Sunday, 30 October 2016

अपनी चौखट कर लई , हमने फिर उजयार |
उनके दीपक भी जले , जिनके घर  तिरपार ||

"जय कुमार "

Saturday, 29 October 2016

आज दिवारी के दिना , राम  राम  कर  लेत |
गौर साब की धरा से , जय शुभकामना देत ||

नमन जवानों  को करें , भारत मां  के  लाल |
सीना ताने जब  चले ,  डरता  है फिर काल ||

नमन   जवानों  को  करें ,  लड़े  हमारी  जंग |
रंगों को  सब  छोड़ के , खाकी  जिनके  संग ||

मौसम  में  ठंडी  घुली , बोनी  को  भव   टेम |
किसान खुश होने लगे,  भरे  देख  रय  डेम ||

कोयल  मीठे  बोल से , सबको  रही रिझाय |
मोर   मोरनी  खेत  में , देखत  मन  मुस्काय ||

अपने दुख  सब भूल के , औरन  का दे संग |
सारे  रंगों  में   भला ,  केसरिया    इक   रंग ||

"जय कुमार"

समस्त सम्मानीय मित्रों को दीपावली की सपरिवार हार्दिक शुभकामनायें  व बधाईयां !!

Thursday, 27 October 2016

मित्रों
हमने पिछले १८ साल से पटाके नहीं फोड़े लेकिन हमारी अगली पीढ़ी के जो बच्चे है उनको हम एकाएक प्रतिबंद नहीं लगा सकते फिर भी
यह विडियो हमने अपने बच्चो को दिखाये तो वह बोले चाचा हमे इस बार पटाके नहीं चाहिए हम हमे बहुत खुशी हुई १२ साल का बच्चा समझ सकता है ,,,, लेकिन दुख तब होता है जब वो लोग जिनके बच्चे बड़े बड़े हो गये वह पटाके फोड़ते है ,,, !!

Tuesday, 25 October 2016

जात पात सब छोड़के , गाते एक ही गीत
भारत मां की गोद से , सबको रहती प्रीत

जय कुमार

हिन्दू मुस्लिम  जैन  से , भारत  का  सम्मान |
सबके सब मिलके कहो , प्यारा हिन्दुस्तान ||

जय कुमार

लेकर कछु न आये थे , देकर कछु ना जाय |
करनी  जैसी कर  रहे , वैसे ही  फल  पाय ||

जय कुमार

सारा जग मैदान है , मानव खेलन हार |
कठिन राहों से परे  , जाना हमको पार ||

जय कुमार

दुनिया रंगमंच हुई , अभिनय अपने पास |
सच झूठ के खेल में , करना हमको वास ||

जय कुमार

उम्दा अभिनय कर चले , हो जाये हम पास |
मुंह खोले  काल खड़ा , हो  न  जाये विनास ||

जय कुमार

Monday, 24 October 2016

कबँहू न प्रीत कीजिए , सुनते ना जो बात |
अपने मे जीते सदां ,  करे  भरम का घात ||

"जय कुमार "

सच्ची प्रीत की चाह में , सब जग देखो छान |
राह  राह  भटकत   रहा , मेरा   झूठा   भान ||

"जय कुमार "

जहां स्वार्थ के बीज हो , पनपे कैंसे प्यार |
रिश्ते में व्यापार करे , वह  काहे का यार ||

"जय कुमार "

मान मोह तज कर मिले , मन की शांति अपार |
अपने  मन  से  जो  मिले , दूजा  कब   करतार ||

"जय कुमार "

शांत  स्भाव  में बस रहा  , यह  सारा  संसार |
विचलित जो खुद न रहे , शक्ति उसमें अपार ||

"जय कुमार "

शांत  स्भाव  में बस रहा  , यह  सारा  संसार |
विचलित जो खुद न रहे , शक्ति उसमें अपार ||

"जय कुमार "

जनता  के  दिन  फिर  गये , लाये    मोदी   राज |
कमल कमल ही दिख रहा , सुलटे नईंया काज ||

"जय कुमार "

अहंकार  के   साथ    में ,  कैंसे    बैठे   आप |
अभिमान क्रोध को जने , क्रोध पाप को बाप ||

"जय कुमार "

रंग बिरंगे रंग की , रंगोली रंगदार |
द्वारे द्वारे दिख रई , रंगो  की बहार ||

"जय कुमार"

Sunday, 23 October 2016

कुम्हार का दीपक ही लेना , रखना मान मजदूर का |
मेहनताना  उनको  देना , मिट्टी  के  कोहिनूर   का |
देश धर्म  की  बात चली है , वक्त  जागने  आया   है ,
दीप जला के दुख हर लेना ,  दिवाली पर मजबूर का ||

"जय कुमार"

Wednesday, 19 October 2016

बीते  हुए  लम्हों की  याद  सताती रही |
गांव की वो  गलियां  रोज  बुलाती रही ||

शहर में  वेहयाई  कि  इंतिहां  से  मिले ,
पनघट  की हमको  गोरी रिझाती रही |

बूढे  बरगद  की छाया  से  ठंडक  मिले ,
वो  बापू की लकड़ी याद  दिलाती रही |

ख्वाबों  के शहरों से  हम आकर  मिले ,
मिट्टी के  रिश्तों की  बात  जाती रही |

तंग गलियां संग दिल लोगों कि दुनिया ,
संस्कारों को जय दीमक सी खाती रही ||

"जय कुमार"२०/१०/१६



बेमुरव्वत  तेरी   तस्वीर  ,  जला   न   पाया ।
दिल के बाग में , फूल दूसरा ,खिला न पाया ।
ख्वावों  में  रोज  हम तेरे , अक्स  से  मिलते ,
मुहब्बत को तेरी , आज तक , भुला न पाया ।।

"जय कुमार"

Tuesday, 18 October 2016

शहरों  के  सन्नाटे  से जब , कोई  पीर  निकलती है |
भाव  हिलोरे  तब  लेते है , मेरी  कलम  उबलती  है ||

आह मुफलिसी की कांनों में , जब उत्पात मचाती है ,
जज्बातों  की  गहराई  से , कोई नज्म  निकलती है |

रोशनी में  नहाया जब है  , शहरों  का  कोना  कोना
जहीं उजाला नहीं पुहुँचता ,वहां मुफलिसी पलती है |

कारोबार  के कौशलों से ,विकसित  हुआ समाज है ,
उँची  इमारत  के  साये  में ,  बैठी  भूख  मचलती है |

यारी हुई थी कल भूख की , राह पड़े कुछ टुकड़ो से ,
यार  आज वेवफा  हुआ  है , यारी रोज  न  चलती है ||

"जय कुमार"18|10|16

Thursday, 13 October 2016

लोहा कहे लुहार से , काहे  पीटत  मोय |
मेरे आगे तू  जले , मोय   न   मारे  कोय ||

"जय कुमार"

Wednesday, 12 October 2016

दुरजन अपने  काम से , हो जाता बदनाम |
सज्जन अपने काम से , कर जाता है नाम ||

"जय कुमार"

इस ग्रुप सभी सदस्य हमारे प्रिय मित्र बंदु है आशा करते है हम सब  मित्रवत आचरण के साथ हँसते हुए रहेगे  !! हार्दिक स्वागत है आप सबका !!

राम राम  !
जय जिनेन्द्र !
जय श्री कृष्णा !

Sunday, 9 October 2016

कहीं   मिले  कहीं  फरियाद  से  रहे |
जखम  वो   गहरे   आबाद   से  रहे ||

मिलन की तमन्ना जिंदा रही दिल में
भूले   बिसरे   ख्वाव    याद  से   रहे |

यूँ  तो  सबकुछ  पाया   जिन्दगी  से ,
बिन  उसके  हरपल  बर्बाद  से  रहे ||

"जय कुमार"10/10/15

Friday, 7 October 2016

सुकून की  चाह  करते रहे
गुनाह पे  गुनाह  करते रहे

मुकम्मल  जिंदगी के  लिए
जिंदगी  तबाह   करते  रहे

सीरत  मैली  रही  जिनकी
सूरत  पर  वाह  करते  रहे

आंधियाँ  उड़ा  गई घरौंदा
आह भर निबाह करते रहे

मासूम बच्चे से मिल  लगा
रब  से  गुमराह  करते  रहे

"जय कुमार"08/10/16

Tuesday, 4 October 2016

जिंदगी जिंदादिली से तब ही जीता  हूँ
जाम  जब  तलक मैं  बेहिसाब पीता हूँ
रंज  से  दोस्ती हुई  खुशी से  बैर  मेरा
जख्म फूलों ने दिये  मैं  उनको सींता हूँ

"जय कुमार "