  रोड़ा है
मंचों  की अंधी चाहत में 
कविता  ने  दम  तोड़ा है 

जय कुमार 

Thursday, 17 July 2025

जिनके कंधों पर

जिनके कंधों  पर बोझ होता है 
उनके जीवन में  ओज  होता है 
जिनको‌  जिम्मेदारियां  नही हो
उनका जीवन भी बोझ होता है 

"जय कुमार "

Saturday, 12 July 2025

जो तलबा चाटे हैं

जो  तलबा  चाटे हैं 
वो  हलवा  खाते हैं 
यहां स्वाभिमानी के  
घाटे   ही   घाटे   हैं 

"जय कुमार "११/०७/२५



Friday, 11 July 2025

नज़रें जमाने के सामने ऐसे झुका गई

नज़रें  जमाने  के सामने झुका गई
राज  सारे ‌ अपने दिल में दबा गई
बीज  से ही  तो फूल फल बनते हैं 
मेरी ही कमी थी जो उसमें आ गई

"जय कुमार "११/०७/२५

 

Wednesday, 9 July 2025

करें सवाल हम वाजिब ये खेल खेलने वालों से

जाति  धर्म और भाषा  पर ज्ञान पेलने वालों से
लाशों  पर  सियासती  रोटियां  बेलने  वालों से 
राज  चलाने आये हो या  राष्ट्र  जलाने आये हो
करें सवाल हम वाजिब ये खेल खेलने वालों से

"जय कुमार "

Sunday, 6 July 2025

जो वादे किये थै सारे वादे भुलाने

जो  वादे  किये  थै  सारे  वादे भुलाने के लिए 
यादों  के  सारे   पुलिंदे अपने जलाने के लिए 

मेरे भरे  पूरे  बाग  को   उजाड़  कर चली गई 
केवल रक़ीब के दो फूलों को खिलाने के लिए 

*जय कुमार "6/7/25


जो वादे किये थै सारे

जो  वादे  किये  थै  सारे वादे भुला दिए 
यादों  के  सारे  अपने  पुलिंदे जला दिए 
मेरे  पूरे  बाग  को उजाड़  कर चली गई 
केवल रक़ीब के तूने दो फूल खिला दिए 

*जय कुमार "


Wednesday, 25 June 2025

सुरक्षा के नाम पर

सुरक्षा  के नाम  पर  बंदूक लिए बैठे हैं 
कल्याण के नाम पर संदूक लिए बैठे हैं
धमकाते  बहकाते   डराते  हें रोज रोज 
कुछेक  ही यहां बम अचूक लिए बैठे हैं 

"जय कुमार "
 



Friday, 20 June 2025

तुम्हारी खुशबू ने जो सारा

तुम्हारी  खुशबू  ने जो सारा घर महकाया है 
गुलाबों  ने  ही  खुद आके सबको बताया है 

मौसम बदल रहा है बदल रही है आवो हवा
ख्वाबों  में ही सही उसने प्यार जो जताया है

"जय कुमार "




Sunday, 15 June 2025

मुकम्मल हूं जिनसे उनका

मुकम्मल हूं जिनसे उनका ही ईमान  लिए बैठे हैं 
सबकुछ है उनका जो हम आसमान  लिए बैठे है
मंदिर,   मस्ज़िद, चर्च   गुरुद्वारा  में  ढूंढने  वालों 
घर में ही मां बाप के रूप में भगवान लिए बैठे है 

"जय कुमार "🙏🙏१६/०/२५

Monday, 2 June 2025

उनसे लड़ना झगड़ना

उनसे   लड़ना  झगड़ना   खूब  होता  था 
आंख से मुंह तक बिगड़ना खूब होता था
ऐसा हुआ गर  कुछ  पहर  चुप  रह जाये
रोकर  गले  से   लगना    खूब   होता था

"जय कुमार "2/6/25



Sunday, 1 June 2025

साथ रहकर भी साथ रहने न

साथ  रहकर भी साथ रहने न दिया
नम आंखों  से  आंसू  गिरने न दिया 
सोचता  था  कि  प्रेम  जितेगा मगर
क्रूर नियति ने हमको मिलने न दिया

"जय कुमार "


 

Saturday, 17 May 2025

आंसुओं की रीत

आंसुओं की रीत न समझे 
प्रीत  का  संगीत न समझे
हार जीत के भंवर फंसा है 
हार की वो जीत न समझे 

"जय कुमार "17/0/25

Monday, 21 April 2025

कोई अगलू कोई

कोई  अगलू कोई  जुम्मन फिर मिल न पायेगा
तेरी नफरत  का ये पत्थर अब हिल  न पायेगा 
खून  में   जो  दौडता   मजहब   का  खारापन
ह्रदय में  पुहुंचकर  कभी यह  संभल न पायेगा 

"जय कुमार "

Saturday, 19 April 2025

आम के आम गुठलियों

आम  के आम  गुठलियों के दाम चाहिए 
बिना  काम  के  जमाने  में  नाम चाहिए 
ईमान   की   बात  ही  बेमानी सी लगती 
मेहनत किसी की किसी को नाम चाहिए 

"जय कुमार "

Monday, 7 April 2025

मौन की भाषा कभी मगरुर हो नहीं सकती 
दृढ़ संकल्प हो तो कभी हार हो नहीं सकती 
जीतने  के  लिए  हराना  जरुरी  नहीं दोस्तों 
हराकर  सच्ची  कभी   जीत हो नहीं सकती 

"जय कुमार

Tuesday, 1 April 2025

घर की दीवारों को दरकते देखा
जमाना रास्ता बनाने लगा ।

जय कुमार

डर जाये वह हस्ती कैंसी

डर  जाये  वह हस्ती कैंसी 
लुट जाये वह  बस्ती कैंसी 
तूफ़ानों  का जोर बहुत हो
डूब जाये वह कश्ती कैसी 

"जय कुमार" 

Monday, 24 March 2025

ऐसा कोई कार्य नहीं

ऐसा  कोई  कार्य  नहीं  जिसमें  मानव  समर्थ नहीं 
शर्तों से मुक्त हो जा जीवन  निर्वाहन कोई शर्त नहीं 
संघर्षों का जीवन उतना  जितना  मन स्वीकार करे
निज में  प्रसन्न रह न सके ऐसे जीवन का अर्थ नहीं 

जय कुमार २५/०३/२०२५

Tuesday, 4 February 2025

चोरों  को  चोर    पसंद   आये 
झूठों  को  झूठ   ही  मन भाये
स्वार्थ  सधता  हो  जिससे  भी
उसके  ही जग गीत  गुनगुनाये

गिरगिट की तरह  बदलते रूप 
बाहर  उजले अंदर  से  कुरूप 
मक्कारी का  लगे  मीठा मीठा 
मेहनत   करने   में   लागे  धूप 

कचरा    कर्कट  मन  में  भरके
चापलूसी   का    सेहरा  रखके 
बनते    फिरते   वो     ठेकेदार 
ज़मीर  को   चरणों   में   धरके


"जय कुमार "






Thursday, 23 January 2025

उसूलों  पर आये  तो अड़ जाने का ।
खुद्दारी  पर आये  तो लड़ जाने का ।।

झूठो  में गर सच के  साथ रहना है ।
सच्चाई पर आये तो भिड़ जाने का ।।

"जय कुमार "

Tuesday, 14 January 2025

उनकी तरक्की देखकर हम हाथ मलते थे ।

किसी की  तरक्की  देखकर  हम  मचलते  हैं ।
अहं  में अकड़कर हम मतंग मदहोश चलते हैं ।
श्मशान  में  देखा  जब जलती   चिताओं को ,
फिर अपने हिसाब किताब पर हाथ मलते हैं ।।

"जय कुमार"

Saturday, 11 January 2025

मैंने  जीवन  उनके  लहजे   में  जी  लिया  होता 
उसकी मर्जी को उसूलों की तरह ही  लिया होता 
मुझपर  भी  बरसती  फिर  ये  मेहरबानियां तेरी 
जो सच न बोलता और होंठों को सी लिया होता 

"जय कुमार "११/०१/२०२५


Tuesday, 7 January 2025

कमजोर था मजबूर था

कमजोर था मजबूर था फिर भी चलना हीं पड़ा 
जमाने की  चुनौतियों  से  फिर  मिलना ही पड़ा 
बैसाखियों  के हाथ कब तक साथ निभाते मेरा
पत्थरों से  भिड़ने के लिए पत्थर बनना ही पड़ा

"जय कुमार" ०७/०१/२०२५

हमसे खफा होते रहे

हमसे  खफा  होते रहे
हमसे  जुदा  होते  रहे
हम इबादत करते गये
और वो खुदा होते रहे 

"जय कुमार "

Sunday, 5 January 2025

जिंदगी को बिखरना है

जिंदगी को बिखरना है  बिखर जाने दो 
गमों  को  निखरना  है  निखर  जाने दो

रंजिश   है   मेरी  मेरे   ही    मुकद्दर  से 
गर नब्ज़ है तो नब्ज़ का  असर जाने दो

"जय कुमार"