Thursday, 31 March 2016

गम अब

गम अब खुशियां मनाने लगे हैं
हंसकर बाते ,,,,,,,,,बनाने लगे हैं

जीवन कटता ,,,,,,रहा बाबरों में
शूल के फूल ,,,,,,खिलाने लगे हैं

नब्ज ए हयात,, रुकी रुकी सी
प्यार के पल याद,,आने लगे हैं

हम हिम्मत लाये सच कहने की
दुश्मनी अपने ,,,,,निभाने लगे हैं

रिबायत नहीं जमाने की हमको
महफिल में हम  ,,,दीवाने लगे हैं

मुकद्दर मुकम्मल ,,,,होगा हमारा
गमों से खुशियां ,,,,,चुराने लगे है

"जय कुमार "३१/०३/१६







Monday, 28 March 2016

हरियाली

हरियाली के साथ सभी हैं , पतझड़ में बिछड़े हुए है
उन परिंदों कि कौन सुनता है , जिनके घर उजड़े हुए हैं

मुफलिसी के मर्ज सजते है , दरवाजा देख झोपड़ी का
जख्म में रंगत आई हुई , खुशि में कैंसे झगड़े हुए हैं

"जय कुमार "२८/०३/१६

Sunday, 27 March 2016

फरेबी

फरेबी बातों पर भरोसा ,,,,,,,, करता रहेगा
अपनी कश्ती में तू छेद ,,,,,,,,,,करता रहेगा

मासूमियत का फायदा ,,,,,,,जमाना उठाता
खुदगर्जो का खिलौना तू ,,,,,,,बनता रहेगा

खुदपर रख भरोसा गफलत में न रह यार
भरम दुनिया पे कर खुद को छलता रहेगा

पर्वत को हिलाने की ,,,,,,,,हिम्मत है तुझमें
क्या कंकड की चोटों से ,,,,,,, डरता रहेगा

अपनी मंजिल तू तय कर रास्ते बना अपने
बने रास्तों पर कब तक जय ,चलता रहेगा

" जय कुमार "२८/०३/१६

Friday, 25 March 2016

जबसे तुमने

जबसे तूने दिल के दरवाजे पर दस्तक दी है
बेसुद होकर हमने तेरी,,  बस बन्दगी की है

हम मौत के करीबी थे,, यम यार था हमारा
सांस में रहा तु इक ,,,,, तेरी ही जिंदगी जी है
 
नशे में हूं मैं कहता अब ये कमबख्त जमाना
तेरी मोहब्बत कि हमने ,,,जबसे शराब पी है

दुश्मन बनी ये दुनिया धूप ही धूप मिली मुझे
तेरे साथ जीने मरने की , जबसे कसम ली है

"जय कुमार"२५/०३/१६