मेहनत के हाथों मे , छालों का बसेरा है
सूरज की बस्ती में , फैला क्यों अंधेरा है
विकास व प्रगति क्या खो गए हैं जुमलों में
उजाला कैद हो गया , कैसा यह सबेरा है
सूरज की बस्ती में , फैला क्यों अंधेरा है
विकास व प्रगति क्या खो गए हैं जुमलों में
उजाला कैद हो गया , कैसा यह सबेरा है
"जय कुमार"