खारों के साथ चलना सीख लिया हमने
मुश्किल के साथ रहना सीख लिया हमने
तूफान हो रवानी पर या हो काल वार
हिम्मत से आगे बढ़ना सीख लिया हमने
लहरों का कहर कस्ती को बढ़ाना होगा
भँवर के साथ जान को लड़ाना होगा
पतवार टूटे चाहे छेद हो जाये कस्ती में
साहिल तक कारवां को पुहुंचाना होगा
रेगिस्तान का ताप जला न पायेगा हमें
आकाश का रुधन रुला न पायेगा हमें
हम मतवाले जिंदगी के, डर हमको कहाँ
जलजला थरा का हिला न पायेगा हमें
"जय कुमार"