Monday, 12 October 2020

बेचने  बिकने  का  रिवाज  चल पड़ा है
बच्चा मन मनी  के लिए  मचल  पड़ा है
नैतिक मूल्यों की बलि चढ़ाके लोभ को
जमीर  की  लेके  लाश  निकल  पड़ा है

"जय कुमार"





Friday, 2 October 2020

मेरा  भारत  कैंसे   बदलता  रहा
गांधी कुछ गोडसे पर चलता रहा
जागकर  जिसने जगाया सबको



Thursday, 1 October 2020

भरे हाट में लुट गई, आज तुमारी लाज ।
तार तार  होती रही, सोया  रहा समाज ।। 

बेटी  की  अस्मत लुटी, बाप  हुआ लाचार।
खुद ही तुम काली बनो, उठा लेव हथियार।। 

"जय कुमार "