समझते समझते समा रहे हैं
पाते पाते सब गमा रहे हैं
बेदखल करके दिल के रिश्ते
दुनिया पे सिक्का जमा रहे हैं
हाथ में खंजर सीने पर बैठ
हमारी सीरत अजमा रहे हैं
मौत तो मुकम्मल मंजिल होती
मौत के लिए कुछ कमा रहे हैं
मुहब्बत रूह से कर ली जिसने
उसको ही जय सिर नमा रहे हैं
"जय कुमार "07/10/19