जिंदगी क्या कटी पतंग है
प्रेम की गली क्यों तंग है
चाहा जिसे वो मिला नहीं
दस्तूर से बंधा वो संग है
वादों इरादों की बातें
अहसास सारे क्यों भंग है
एक अर्से बाद देखा उसे
दिल में छिड़ी अजीब जंग है
गहरे जख्म खाये उसने
दिखता नहीं दिल वो अंग है
"जय कुमार "29/08/18