Friday, 31 October 2014

हाइकू "

सजके चला
शहर की गलि में   
जाने के बाद

नहाया आज
सुगंदित जल में
प्यास न बाकी

चला हवा में
सर पर बैठाया
साँस न बाँकी

आग से मिला
प्रकृति के आगोश
बिखर गया

आरम्भ यही
छलाबा रहा सदा 
अंत था यही  

"जय कुमार "1/11/14

खुद को

खुद को जीता बंदगी ने याद किया ।
जीते जमाने पसंदगी ने याद किया ।
जीतकर भी रोते देखे हारे भी हँसे ,
दिल को जीता जिंदगी ने याद किया ।
"जय कुमार"29/10/14

कोई श्रृँगार

कोई श्रृँगार लिखता है ।
कोइ अँगार लिखता है ।
जमाना कहता है मुझसे
तू तेरा प्यार लिखता है ।।
किसी को रब दिखता है ।
किसी को नभ दिखता है ।
हम अब कैँसे कहे यारो ,
मुझे तो जग दिखता है ।।
किसी को काम दिखता है ।
किसी को जाम दिखता है ।
जानता ये जमाना यारो ,
मुझे तेरा नाम दिखता है ।।
किसी को राज दिखता है ।
किसी को साज दिखता है ।
सब जान लो मेरे यारो ,
मुझे बस आज दिखता है ।।
कोई खोता नजर आया ।
कोई रोता नजर आया ।
हालात हो जाये चाहे जैसे ,
मैं तो गाता नजर आया ।।
किसी का मीत लिखता है ।
किसी का गीत लिखता है ।
कलम उठाता जय यारो ,
किसी की प्रीत लिखता है ।
"जय कुमार"29/10/14

"हाइकू"


ठंडी आहट
शरमाई हो धूप
बदली रुत
अंबर साफ
तारे चमक उठे
दीपक जले
परिवर्तन
खुशहाल जिंदगी
गहरा राज
रवानी होगी
शहनाई बजेगी
सजेगी धरा
धरती पर
बीज नया डलेगा
नया जीवन
"जय कुमार"29/10/14

राम नाम

राम नाम की लूट में , भरोसा लूट जात ।
भावना भूख से मरे , लूटन वारे खात ।।
"जय कुमार"29/10/14

रुसवाई मुझको

रुसवाई मुझको लूटती चली गई ।
तकदीर हमारी फूटती चली गई ।
भरम के हाथ निकले न पैर यारो ,
उम्मीद की साँस टूटती चली गई ।।
"जय कुमार"29/10/14

उसके दामन

उसके दामन को लहुलुहान किया ,
मेरे दामन पर भी दाग लगे होगे ।
सोया नहीं इबादत की रात थी ,
सोये खुदा शायद अब जगे होगे ।
गया जो आया ना लौटकर कभी ,
सच फरमाया जन्नत में मजे होगे ।
वेवक्त सोया कफन नसीब नहीं ,
मुफलिसी के मर्ज फिर सजे होगे ।
तूफान आया उड़ गई तेरी हस्ती ,
उँगली उठाने वाले भी सगे होगे ।
अँधेरों में रहा शहनाई सुन अपनी ,
सोचता गैर के घर बाजे बजे होगे ।
"जय कुमार"28/10/14

साँस मुश्किल

साँस मुश्किल से चलती रही ।
ख्वावों में आश मचलती रही ।
ये तो बदनसीबी थी खुशी की ,
गम के साये में जो पलती रही ।।
"जय कुमार"27/10/14

कलियों को

कलियों को मरोड़कर मिला क्या ?
दिल के स्पंदन तोड़कर मिला क्या ?
तमन्नाओं ने कफन पहन ही लिया ,
चंद साँसों को छोड़कर मिला क्या ?
"जय कुमार"26/10/14

जीते जी

जीते जी भोजन नहीं , बाद मृत्यु के भोज ।
अहंकार के दामन में , जीवन को ना खोज ।।
"जय कुमार"26/10/14

अच्छाई

अच्छाई को वंदन है ।
बुराई का खण्डन है ।
जिसका मन सच हो ,
उसका मन चंदन है ।।
"जय कुमार"26/10/14

"हाइकू"


जुदा हो गये
मिलेंगे एक दिन
फलक पार
जल जा अहं
जीवन की आग में
यात्रा अनन्त
पाया जो खोया
नियम प्रकृति का
रहा अटल
ना जटिलता
विवेकहीन जीव
जटिल मन
"जय कुमार" 25/10/14

कैंसे कहूँ

कैंसे कहूँ की दगा है ।
मेरा कातिल सगा है ।
मुँह खोला जो मैंने ,
बफा पे दाग लगा है ।
"जय कुमार"24/10/14

ये मत पूँछो

ये मत पूँछो की घाव कहाँ लगे है ।
दिल की गहराई के वो दर्द जगे है ।
मारने वाले भी यहाँ मेरे सगे है ।
जनाजा ले जाने वाले भी सगे है ।
"जय कुमार"24/10/14

लक्ष्मी

लक्ष्मी लक्ष्मी सब कहे , भूल गये सब राम ।
दीपावली के पर्व पर , सबके सब कुछ दाम ।।
"जय कुमार" 22/10/14

Wednesday, 22 October 2014

"दोहा"

स्वदेशी को प्रचार करे , लात चाइना माल ।
जय अज्ञानी ना समझो , राजनीति को जाल ।।
"जय कुमार"21/10/14

"दोहा"


राम चरण में बैठ के , राम राम मैं गात ।
राम भजे सो राम को , कोई न पूँछे जात ।।
"जय कुमार"21/10/14

"दोहा"


दीपावली के पर्व पर ,जलमग दीप हजार । 
एक दीप दिल में जले , हो जाये उजयार । ।
"जय कुमार"21/10/14

फिजा का बदला

फिजा का बदला रंग सा क्योँ है ?
इंसानो का दिल तंग सा क्यों है ?
क्या कोई वेवक्त सो गया राहों में ,
शहर का हर चेहरा दंग सा क्योँ है ?
"जय कुमार"21/10/14

"दोहा"


निकल पड़े हो सफर पर , अब पीछे ना देख ।
पिछली को तो छोड़ दे , अब आगे की लेख ।।
"जय कुमार"21/10/14

माला जपत

माला जपत साल गये , लेत राम के नाम ।
अहम भूल के देख लो , मन में आतम राम ।।
"जय कुमार"
.

इस दीपावली


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इस दीपावली इक चलन चलाया जाये ।
कुटिया में किसी के दीपक जलाया जाये ।।
मुफलिसी के मारे समाज से है उप्रेक्षित , 
प्यार से मजलूमों को गले लगाया जाये ।
जमाने ने जिसे कीचड़ कह ठुकरा दिया ,
इस कीचड़ में एक कमल खिलाया जाये ।
चेहरे की झुर्रियाँ गहरी हो गई अब यारो ,
बिछड़ी हुई उन खुशियों से मिलाया जाये ।
सदियों से जाग रहे जो सपनो से मिलने ,
ख्वावो को हकीकत करके मिलाया जाये ।
तंग दिल कब तक रहेंगे हम दुनिया में ,
दिलों की दीवारों को अब हटाया जाये ।
टूटे दिल रो भी ना पाये एक अरसे से ,
रख हाथ उनके कँधों पर रुलाया जाये ।
तेरे मेरे अक्स में फर्क ना किया रब ने ,
भेद भाव की मीनारों को गिराया जाये ।
काँटों की सौबत में काँटे आये है हिस्से ,
महकते फूलों से अब घर सजाया जाये ।
नफरत की आग बहुत जल चुकी यारो ,
वक्त कह रहा प्रेम का गीत गाया जाये ।
"जय कुमार"20/10/14

अँधेरा

अँधेरा बड़ता रहा ।
उजाला लड़ता रहा।
तम ना बड़ने दूँगा , 
दीपक कहता रहा ।।
"जय कुमार"20/10/14

तेरी मेरी बस

तेरी मेरी बस इतनी सी कहानी है ।
दिल में भरा दर्द आँखों में पानी है ।
बिखर ना जाऊँ टूटकर संभाला है ,
प्रेम पाँस में बँधी अपनी जिंदगानी है ।।
"जय कुमार"20/10/14

आँखो से अश्क

आँखो से अश्क बहाना आसान होता ।
दिल के हालात सुनाना आसान होता ।
कोई कँधे पर हाथ रख साथ चलता ,
तो टूटकर बिखर जाना आसान होता ।।
"जय कुमार"19/10/14

बुराई बुरी है

बुराई बुरी है , तो दमन कर ।
लड़ाई खड़ी है , तो अमन कर ।
प्रकाश से ही तम नाश होता , 
भलाई भली है , तो नमन कर । ।
"जय कुमार"19/10/14

Sunday, 19 October 2014

बेमुरव्वत तेरी


बेमुरव्वत तेरी तस्वीर जला ना पाया ।
दिल बाग में और फूल खिला ना पाया ।
ख्वावों में रोज हम तेरे अक्स से मिलते ,
मुहब्बत तेरी आज तक भुला ना पाया ।।
"जय कुमार"19/10/14

तेरी मेरी जीत


तेरी मेरी जीत में बस इतना अंतर है
तू जीतकर जीता है मैं हारकर जीता हूँ
इश्क और दोस्ती में बस इतना फर्क है
तू पहलू में रोता है मैं कंधे पर रोता हूँ
"जय कुमार"18/10/14

जवानी की कहानी

जवानी की कहानी में देश पर कुर्बानी लिख देना ।
खून में आयी रवानी अब स्वाभिमानी लिख देना ।
देश की माटी ने इज्जत से दो गज जमीन दी मुझे ,
गाथायें मत लिखना कब्र पर बलिदानी लिख देना ।।
"जय कुमार"18/10/14

जो


जो
रहा
साथ में
सुकून ना
अरमान था
रहा ना साथ वो
नियति के खेल में ! !
पा
सका
जिसकी
चाहत ना
खोया जो प्यारा
संतुष्ट कभी ना
क्रम यही चलता !!
जा
सका
जहाँ में
जाना ना था
जाना जहाँ था
वहाँ ना पुहँचा
जीवन चला गया !!

जाओ
प्रकाश
तम बड़ा
हराने तुम
समय कठिन
आशा एक ही तुम !!
"जय कुमार"18/10/14

भरम हमारे


भरम हमारे अब सब टूट गये ।
दिल की दौलत को वो लूट गये ।
आँधी ने घरौंदे पर कहर डाया,
पिछली रुत के साथी छूट गये ।
"जय कुमार"17/10/14

"हाइकू"



बंद लिफाफे
तकदीर अंदर
पड़ते कैंसे
लुटा फूल था
खुशबुओं का जब
महके कैंसे
जज्बा नहीं था
मंजिल बड़ी दूर
बढ़ते कैंसे
तूफान बड़ा
दीपक अकेला था
जलता कैंसे
मुफलिसी में
पेट था खाली खाली
चलते कैंसे
घर हवा में
पाँव धरती पर
रहते कैंसे
हम खड़े थे
जल आग के बीच
बढ़ते कैंसे
"जय कुमार"

हकीम के पास


हकीम के पास जाकर मर्ज दिखाना भूल गये ।
कुदरत से जो पाया कर्ज चुकाना भूल गये ।
मानव बनाया था हमको मिलकर रहने को ,
मानवता का भी हम फर्ज निभाना भूल गये । ।
"जय कुमार"17/10/14

रिश्तों


रिश्तों में ये मिलावट कैंसी ।
जज्वातों में सजावट कैंसी ।
राह हो लंबी जब मंजिल की ,
मुसाफिर को थकावट कैंसी ।।
"जय कुमार"16/10/14

"दोहा"


"दोहा"
जीण क्षीण तन हो रहा , छोड़ रहा अब बोझ ।
पंक्षी डाल से उड़ रहा , नया ठिकाना खोज ।।
"जय कुमार"16/10/14

हजारों तमन्नाओं


हजारों तमन्नाओं ने दम तोड़ा है !
दिल की गहराई में ,,,बम फोड़ा है !
मसल पत्थर को,, रेत बना डाला ,
जमाना कहता है कि कम तोड़ा है !!
"जय कुमार"15/10/14

राज पाठ


राज पाठ सब छूट गए , आती देखी साँझ ।
सौ सौ पुत्रों को जना , रही वाँझ की वाँझ ।।
"जय कुमार"15/10/14

चलो जी


चलो जी फिर एक बार बात करते है ।
गुजरे हुये लम्हों से मुलाकात करते है ।
हालात चाहे जितने भी खिलाफ हो ,
मिलकर , गर्मी को बरसात करते है ।।
"जय कुमार"15/10/14

Tuesday, 14 October 2014

किसी का गीत

Jay Kumar Jain
किसी का गीत बन जाता ।
किसी का मीत बन जाता ।
साथ जो तेरा मिलता यार ,
किसी की जीत बन जाता ।।
किसी साजन से मिल जाता ।
किसी आँगन में खिल जाता ।
मजबूर ना होता जीवन जो ,
किसी दामन में पल जाता ।।
किसी की साँसोँ में पलता ।
किसी की बातों में खिलता ।
अभिप्रेरणा जो तू बन जाता
किसी की राहों पे चलता ।।
किसी की प्रीत बन जाता।
किसी की रीत बन जाता।
तू स्वर अगर बनता तो ,
किसी का संगीत बन जाता।

"जय कुमार"14/10/14

तेरा मेरा

तेरा मेरा एक गीत हो ।
हमारी ऐसी प्रीत हो ।
दुआएँ निकले दिल से ,
मन मीत की जीत हो ।
रब सम अपना मीत हो ।
हर हार में भी जीत हो ।
बंदिसे ना हो अब कोई ,
नई एक प्रेम की रीत हो ।
"जय कुमार"14/10/14

ना


ना
कर
इतना
गुरुर तू
मिट्टी की कृति
पुरानी तो होगी
टूटेगे जिस दिन
कहानी समाप्त होगी
जाना ही होगा तुझे तब
मिट्टी मिट्टि में मिल जायेगी !!

"जय कुमार"

कर
इतना
गुरुर तू
मिट्टी की कृति
पुरानी तो होगी
टूटेगे जिस दिन
कहानी समाप्त होगी
जाना ही होगा तुझे तब
मिट्टी मिट्टि में मिल जायेगी !!

"जय कुमार"13/10/14

भैया धागा

भैया धागा प्रेम का , टूट बिखर जो जाय ।
अबकी ऐसे जोड़ियो , बैरी तोड़ न पाय ।।
"जय कुमार"13/10/14

बढ़ेगा कोई

बढ़ेगा कोई कैसे वहाँ यारो ,
केंकड़ा प्रवृति में प्रवीण जहाँ ।
हर कोई कुदाल लिए खड़ा ,
गड़े मुर्दे को भी सुकून कहाँ ।।
"जय कुमार"13/10/14


जाओ
प्रीतम
चाँद आया
प्रेम आसक्त
चाँदनी है लाया
मंद मंद ठंडक
कहत रीत प्रीत की
मीत के गीत ने बुलाया

"जय कुमार"12/10/14

टूटते बिखरते

टूटते बिखरते दिलों के गीत है ।
बिछड़ते मिलते ये मन मीत है ।
गाया जिनने सदियों प्रेम राग ,
गमों में डूबे सुरों के संगीत है । ।
"जय कुमार"12/10/14

खोजत

खोजत खोजत थक गये , मिला न मन का मीत ।
चार दिनों तक संग रयो , दो दिन की जा प्रीत ।।
"जय कुमार"

खामोशी के

खामोशी के आगोश में जीवन पलते रहे ।
आँधियों के साये में खार पथ पे चलते रहे ।
चले हजार कदम एक मैं तीन शून्य साथ थे ,
जद्दोजहद की आग में अरमान मचलते रहे ।।
"जय कुमार"12/10/14

काले दिलों की

काले दिलों की खूबसूरत मुस्कान देखिए ।
बिना शक्कर के अब मीठे पकवान देखिए ।
चरित्रहीन बन बैठे ठेकेदार समाज के जब ,
दौड़ घोड़ों की गधों के खुरों के निशान देखिए ।
"जय कुमार"07/10/14

गली गली में

गली गली में भावनाओं की दुकान देखो जी ।
टूटते बिखरते अरमानों के निशान देखो जी ।
वक्त ने करवट बदली या रुख बदला हवा ने ,
ईमान के रक्षक बन बैठे बेईमान देखो जी ।।
"जय कुमार"06/10/14