Friday, 20 April 2018

मेहनत  के   हाथों  मे , छालों  का  बसेरा  है
सूरज  की  बस्ती  में , फैला   क्यों  अंधेरा है
विकास व प्रगति क्या  खो  गए हैं जुमलों में
उजाला  कैद  हो  गया , कैसा  यह  सबेरा है
"जय कुमार"

Tuesday, 17 April 2018

मौत से मिलकर भी लौट आता  हो।
जिंदगी  तेरा  साथ  जो  निभाता हो।।

आसमान  की  ऊंचाई  पर  रहकर।
पैरों  को अपने  जमीं  पर  पाता हो।। 

भरोसे की नींव भी   

काँटों की बस्तियों मैं  रोज  रहकर।  
फूलों की  खुशबु  बिखेर  जाता हो।।

वादों   के   टूटने    से   टूटे    कैंसे।
भरोसे के  रिश्ते को जो निभाता हो।।


"जय कुमार "१८/०४/१८














Sunday, 1 April 2018

सच को वनवास  मिला  झूठ  को ताज मिला
आवाज गुम  कोयल की गधे को साज मिला
स्वार्थ बेल ने पैर पसारे ढांका है आसमां को
आंखे  तयखानों में बंद  अंधों को राज मिला

"जय कुमार "

रोते तो  हम  भी है  दिखाना  नहीं  आता
दिल में बस गये उन्हे रुलाना नहीं आता
पत्थर  नहीं सीसे का  दिल रखते है हम
टूटते  हम  भी  है  बिखरना  नहीं  आता

"जय कुमार "