Tuesday, 31 July 2018

आओ  प्रिये  फिरसे  सावन  आ  गया
परदेश  से  अब  घर  साजन आ  गया
रिमझिम  बारिश ने  आग  लगाई  जो
मिलने का मौसम मन भावन आ गया

"जय कुमार "



Sunday, 29 July 2018

चमन की  फिजाओं  में अमन  करना  होगा
अमन के  पैगामों  से अब गगन भरना  होगा
मजहबी नफरत न पले किसी के भी दिल में
ईद  व दिवाली का अब  मिलन  करना होगा

"जय कुमार "

Sunday, 22 July 2018

इक   बूढ़ा  बचपन   में  मर  गया
कम समय में बहुत कुछ कर गया
चलता    रहा   बर्षो    सोते    हुए
आंखें   खुलते  ही   वह  तर  गया

"जय कुमार"

Sunday, 8 July 2018

कदम  बढे  की  कायनात  साथ  देने  लगे
उलझी  हयात को  मुकम्मल बात देने लगे
नियत नेक हो जब तमन्नाओं की चाहत में
फरिश्ते फलक  उस पार से हाथ  देने लगे

"जय कुमार "08/07/2018

Monday, 2 July 2018

कलम जब सियासत का नमक खाने लगे
अपने  आकाओं  का  गुणगान  गाने  लगे
समझना   उस   देश  के  सब  टूटे  आईने
लोग  दुश्मन   को   मेहमान   बनाने   लगे

"जय कुमार"02/07/18

Sunday, 1 July 2018

कटी पतंग का  ठिकाना क्या  होगा
तुमारे  बिन यह  जमाना क्या  होगा
बिन बाती तेल  का चिराग बन गया
उस शख्स का अफसाना क्या होगा

"जय कुमार "१/७/१८