Monday, 27 February 2017

इक परिन्दे  का  दर्द  भरा  फसाना था
कटे थे पंख दूर तलक  उड़  जाना था
आंधी के  साथ  बारिष  घनघोर आई
बच्चे   थे  छोटे   घौंसला   पुराना  था

सैय्याद की नजर थी बेदर्द जमाना था
कंधे झुक चुके थे बोझ  तो उठाना था
भूख रोज लगती प्रकृति प्रतिकूल हुई
पेट में   लगी  आग घर  में न दाना था

जिंदगी  के  कहर  में फर्ज निभाना था
अपनों के  लिए जीवन को खपाना था
टहनियों  का साथ तेज  हवा के झोके
जड़े  उखड़ने  लगी पेड़ भी पुराना था

जय कुमार

Sunday, 26 February 2017

हिन्दु मुस्लिम राग  चलाकर
दंगाई    तुम  बात   चलाकर

उच्च  पद  की   गरिमा  भूले
प्रजातंत्र   की    महिमा  भूले
वोट   का  सौदा  करने  चले
जात पात कि बात  चलाकर

बडी  कुसल  शैली  नेता जी
बड़ी  सफल   रैली  नेता  जी
जिंदा से  वोट  लिया  आपने
मुर्दो की  फिर बात  चलाकर

गधा   विचारा   सकते  में  है
चुनाव   के   वो   रस्ते  में   है
मोल  हमारा  कम   हो   गया
आस्तित्व  की बात चलाकर

अयोध्या  वासी  है   रखवारे
चुनाव के  वक्त  सबसे  प्यारे
धार्मिक  भावना  से  खेले हो
राम मंदिर कि बात चलाकर

क्या कुर्सी  का  मोल  तुमारा
क्या वोटो  का  मोह   तुमारा
वोट बटोरने निकले हो क्यों
जहरीला  तुम बात चलाकर

"जय कुमार "२७/०२/२०१७



Monday, 20 February 2017

तन्हा  अकेला   घूमता  हूँ  में  तेरे  शहर  में |
सहारा जीने का ढूँड  लेता हूं  तेरे  कहर  में ||

वक्त की मार है  या मेरा  कल  सामने  आया ,
टूटता जा  रहा हूँ दोस्त मैं हर इक  पहर  में |

जमाना हंसकर कहने लगा  दीवाना मुझको ,
मुहब्बत दिखती है मुझको क्यों तेरे जहर में |

पथराई नजरों का  कहर  झेल रहा  हूं दोस्त ,
नाम मेरा जबसे उछाल दिया है तूने शहर में |

दिल के  जज्वात आज भी हरे भरे बाग बने है ,
गिरा  लिया  हो  चाहे अब  तूने मेरी  नजर में |

सीख लिया है  हमने  जज्वातों  को समझाना ,
यादे ही काफी है जय इस जिंदगी के सफर में ||

  "जय कुमार"

Friday, 17 February 2017

कदम कभी थकते नहीं , जीवित हो जब आश !
तम   का  सीना  चीर  के ,  रोज   करे   प्रकाश !!

"जय कुमार "

Tuesday, 14 February 2017

गध्धे की बारात में  , घोड़े का  क्या  काम !
कागा जब सरपंच हो , कोयल हो बदनाम !!

"जय कुमार"