Sunday, 28 June 2015
पीठ तहुलुहान
पीठ तहुलुहान हुई ये दोस्तों का प्यार है ।
छाती अभी साबत दुश्मन का इंतजार है ।
भरोसे वफा की इस खूबसूरत आदत में ,
फूल मुरझाये है अब जख्मों की बहार है ।।
छाती अभी साबत दुश्मन का इंतजार है ।
भरोसे वफा की इस खूबसूरत आदत में ,
फूल मुरझाये है अब जख्मों की बहार है ।।
"जय कुमार"२८/०६/१५
दर्द
दर्द कौन समझता है एक बेरोजगार का ।
रोज बाजार सजता है..बस भ्रष्टाचार का ।
घोड़ों को दोड़ने का...मौका कहाँ मिलता ,
लोगो को इंतजार है गधों के व्यवहार का।।
रोज बाजार सजता है..बस भ्रष्टाचार का ।
घोड़ों को दोड़ने का...मौका कहाँ मिलता ,
लोगो को इंतजार है गधों के व्यवहार का।।
"जय कुमार"
Saturday, 27 June 2015
तपन से डरे
तपन से डरे बिखरने लगे ।
आश से मिले सँवरने लगे ।
जिंदगी डोर साँस से बँधी ,
वक्त से चले बदलने लगे ।
आश से मिले सँवरने लगे ।
जिंदगी डोर साँस से बँधी ,
वक्त से चले बदलने लगे ।
खुमार चड़ा रहा बर्षो तक
समय से जले उतरने लगे ।
मुखातिब रोज खुद से हुए ,
आईने से ..... बिगड़ने लगे ।
मुलाकात मन से की कभी ,
मन से मिले निखरने लगे ।।
"जय कुमार"27/06/15
समय से जले उतरने लगे ।
मुखातिब रोज खुद से हुए ,
आईने से ..... बिगड़ने लगे ।
मुलाकात मन से की कभी ,
मन से मिले निखरने लगे ।।
"जय कुमार"27/06/15
यूँ ख्याली
यूँ ख्याली पुलाव न पकाया करो ।
बेवजह बातों से न जलाया करो ।
चाहते तुमको दिलो जान से यारा ,
यूँ शक के तीर न अजमाया करो ।।
बेवजह बातों से न जलाया करो ।
चाहते तुमको दिलो जान से यारा ,
यूँ शक के तीर न अजमाया करो ।।
"जय कुमार"27/06/15
जाते
गुजर जाते हो....मुस्कुराते हुए ।
जानते न तुमे यह...बताते हुए ।
क्या कर रहे हो , क्या जता रहे
गैर बनके यूँ हाथ मिलाते हुए ।।
जानते न तुमे यह...बताते हुए ।
क्या कर रहे हो , क्या जता रहे
गैर बनके यूँ हाथ मिलाते हुए ।।
"जय कुमार"27/06/15
नवनीत विचार
नवनीत विचार लिये , नव प्रभात आया है ।
घोर तम को मिटाकर , नव प्रकाश आया है ।
भोर का संदेश लेकर , प्रकाश तेरे द्वार पर ,
दूर का सफर करके , भानु मिलने आया है ।।
घोर तम को मिटाकर , नव प्रकाश आया है ।
भोर का संदेश लेकर , प्रकाश तेरे द्वार पर ,
दूर का सफर करके , भानु मिलने आया है ।।
"जय कुमार"26/06/15
आँधियोँ में
आँधियोँ में आसियाना ...... जाने किधर गया ।
हवाओं ने किया रुख जिस तरफ उधर गया ।
पत्थरों के वार संग तेज बारिष का कहर था ,
मिट्टी का बना था घर ... टूटकर बिखर गया ।।
हवाओं ने किया रुख जिस तरफ उधर गया ।
पत्थरों के वार संग तेज बारिष का कहर था ,
मिट्टी का बना था घर ... टूटकर बिखर गया ।।
"जय कुमार"25/06/15
लोग कहते है इन
लोग कहते है इन आँखों में बेइंतहा कशिश है ,
यह कशिश इश्क के दरिये में जलकर मिली है ।
"जय कुमार"25/06/15
यह कशिश इश्क के दरिये में जलकर मिली है ।
"जय कुमार"25/06/15
मुश्किलें सच्चाई
मुश्किलें सच्चाई की राह पे आती हैं ,
जो चले नहीं वो क्या जाने ।
बुरी नजर खिले फूलों पर होती है ,
जो खिले नहीं वो क्या जाने ।
खुशी व गम मिलना तय जिन्दगी में ,
तब राह नेक पकड़ लेना ,
नेकी के अहसास मेँ ही रब मिलते है ,
जो मिले नहीं वो क्या जाने ।।
जो चले नहीं वो क्या जाने ।
बुरी नजर खिले फूलों पर होती है ,
जो खिले नहीं वो क्या जाने ।
खुशी व गम मिलना तय जिन्दगी में ,
तब राह नेक पकड़ लेना ,
नेकी के अहसास मेँ ही रब मिलते है ,
जो मिले नहीं वो क्या जाने ।।
"जय कुमार"25/06/15
ग्रीष्म में पत्ती
ग्रीष्म में पत्ती का अक्कसर ,
डाली हाथ .... छोड़ देती है ।
सख्त हालात में ..अक्कसर ,
दुनिया साथ ..छोड़ देती है ।।
डाली हाथ .... छोड़ देती है ।
सख्त हालात में ..अक्कसर ,
दुनिया साथ ..छोड़ देती है ।।
"जय कुमार"25/06/15
Tuesday, 23 June 2015
"हाइकु"
मिलते चले
राह में मिला जो भी
दीवाना कहाँ
दीवाना कहाँ
कुछ कहते
कुछ सुनते चले
चला बसेरा
कुछ सुनते चले
चला बसेरा
ठौर ठहर
चलते है पहर
मेरी डगर
चलते है पहर
मेरी डगर
रास्ते मंजिल
रास्ते ही प्यार बने
रास्ते हैं चले
रास्ते ही प्यार बने
रास्ते हैं चले
मुसाफिर का
मुकद्दर चलना
राहों से दोस्ती
मुकद्दर चलना
राहों से दोस्ती
गैर का घर
मेरा पल दो पल
बसेरा रहा
मेरा पल दो पल
बसेरा रहा
गाँव नगर
बसे बड़े शहर
राह नजर
बसे बड़े शहर
राह नजर
कहते नहीं
खामोश अफसाना
प्यार है न्यारा
खामोश अफसाना
प्यार है न्यारा
"जय कुमार"23/06/15
जज्बात प्यार के
जज्बात प्यार के मचल जाते है ।
वेहया होकर वो निकल जाते है ।
वेहया होकर वो निकल जाते है ।
नाजुक दिल मेँ छुपे हैं अरमान जो ,
बेरहम होकर वो कुचल जाते है ।
बेरहम होकर वो कुचल जाते है ।
शाम सूनी सुबह की आस करती ,
पहर इक आस में निकल जाते है ।
पहर इक आस में निकल जाते है ।
सर मुड़ाया एक अरसे बाद मैने ,
आसमाँ के जमे जल पिघल जाते है ।
आसमाँ के जमे जल पिघल जाते है ।
"जय कुमार"22/06/15
कभी बुरे वक्त
कभी बुरे वक्त के हाल पर रोये ।
कभी अपने ही बदहाल पर रोये ।
मेरी राहों ने मुझे कब रोका था ,
हम तो अपनी ही चाल पर रोये ।।
कभी अपने ही बदहाल पर रोये ।
मेरी राहों ने मुझे कब रोका था ,
हम तो अपनी ही चाल पर रोये ।।
"जय कुमार"22/06/15
भरम हमारे
भरम हमारे सब .. टूट गये ।
दिल की दौलत वो लूट गये ।
यह रुत .... तन्हाई में बीती ,
उस रुत के साथी . रूठ गये ।।
दिल की दौलत वो लूट गये ।
यह रुत .... तन्हाई में बीती ,
उस रुत के साथी . रूठ गये ।।
"जय कुमार"20/06/15
Sunday, 21 June 2015
जब तक जीव
जब तक जीवन ज्योति तन में
तेरा चेहरा मेरे ……… मन में
आजा सब …… बंधन तोड़कर
मिल गीत …. गायें मधुवन में
"जय कुमार "२२/०६ /१५
तेरा चेहरा मेरे ……… मन में
आजा सब …… बंधन तोड़कर
मिल गीत …. गायें मधुवन में
"जय कुमार "२२/०६ /१५
Friday, 19 June 2015
हर तरफ एक
हर तरफ एक ही मंजर देखा ।
खिले फूल पर ही खंजर देखा ।
खिलते थे पुष्प प्रेम के कभी ,
उस जगह को ही बंजर देखा ।।
खिले फूल पर ही खंजर देखा ।
खिलते थे पुष्प प्रेम के कभी ,
उस जगह को ही बंजर देखा ।।
"जय कुमार"18/06/15
टूटे ख्वाबों
टूटे ख्वाबों की ..... कसक ना रख ।
बिछड़ी राहों की....भनक ना रख ।
वक्त निकल गया.... गमों का अब ,
उलझे सवालों की सनक ना रख ।।
बिछड़ी राहों की....भनक ना रख ।
वक्त निकल गया.... गमों का अब ,
उलझे सवालों की सनक ना रख ।।
"जय कुमार"17/06/15
की आदत हो गई
दूरियों को सहने की आदत हो गई ।
आँखों को बहने की आदत हो गई ।
घर की बिखरी चीजें समेटते रहते ,
अकेले यूँ रहने की .. आदत हो गई ।।
आँखों को बहने की आदत हो गई ।
घर की बिखरी चीजें समेटते रहते ,
अकेले यूँ रहने की .. आदत हो गई ।।
"जय कुमार"17/06/15
बात थी छोटी
बात थी छोटी बबाल बड़ा था ।
छोटी राई का पहाड़ खड़ा था ।
अपवाहों से एक के हुए हजार ,
देखत रस्सी का साँप पड़ा था ।।
छोटी राई का पहाड़ खड़ा था ।
अपवाहों से एक के हुए हजार ,
देखत रस्सी का साँप पड़ा था ।।
"जय कुमार"16/06/15
रुखी सूखी मिल
रुखी सूखी मिल भी जाये बसर कैंसे हो ।
भारी चट्टान पर हथोड़े का असर कैंसे हो ।
मुफलिसी के नासूर सजते रहे पल - पल ,
भूख की आग में जिँदगी का सफर कैँसे हो ।।
भारी चट्टान पर हथोड़े का असर कैंसे हो ।
मुफलिसी के नासूर सजते रहे पल - पल ,
भूख की आग में जिँदगी का सफर कैँसे हो ।।
"जय कुमार"16/06/15
तरसती नजरों
तरसती नजरों से देखकर हमें ना बहकाया करों ।
एक अरसे से सोये जज्बात उन्हें ना जगाया करो ।
मुहब्बत में वेहयाई के तोहफे बहुत मिलें मुझको ,
अश्क बहाकर सूखी आँखें उन्हें ना बहलाया करो ।।
एक अरसे से सोये जज्बात उन्हें ना जगाया करो ।
मुहब्बत में वेहयाई के तोहफे बहुत मिलें मुझको ,
अश्क बहाकर सूखी आँखें उन्हें ना बहलाया करो ।।
"जय कुमार"15/06/15
गुमसुम गुमसु
गुमसुम गुमसुम,,,,रहते हो तुम ।
क्या गम है जो,,,, सहते हो तुम ।
छुपा रखे है ........... दर्द हजारों ,
क्या सच है क्या कहते हो तुम ।।
क्या गम है जो,,,, सहते हो तुम ।
छुपा रखे है ........... दर्द हजारों ,
क्या सच है क्या कहते हो तुम ।।
"जय कुमार"15/06/15
अनजाने शहर
अनजाने शहर में अनजाना सफर है ।
किसे ढ़ूँढ़ती आँखे वेगाना वेखबर है ।
तन्हाई का आलम .... तन्हा हर कोई ,
रास्ते शोर से भरे गुमसुम नजर है ।।
किसे ढ़ूँढ़ती आँखे वेगाना वेखबर है ।
तन्हाई का आलम .... तन्हा हर कोई ,
रास्ते शोर से भरे गुमसुम नजर है ।।
"जय कुमार"14/06/15
वो मुहब्बत की
वो मुहब्बत की कहानी सी लगती है ।
वो आती रंगीन जवानी सी लगती है ।
वो आती रंगीन जवानी सी लगती है ।
घूँघट में छुपा चेहरा देखता उसका ,
वो गाती सुबह सुहानी सी लगती है ।
वो गाती सुबह सुहानी सी लगती है ।
प्यार में ये जमाना नामुराद क्या हुआ ,
वो चढ़ती शराब पुरानी सी लगती है ।
वो चढ़ती शराब पुरानी सी लगती है ।
खुशबु बिखर जाती राह में चलने से ,
रुखे चेहरों पर रवानी सी लगती है ।
रुखे चेहरों पर रवानी सी लगती है ।
मौसम बदलते इक इशारे पर उसके ,
कुदरत उसपे दीवानी सी लगती है ।।
कुदरत उसपे दीवानी सी लगती है ।।
"जय कुमार"12/6/15
जज्बात का दरि
जज्बात का दरिया हूँ , साथ बह लेना ।
काँटों से भरा सफर हूँ , साथ रह लेना ।
वक्त पर वयाँ कर लेना हाल -ए-दिल ,
दिल में छुपाये हो जो , बात कह लेना ।।
काँटों से भरा सफर हूँ , साथ रह लेना ।
वक्त पर वयाँ कर लेना हाल -ए-दिल ,
दिल में छुपाये हो जो , बात कह लेना ।।
"जय कुमार"11/06/15
छोड़कर यूँ
छोड़कर यूँ परदेश जाना .... अच्छा नहीं ।
सदियों का यूँ प्रेम भुलाना .. अच्छा नहीं ।
माना अनबन हो जाती थी कभी - कभी ,
गैर की यूँ महफिल सजाना अच्छा नहीं ।।
सदियों का यूँ प्रेम भुलाना .. अच्छा नहीं ।
माना अनबन हो जाती थी कभी - कभी ,
गैर की यूँ महफिल सजाना अच्छा नहीं ।।
"जय कुमार"11/06/15
झूठ बोलो
झूठ बोलो .... तो कमाल की बात है ।
सत्य बोलो ... तो बबाल की बात है ।
ना जाने कैंसा ...... विवेक मानव का ,
कुछ न बोलो तो सवाल की बात है ।।
सत्य बोलो ... तो बबाल की बात है ।
ना जाने कैंसा ...... विवेक मानव का ,
कुछ न बोलो तो सवाल की बात है ।।
"जय कुमार"11/06/15
झूठ को चिल्लाने
झूठ को चिल्लाने दो....ईमान अभी बाँकी है ।
सच्चाई कहने के लिए जुबान अभी बाँकी है ।
कातिल हौंसले पस्त ना होंगे ... हमारे कभी ,
खून से सने इस जिस्म में जान अभी बाँकी है ।।
सच्चाई कहने के लिए जुबान अभी बाँकी है ।
कातिल हौंसले पस्त ना होंगे ... हमारे कभी ,
खून से सने इस जिस्म में जान अभी बाँकी है ।।
"जय कुमार"10/6/15
ऐंसी क्या बात
ऐंसी क्या बात थी जो कह ना सके ।
ऐसा क्या दर्द था जो सह ना सके ।
पत्थर दिल बन गये तुम कैंसे यार ,
जज्बात का दरिया था बह ना सके ।।
ऐसा क्या दर्द था जो सह ना सके ।
पत्थर दिल बन गये तुम कैंसे यार ,
जज्बात का दरिया था बह ना सके ।।
"जय कुमार"9/06/15
Tuesday, 9 June 2015
कल के फूल
कल के फूल अब शूल बने है ।
शेरनी ने अब सियार जने है ।
बिगड़ गया माहौल समाज का
बिपदाओं के.... जंगल घने है ।।
शेरनी ने अब सियार जने है ।
बिगड़ गया माहौल समाज का
बिपदाओं के.... जंगल घने है ।।
"जय कुमार"8/6/15
नाम मिला ।
किसी को नाम मिला ।
किसी को काम मिला ।
भरी महफिल में मुझे ,
जाम... बदनाम मिला ।।
किसी को काम मिला ।
भरी महफिल में मुझे ,
जाम... बदनाम मिला ।।
"जय कुमार"8/6/15
प्यार करने
प्यार करने का ये इनाम मिला
सारे जहाँ में बदनाम मिला
करते रहे मुहब्बत उससे हम
दीवाना मुझे इक नाम मिला
सारे जहाँ में बदनाम मिला
करते रहे मुहब्बत उससे हम
दीवाना मुझे इक नाम मिला
"जय कुमार"8/6/15
जिन्दगी दो
जिन्दगी दो कदम चले , मुश्किलें चलें पाँच ।
हुकूमत तेरी न चले , समय के साथ नाँच ।
समय के साथ नाँच , ओर कोई राह नहीं ।
जहाँ से आये तुम , जाना भी होगा वहीं ।।
हुकूमत तेरी न चले , समय के साथ नाँच ।
समय के साथ नाँच , ओर कोई राह नहीं ।
जहाँ से आये तुम , जाना भी होगा वहीं ।।
"जय कुमार"8/6/15
चापलूस
चापलूस बनकर रहे , बड़ी कुत्तों कि फौज ।
सुलझों को दाना नहीं , चापलूसों की मौज ।।
सुलझों को दाना नहीं , चापलूसों की मौज ।।
"जय कुमार"7/6/15
दिखाबा ज्ञान
दिखाबा ज्ञान का करेँ , वे ज्ञानी ना होत ।
ज्ञानी खुद में ही रमें , अहं वहम को खोत ।।
ज्ञानी खुद में ही रमें , अहं वहम को खोत ।।
"जय कुमार"7/6/15
छवि निहारत
छवि निहारत रहते जा , मिट्टी में मिल जात ।
जिस तन में तल्लीन है , जो मरघट तक जात ।
जो मरघट तक जात , खबर नहीं का होत है ।
चिड़िया फुर हो जात , देह बेखबर सोत है ।।
जिस तन में तल्लीन है , जो मरघट तक जात ।
जो मरघट तक जात , खबर नहीं का होत है ।
चिड़िया फुर हो जात , देह बेखबर सोत है ।।
"जय कुमार"7/6/15
मासूम ख्वाबों
मासूम ख्वाबों का खूबसूरत जमाना था ।
बचपन हँसता हरेक गम से बेगाना था ।।
बचपन हँसता हरेक गम से बेगाना था ।।
गाय के संग वो दूर तलक भागकर जाना ।
यारों के संग वो बेर अमरुद को खाना ।
मटर खाते थे खेतों में चोरी से चुनके ,
बचपन मौज मस्ती का महकता खजाना था ।।
यारों के संग वो बेर अमरुद को खाना ।
मटर खाते थे खेतों में चोरी से चुनके ,
बचपन मौज मस्ती का महकता खजाना था ।।
बावड़ी के पानी में वो कूदकर उछलना ।
टीलों पे चढ़कर रपट रपट कर खिसकना ।
कपड़े की गेंद व लकड़ी का गिल्ली डंडा ,
बचपन खिलखिलाते खेलों का दीवाना था ।।
टीलों पे चढ़कर रपट रपट कर खिसकना ।
कपड़े की गेंद व लकड़ी का गिल्ली डंडा ,
बचपन खिलखिलाते खेलों का दीवाना था ।।
बहिन को चिड़ाना बड़े भैया को छकाना ।
दादी की लाठी पर दादू का जब हँसना ।
माँ की मीठी फटकार बापु का लाड़ प्यार ,
बचपन अनचुने खिले फूलों का अफसाना था ।।
दादी की लाठी पर दादू का जब हँसना ।
माँ की मीठी फटकार बापु का लाड़ प्यार ,
बचपन अनचुने खिले फूलों का अफसाना था ।।
"जय कुमार"
कागज कलम
कागज कलम भूल गये , मोबाइल पे बात ।।
लाज शर्म सब छोड़के ,,,,,,,,, ईलू ईलू गात ।।
लाज शर्म सब छोड़के ,,,,,,,,, ईलू ईलू गात ।।
"जय कुमार"2/6/15
राजनीति की
राजनीति की राह में , घर भरने पर जोर ।
भाषण में गीता कहें , सबके सब जो चोर ।।
भाषण में गीता कहें , सबके सब जो चोर ।।
"जय कुमार"1/6/15
लाज शरम सबई
लाज शरम सबई भूल कें
अपनो खेरो घरई भूल कें
ईलु ईलु गाऊँ लगे ।
लरका उजारे जाऊँ लगे ।।
अपनो खेरो घरई भूल कें
ईलु ईलु गाऊँ लगे ।
लरका उजारे जाऊँ लगे ।।
लरकोरी जा तोरी उमरिया
देख देख के पतरी कमरिया
भैया बंशी बजाऊँ लगे ।
लरका उजारे जाऊँ लगे ।।
देख देख के पतरी कमरिया
भैया बंशी बजाऊँ लगे ।
लरका उजारे जाऊँ लगे ।।
खबर सबर तो छोड़ छाड़ कें
चिट्रटी चिठ्रठा फोड़ फाड़ कें
मोबाइल पे बतयाऊँ लगे ।
लरका उजारे जाऊँ लगे ।।
चिट्रटी चिठ्रठा फोड़ फाड़ कें
मोबाइल पे बतयाऊँ लगे ।
लरका उजारे जाऊँ लगे ।।
भैया गये पड़न खो काँलेज
सिगरट को हो गयो नाँलेज
दवाकें पाऊच चबाऊँ लगे ।
लरका उजारे जाऊँ लगे ।।
सिगरट को हो गयो नाँलेज
दवाकें पाऊच चबाऊँ लगे ।
लरका उजारे जाऊँ लगे ।।
बी ई कर लई डिग्री ले लई
फीस ने दद्दा कि जानईं ले लई
खेत में बखर अब चलाऊँ लगे ।
लरका उजारे जाऊँ लगे ।।
फीस ने दद्दा कि जानईं ले लई
खेत में बखर अब चलाऊँ लगे ।
लरका उजारे जाऊँ लगे ।।
ये की जोरी ओकी जोरी
ठलुओं के संग कुठियाँ फोरीं
चौंतरा पे बतयाऊँ लगे ।
लरका उजारे जाऊँ लगे ।।
ठलुओं के संग कुठियाँ फोरीं
चौंतरा पे बतयाऊँ लगे ।
लरका उजारे जाऊँ लगे ।।
"जय कुमार" 31-05-15
कुछ बोलूँ
कुछ बोलूँ तो बबाल करते है ।
चुप रहूँ तो सवाल करते है ।
क्या कहेंगे लोग के रोग में ,
हम जिंदगी हलाल करते है ।।
चुप रहूँ तो सवाल करते है ।
क्या कहेंगे लोग के रोग में ,
हम जिंदगी हलाल करते है ।।
"जय कुमार"29/05/15
Monday, 8 June 2015
कछु हमाई
कछु हमाई भी सुन लईओ
कछु तुमाई भी सुन लेहें
अपनी अपनी चलईओ ने ।
बिना राग के गईओँ ने ।।
कछु तुमाई भी सुन लेहें
अपनी अपनी चलईओ ने ।
बिना राग के गईओँ ने ।।
बिना राग के गईओ ने . . !
एक जगाँ हम बैठे नईयाँ
मुलक भरे में घूमत भैयाँ
हमकों कछु पड़ईओं ने ।
बिना राग के गईओं ने ।।
मुलक भरे में घूमत भैयाँ
हमकों कछु पड़ईओं ने ।
बिना राग के गईओं ने ।।
बिना राग के गईओं ने . . !
अपनों मान संग में रखिओ
उल्टी पुल्टी एक न बकिओ
जोन घरे पानी ने मिलवे
ओके घरे तुम जईओं ने ।
बिना राग के गईओ ने ।।
उल्टी पुल्टी एक न बकिओ
जोन घरे पानी ने मिलवे
ओके घरे तुम जईओं ने ।
बिना राग के गईओ ने ।।
बिना राग के गईओ ने . . !
चार रुपया तोरे हो गये
ये जमाने में तुम खो गये
जो तो आवत जावत रेत है ,
ये पे तुम इठलईओ ने ।
बिना राग के गईओ ने ।।
ये जमाने में तुम खो गये
जो तो आवत जावत रेत है ,
ये पे तुम इठलईओ ने ।
बिना राग के गईओ ने ।।
बिना राग के गईयों ने . . !
बऊ दद्दा की सेवा करने
सबेरे सँझे राम खो भजने
जो तन तोरो जेने बनाओ
ओखो कबऊँ भुलईओ ने ।
बिना राग के गईओ ने ।।
सबेरे सँझे राम खो भजने
जो तन तोरो जेने बनाओ
ओखो कबऊँ भुलईओ ने ।
बिना राग के गईओ ने ।।
बिना राग के गईओ ने . . !
"जय कुमार"28/05/15
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