Thursday, 27 July 2017

ठोकर  खाकर  भी  संभल  जाते  है
अंधेरी  राहों   से   निकल   जाते  है
उनका वक्त भी कुछ नहीं बिगाडता
जो वक्त  के  साथ   संभल  जाते  है

"जय कुमार "


Saturday, 22 July 2017

सावन के बादल फिर  गरज गये
नैना  सूरत   को  तेरी  तरस गये
बन विरह की पीडा मन छाये मेरे
काले बादल आंखों  से बरस गये

जय कुमार २२/०७/१७

चल निकल भी जा मानव अँधेरों से ,
उजाले   को   तेरा    ही   इंतजार  है |
नाकामी  की जंजीरों  को  तोड़ अब ,
कामयाबी  को  तुझसे   ही  प्यार  है |
अपने   बनाए   जाल  में  फँसा   रहा ,
दुनिया  के  छोर  दूर  तलक  फैले हैं ,
नाव  को   मोड़  धारा   के   विपरीत ,
तेरी   मंजिल   सितारों   के   पार है |

निगाहों के धोखे से निकल के अब ,
अपने  आप की भी आवाज सुन ले |
जमाने को  जो  कहना  है  कहने दे ,
अपने आपके  एहसासों को चुन ले |
कथनी  करनी  एक नहीं  होती हो ,
कुछ पहचानने की जरूरत लगती ,
तेरे  अंदर  शक्ति   का   समुंदर  है ,
अपनी भूली क्षमताओं को  गुन ले |

भ्रम  कोई  न पाल  अपने  जहन मैं ,
मानव हो तुमे  अमर  पद  पाना  है |
साँसे चलती ये तन  जीवित रहता ,
तब तलक  यही  तेरा  ठिकाना  है |
किसी मकसद से यहाँ आया  है तू ,
उसको  ही  दिलेरी से  निभा  लेना ,
मिला जो  एक  सफर   पूरा  करके ,
फिर  एक  नये  सफर पर  जाना है ||

"जय कुमार"

Monday, 17 July 2017

चल चला चल चाल बदल ले
उठ जाग अब हाल  बदल ले
मंजिल  तेरी  रास्ता  है   तेरा
चल पंक्षी अब डाल बदल ले

कल की कल पर  रहने भी दे
दुनिया  को कुछ कहने  भी दे
इस  पल  की  खुशी  में जीले
बंदे   अपना  आज  बदल  ले

जीवन   जीना  सीख  न  पाये
हरदम खुशियां भीख में  पाये
विन  स्वर  बाजे  खूब  बजाये
चल  प्यारे अब ताल बदल ले

मेरा     तेरा     करते     करते
बडी   तिजोरी    भरते   भरते
कब  काल  के   मुंह  में  पुँहचे
अब  तू अपना काल बदल ले

बैठ  नाव  मैं   छेद  किये  क्यों
ऊँच नीच  के  भेद किये  क्यों
खुद  फंसने को  बुनते रहे जो
वह अपना अब जाल बदल ले

"जय कुमार"१७/०७/१७







Sunday, 9 July 2017

नजरिया जिनका जैसा है , उनको वैसा ही दिखता है
दिल और दिमाग जो कहता , गीत वैसे ही लिखता है
यूं   तो   हजारों  मिलेंगे  हमको   कलम  के   जादूगर
कबीरा एक नहीं दिखता , जो   फकीरी  में लिखता है

"जय कुमार "१०/०७/१७


आज खिले है कल  मुरझाये  हम  मौसम के फूल नहीं
दहसत का माहौल बना जो जायज और माकूल नहीं
कर्तव्यों  पर  तत्पर रहे  है  डरना  हमने  नहीं सीखा
बना गुलाम करो  तुम शोषण हमको यह  कबूल नहीं

" जय कुमार " ०९/०७/२०१७